राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बिलासपुरः लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर विकास कार्यों की गुणवत्ता की पोल खोलकर रख दी है। बिलासपुर-उरगा फोरलेन परियोजना के तहत ढेंका गांव के पास निर्माणाधीन ओवरब्रिज का एप्रोच हिस्सा बारिश के चलते धंस गया। मिट्टी, मुरूम और गिट्टी बहकर नेशनल हाईवे-49 पर फैलने से रायपुर और रायगढ़ मार्ग पर घंटों भीषण जाम की स्थिति बनी रही। निर्माणाधीन ओवरब्रिज के एप्रोच की मिट्टी अचानक धंसने से नेशनल हाईवे-49 पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा फैलने के कारण वाहनों की रफ्तार थम गई और देखते ही देखते कई किलोमीटर लंबी कतार लग गई। देर रात से शुरू हुआ जाम गुरुवार शाम तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका, जिससे बसों, कारों और भारी मालवाहक वाहनों में सवार यात्रियों को बारिश के बीच काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय निवासियों ने बताया कि घटना की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दे दी गई थी। इसके बावजूद नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) और स्थानीय प्रशासन की टीम काफी देर बाद मौके पर पहुंची। इस देरी के कारण यात्रियों को घंटों फंसे रहना पड़ा। प्रशासन और निर्माण एजेंसियां अब पोकलेन व जेसीबी की मदद से मार्ग को साफ कर यातायात बहाल करने के प्रयास में जुटी हैं। घटना ने फोरलेन परियोजना में हो रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली ही तेज बारिश में एप्रोच रोड का बह जाना ठेका कंपनी की लापरवाही और अफसरों की अनदेखी को उजागर करता है। घंटों फंसे रहे यात्री, प्रशासन की देरी से बढ़ा आक्रोश हादसे के बाद एनएच-49 पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें एंबुलेंस, बसें और आवश्यक सेवाओं के वाहन फंसे रहे। यात्रियों ने बताया कि एनएचएआई और प्रशासन की टीम काफी देर से पहुंची। यदि समय पर राहत कार्य शुरू कर दिया जाता तो लोगों को बारिश के बीच इतनी लंबी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है। एप्रोच रोड का इस तरह धंसना साफ दर्शाता है कि रिटेनिंग वाल और मिट्टी-मुरुम के भराव में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। राहगीरों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी ठेका कंपनी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है
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