राष्ट्रवाणी: डिजिटल डेस्क, बेमेतरा। आमतौर पर मगरमच्छ का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर की तस्वीर उभरती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का बावा मोहतरा गांव इस सोच से बिल्कुल अलग कहानी सुनाता है। यहां रहने वाले लोगों ने एक मगरमच्छ को कभी खतरे के रूप में नहीं देखा, बल्कि उसे परिवार का हिस्सा माना। वर्षों तक इंसानों और वन्यजीव के बीच भरोसे का यह रिश्ता कायम रहा। अब इसी अनोखी कहानी को नकेरत ने अपने नए पाठ्यक्रम में शामिल किया है, ताकि देशभर के बच्चे इंसान और प्रकृति के बीच विश्वास के इस उदाहरण से परिचित हो सकें। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव के बीच स्थित एक तालाब में ‘गंगाराम’ नाम का मगरमच्छ रहता था। ग्रामीणों ने उसे यही नाम दिया था और समय के साथ वह गांव की पहचान बन गया। ग्रामीणों के अनुसार, गंगाराम करीब 130 वर्षों तक उसी तालाब में रहा। इस दौरान गांव की कई पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन गंगाराम वहीं मौजूद रहा। गांव वालों का कहना है कि इतने लंबे समय तक तालाब में रहने के बावजूद गंगाराम ने कभी किसी इंसान पर हमला नहीं किया। महिलाएं उसी तालाब से पानी भरती थीं, किसान अपने मवेशियों को वहीं पानी पिलाते थे और बच्चे तालाब के किनारे खेलते थे। मगरमच्छ और इंसानों के बीच वर्षों तक एक अनकहा भरोसा कायम रहा, जिसने इस रिश्ते को बेहद खास बना दिया। समय के साथ गंगाराम की कहानी सिर्फ बावा मोहतरा गांव तक सीमित नहीं रही। इंसान और एक मांसाहारी वन्यजीव के बीच बने इस अनोखे रिश्ते की चर्चा दूर-दूर तक पहुंची। इस कहानी को जानने के लिए वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यटकों ने भी गांव का रुख किया। यह उदाहरण इंसानों और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व की दुर्लभ मिसाल माना जाने लगा। साल 2019 में गंगाराम की मौत हो गई। ग्रामीणों के लिए यह किसी अपने सदस्य को खोने जैसा क्षण था। गांव वालों ने उसका पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया। शोक के प्रतीक के रूप में उस दिन पूरे गांव में किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। गंगाराम की अंतिम विदाई की तस्वीरें उस समय देशभर में चर्चा का विषय बनी थीं। गंगाराम की यह अनोखी कहानी अब देशभर के विद्यार्थियों तक पहुंचेगी। नकेरत ने अपने नए पाठ्यक्रम में ‘My India! अ बोनद बेतवीन हुमानस अनद mals’ शीर्षक के तहत इसे शामिल किया है। पाठ्यक्रम में बताया गया है कि बावा मोहतरा गांव के लोगों ने किस तरह एक मगरमच्छ के साथ ऐसा भरोसेमंद रिश्ता बनाया, जो इंसान और वन्यजीव के सह-अस्तित्व का प्रेरक उदाहरण बन गया है। बावा मोहतरा के गंगाराम की कहानी केवल एक मगरमच्छ की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानों और वन्यजीवों के बीच विश्वास, संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व का संदेश भी देती है। यही वजह है कि अब यह कहानी गांव की सीमाओं से निकलकर देशभर के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी, ताकि नई पीढ़ी प्रकृति और वन्यजीवों के साथ संतुलित संबंधों का महत्व समझ सके।
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