इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया में भड़की जंग अब 19वें दिन और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। हालात ऐसे हैं कि हर दिन हमले पहले से ज्यादा भीषण और विनाशकारी होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका ने ईरान के तटीय इलाकों और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास छिपे मिसाइल ठिकानों पर जबरदस्त हमला बोल दिया। इस हमले में करीब 2200 से ज्यादा किलो (5000 पाउंड) वजनी बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया गया, जो जमीन के अंदर बने मजबूत ठिकानों को भी पलभर में तबाह करने की ताकत रखता हैं।
अमेरिका के इस ताजा हमलों ने साफ कर दिया है कि अब यह संघर्ष सिर्फ सतही नहीं, बल्कि जमीन के नीचे छिपे सैन्य ढांचे को खत्म करने की रणनीति तक पहुंच चुका है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इतने खतरनाक बंकर बस्टर बम ही क्यों चुने गए और ये कितने घातक हैं?
बंकर बस्टर बम के बारे में जानने से पहले 19 दिनों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर एक नजर डालते हैं। इसका कारण है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
इस संघर्ष का बड़ा प्रभाव दुनिया की तेल आपूर्ति और खाड़ी देशों पर साफ-साफ पड़ता नजर आ रहा है। खाड़ी देश इसलिए, क्योंकि जहां एक ओर अमेरिका और इस्राइल ईरान पर लगातार हमले कर रहा है। वहीं दूसरी ओर ईरान इस्राइल व खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से कहर बरपा रहा है।
अब 5000 पाउंड वजनी बंकर बस्टर बम के बारे में जानते हैं
बता दें कि बंकर बस्टर बेहद ताकतवर विस्फोटक हैं, जो जमीन के काफी अंदर तक मार कर सकते हैं। आम तौर पर इन्हें बंकरों को तबाह करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जीपीएस गाइडेड इन बमों को बेहद सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों को निशाना बनाया जाता है। अमेरिका ने फोर्डो को निशाना बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया। बंकर बस्टर बम का वजन 2200 से ज्यादा किलोग्राम है और यह जमीन के अंदर 200 फीट तक घुसकर मार कर सकता है।
20 फीट लंबे और 2.6 फीट व्यास वाले इस विमान को एयर फोर्स रिसर्च लेबोरेटरी के म्यूनिशन डायरेक्टोरेट ने विकसित किया है और बोइंग ने इसका डिजाइन और परीक्षण किया है। अमेरिका ने ईरान पर हमले में 12 बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया।
अमेरिका ने इस बम से हमला क्यों किया?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने ईरान के तटीय इलाकों और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बने मिसाइल ठिकानों पर हमला करने के लिए बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया। क्यों किया और इसी बम को क्यों चुना गया? इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि इन बमों को खासतौर पर जमीन के अंदर बने मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाया जाता है। ये बम पहले जमीन या कंक्रीट की मोटी परत को भेदते हैं और फिर अंदर जाकर विस्फोट करते हैं, जिससे छिपे हुए मिसाइल बेस और सुरंगें भी तबाह हो जाती हैं।
ऐसे में चूंकि ईरान ने अपने कई सैन्य ठिकाने जमीन के नीचे बना रखे हैं, इसलिए ऐसे बमों का इस्तेमाल ज्यादा असरदार माना जाता है। साथ ही इसका बड़ा कारण ये भी है कि 19 दिनों से जारी इस संघर्ष के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ा है। ऐसे में होर्मुज पर इस हमले के जरिए अमेरिका ने ईरान को सख्त संदेश दिए हैं कि अगर होर्मुज को नहीं खोला गया तो अमेरिका का अगला हमला और खतरनाक हो सकता है।

