राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, रायपुर। 45 करोड़ रुपये का निवेश दिलाने और कथित ‘ब्लैक मनी’ को विशेष केमिकल से असली नोटों में बदलने का झांसा देकर कारोबारी से 1.13 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का रायपुर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय (कोलकाता) और दीपिका पालीवाल (उदयपुर, राजस्थान) को नागपुर से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपित पिछले करीब 15 वर्षों से सक्रिय गिरोह के सदस्य हैं और नागपुर, लखनऊ समेत देश के कई राज्यों में इसी तरह करोड़ों रुपये की ठगी की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार बालोद जिले के ग्राम बोरिदकला निवासी उमेश कुमार सिन्हा, जो सालिक ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं, ने तेलीबांधा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कंपनी के विस्तार और नए प्लांट की स्थापना के लिए करीब 45 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात राकेश कौशिक के माध्यम से दीपक सिंह, अभिषेक सिंह, योगी और अन्य लोगों से हुई। आरोपितों ने खुद को प्रभावशाली लोगों और विदेशी निवेशकों से जुड़ा बताते हुए निवेश उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। जांच में सामने आया कि गिरोह ने पहले पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए उसे चेन्नई और नागपुर बुलाया। वहां बड़े अधिकारियों से मुलाकात, फाइल प्रोसेसिंग, सुरक्षा स्वीकृति, विदेशी परीक्षण और हाई-पावर केमिकल जैसी मनगढ़ंत कहानियां गढ़ीं। इतना ही नहीं, नकली केमिकल और विशेष रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन कर यह दिखाया गया कि काले रंग से ढके नोटों को विदेशी तकनीक और केमिकल की मदद से असली भारतीय मुद्रा में बदला जा सकता है। इस पूरे प्रदर्शन में पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर पीड़ित को विश्वास में लिया गया। गिरोह ने निवेश प्रक्रिया पूरी होने का भरोसा दिलाते हुए कभी विदेशी केमिकल मंगाने, कभी हाई-पावर केमिकल खरीदने, कभी विदेशी परीक्षण और कभी वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति का बहाना बनाया। फंड रिलीज होने का झांसा देकर अलग-अलग किश्तों में लगातार रकम मंगाई गई। इस तरह आरोपितों ने पीड़ित से कुल 1 करोड़ 13 लाख रुपये हासिल कर लिए। जब लंबे समय तक न निवेश मिला और न ही रकम वापस हुई तो पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। प्रकरण दर्ज होने के बाद पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (मध्य) तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा तेलीबांधा थाना पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच के दौरान दोनों महिला आरोपितों की पहचान हुई और उनकी लोकेशन नागपुर में मिली। इसके बाद पुलिस टीम नागपुर पहुंची और स्थानीय स्तर पर निगरानी के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह नागपुर, लखनऊ सहित कई राज्यों में निवेश दिलाने, फंड रिलीज कराने और ब्लैक मनी को असली नोट में बदलने का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। रायपुर पुलिस अब अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क कर आरोपितों के आपराधिक रिकॉर्ड और दर्ज मामलों की जानकारी जुटा रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी तेज कर दी गई है। पुलिस ने दोनों आरोपितों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, 26 हजार रुपये नकद, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड सहित करीब 70 हजार रुपये मूल्य का सामान जब्त किया है। आरोपितों के खिलाफ तेलीबांधा थाने में अपराध क्रमांक 330/2026 के तहत बीएनएस की धारा 318(4) और 61(2) के अंतर्गत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के बाकी सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद इस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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