राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, दुर्ग। चाइल्ड लाइन दुर्ग, स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू) और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा बुधवार रात रेस्क्यू किए गए 16 बच्चों में से सात नाबालिग निकले। रेस्क्यू किए गए बच्चे कबीरधाम और राजनांदगांव जिले के हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि इन्हें कचांदुर स्थित मॉडर्न एग्रो मशरूम फैक्ट्री में काम दिलाने लाया जा रहा था। प्रशासन द्वारा सात नाबालिग बच्चों को बाल आश्रय गृह भेज दिया गया। वहीं मामले को लेकर राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्यों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही है। पुलिस का कहना है कि मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग की रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाएगी। रायपुर के भाठागांव बस स्टैंड से एक बस में 16 नाबालिग बच्चों को बाल श्रम के लिए ले जाए जाने की सूचना मिलने पर छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग और विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) ने संयुक्त अभियान चलाकर उन्हें बुधवार रात दुर्ग बस स्टैंड के पास सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। घटना के संबंध में छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा को सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही आयोग ने तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन और स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू) को सक्रिय किया। चाइल्ड लाइन दुर्ग के जिला परियोजना समन्वयक चंद्रप्रकाश पटेल ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों के पास उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर उनसे अलग-अलग पूछताछ की गई। इसके बाद सात नाबालिगों को गुरुवार सुबह बालक कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। नाबालिग बच्चों को बाल आश्रय गृह भेजने के साथ ही उनके स्वजनों को भी सूचना दे दी गई है। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि अन्य नौ में से सात लोग कचांदुर स्थित मशरूम फैक्ट्री में पहले भी काम कर चुके हैं। वहीं नाबालिग बच्चों का कहना था कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है, इसकी जानकारी नहीं थी। चाइल्ड लाइन के अधिकारियों ने यह भी बताया कि उक्त बच्चों को रमेश कुमार नामक व्यक्ति लेने के लिए दुर्ग बस स्टैंड पहुंचा था। रमेश कुमार नसीमपुर जिला चंदौली उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मामले में रमेश कुमार से भी पूछताछ की जा रही है। वहीं राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य विपिन कुमार ने कहा है कि इस प्रकरण में बाल श्रम ही नहीं मानव तस्करी के मामले में भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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