राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बिलासपुर: साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी को एयरटेल का कर्मचारी बनकर झांसे में लिया और मोबाइल में एपीके फाइल इंस्टाल करवाकर 77 हजार रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित की शिकायत पर सिरगिट्टी पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4) और 66(डी) आइटी एक्ट के तहत जुर्म दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। सिरगिट्टी के अन्नपूर्णा कालोनी गणेश नगर में रहने वाले रबिन्द्रनाथ घोष(62) रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। उन्होंने 19 जुलाई को अपने एयरटेल मोबाइल नंबर पर आनलाइन 200 रुपये का रिचार्ज किया था। खाते से रुपये कट जाने के बाद भी उनका रिचार्ज नहीं हुआ। इसके दूसरे दिन वे लिंक रोड पर स्थित मोबाइल कंपनी के स्टोर पहुंचे। स्टोर के कर्मचारी ने उन्हें बताया कि पुराना प्लान समाप्त होने के बाद नया प्लान दिखाई देगा और रात 12 बजे तक इंतजार करने की सलाह दी गई। इसके बाद शाम करीब चार बजे उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से एक काल आया। काल करने वाले ने खुद को मोबाइल कंपनी का कर्मचारी बताते हुए रिचार्ज संबंधी समस्या दूर करने का भरोसा दिलाया। उसने व्हाट्सएप पर एक कस्टमर सपोर्ट नाम से एपीके भेजा और उसे इंस्टाल करने के लिए कहा। जैसे ही पीड़ित ने एप इंस्टाल किया, ठग को उनके मोबाइल का रिमोट एक्सेस मिल गया। इसके बाद उसने गूगल पे की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खुलवाई। कुछ ही देरे में उनके खाते से 38 हजार और 39 हजार रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गए। ठगी का पता चलते ही रबिन्द्रनाथ घोष तत्काल बैंक पहुंचे। उन्होंने अपना बैंक खाता फ्रीज कराया और एटीएम कार्ड ब्लाक करवाया। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पूरे मामले की शिकायत सिरगिट्टी थाने में की है। इस पर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर मामले को जांच में लिया है। एपीके फाइल कैसे बनती है ठगी का हथियार साइबर अपराधी अब एपीके फाइल को ठगी का सबसे आसान माध्यम बना रहे हैं। एपीके एंड्रायड मोबाइल में किसी ऐप को इंस्टाल करने की फाइल होती है। ठग खुद को बैंक, मोबाइल कंपनी, बिजली विभाग या कस्टमर केयर का कर्मचारी बताकर व्हाट्सएप के जरिए यह फाइल भेजते हैं। जैसे ही पीड़ित इसे इंस्टाल करता है, मोबाइल की सुरक्षा कमजोर हो जाती है और कई मामलों में ठग को रिमोट एक्सेस मिल जाता है। इसके बाद वह मोबाइल स्क्रीन देख सकता है, ओटीपी, यूपीआइ पिन या बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल कर लेता है। कई बार पीड़ित को बिना जानकारी दिए उसके खाते से रकम निकाल ली जाती है। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल कभी डाउनलोड न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक, एयरटेल, जियो, बिजली कंपनी या किसी सरकारी संस्था का कर्मचारी बताकर मोबाइल पर ऐप डाउनलोड करने या स्क्रीन शेयर करने को कहे तो तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी भी स्थिति में एपीके फाइल, रिमोट एक्सेस ऐप या स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टाल न करें। अपना ओटीपी, यूपीआइ पिन, एटीएम पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी से साझा न करें। यदि खाते से संदिग्ध लेनदेन हो जाए तो तुरंत बैंक का हेल्पलाइन नंबर मिलाकर खाता और कार्ड ब्लाक कराएं। साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत करें या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय रहते शिकायत करने पर रकम होल्ड या रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है। पुलिस का कहना है कि जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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