नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है और इसे केवल अस्थायी तौर पर रोका गया है. भाजपा ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर ”अनावश्यक और अवांछित” सवाल उठाने से बचने को कहा.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार ने कहीं भी ”युद्ध विराम” शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है और स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुद्दे का समाधान भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता के जरिए हो सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि इस मुद्दे पर किसी मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है.
राज्यसभा सदस्य त्रिवेदी ने कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने आतंकवाद पर भारत सरकार की नयी नीति स्पष्ट रूप से बता दी है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते.” भाजपा नेता ने कहा, ”उन्होंने (प्रधानमंत्री मोदी ने) स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के किसी भी कृत्य का पूरी ताकत से और उचित, सटीक और आक्रामक तरीके से जवाब दिया जाएगा. अब यह आतंकवाद पर भारत की नीति का ‘न्यू नॉर्मल’ है.”
उन्होंने कहा, ”इसलिए उन्हें (कांग्रेस और विपक्षी दलों) इस मुद्दे पर अनावश्यक और अवांछित टिप्पणी करने से बचना चाहिए क्योंकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है.” उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने असाधारण वीरता और सटीक क्षमता का परिचय दिया है. उन्होंने कहा, ”पूरी दुनिया हमारे सशस्त्र बलों की शानदार सफलता को स्वीकार कर रही है.” कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का राजनीतीकरण कर रही है. कांग्रेस ने कहा कि वह देश भर में रैलियां निकालकर भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव रोकने में मध्यस्थता करने और ऑपरेशन को रोकने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर प्रधानमंत्री की ”चुप्पी” को लेकर सवाल उठाएगी.
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा सैन्य कार्रवाई को अपने लिए एक ”ब्रांड” बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि यह कार्रवाई सशस्त्र बलों और देश की है. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए त्रिवेदी ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल द्वारा ऐसे समय में सवाल उठाना, जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अब भी जारी है, उसकी मंशा पर सवालिया निशान लगाता है.
उन्होंने आरोप लगाया, ”एक ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल कहते हैं कि वे इस मुद्दे पर सरकार के साथ हैं, लेकिन यह उनके व्यवहार में नहीं दिखता. वे कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं, जिससे संदेह पैदा होता है.” मध्यस्थता के मुद्दे पर त्रिवेदी ने कहा कि भारत सरकार ने ”बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का मुद्दा एक द्विपक्षीय मुद्दा है.” उन्होंने कहा कि इसे भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से सुलझाया जाना चाहिए.
त्रिवेदी ने कहा, ”भारत के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले दुनिया के सभी देशों के प्रति सम्मान के साथ हम यह कहना चाहते हैं कि पीओके का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है.” उन्होंने कहा, ”किसी भी देश द्वारा मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है, जिसमें वे देश भी शामिल हैं जिन्हें एक समय लोकतंत्र का संरक्षक कहा जाता था और जिन्हें भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के लिए कहा जाता था.” त्रिवेदी ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ”युद्ध विराम” शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है. त्रिवेदी ने कहा, ”’ऑपरेशन सिंदूर’ को समाप्त होने दें, फिर आप जो चाहे कहें या संसद का (विशेष) सत्र बुलाने की मांग करें.”
उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि यह कांग्रेस और विपक्षी दलों की मंशा पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है.” भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर कहा, ”देश तुर्किये और अजरबैजान द्वारा आतंकी राष्ट्र पाकिस्तान को दिए गए समर्थन से क्रोधित है. इन देशों के साथ व्यापार और पर्यटन का बहिष्कार करने की मांग बढ़ रही है और लोग एकजुटता दिखा रहे हैं.” मालवीय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी खुद को भारतीय लोगों की व्यापक भावना के साथ भी नहीं जोड़ पा रही है. उन्होंने कहा, ”इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि यह जनता से इतना कट चुकी है. यह राजनीतिक विस्मृति और पूर्ण अलगाव की हकदार है.”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ यह संदेश देने के लिए जरूरी था कि भारत वीरों का देश है: आरएसएस
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी सुनील आंबेकर ने बुधवार को कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान में चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक ‘स्पष्ट संदेश’ देने के लिए आवश्यक था कि भारत छत्रपति शिवाजी और अहिल्याबाई होल्कर जैसे वीरों का देश है. आरएसएस के राष्ट्रीय मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख यहां साहित्य अकादमी में ‘लोकमाता, देवी अहिल्याबाई होल्कर का जीवन एवं विरासत’ नामक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आंबेकर ने कहा कि भारत आज ऐसे मोड़ पर है, जहां वह आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, ”हमारे लिए व्यापार भी बहुत महत्वपूर्ण है. देश में शांति एवं एकता बनाए रखना भी बहुत महत्वपूर्ण है. इसी तरह पहलगाम आतंकी हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भी जरूरी था.” आंबेकर ने कहा, ”यह स्पष्ट संदेश देना महत्वपूर्ण है कि हमारे पास छत्रपति शिवाजी महाराज और अहिल्याबाई जैसी बहादुर महिलाओं की विरासत है. आप हमारे देश में आकर महिलाओं के माथे का सिंदूर नहीं मिटा सकते.” उन्होंने कहा, ”अनुमति नहीं है. यह नया भारत है.”

