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Home»Blog»भारत-पाक के बीच ‘स्थायी संघर्षविराम’ के लिए हम रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार: चीन
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भारत-पाक के बीच ‘स्थायी संघर्षविराम’ के लिए हम रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार: चीन

atulpradhanBy atulpradhanMay 19, 2025No Comments4 Mins Read
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भारत-पाक के बीच ‘स्थायी संघर्षविराम’ के लिए हम रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार: चीन
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बीजिंग.चीन ने सोमवार को कहा कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच ‘स्थायी संघर्षविराम’ सुनिश्चित करने के लिए एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा. पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक डार के शीर्ष चीनी राजनयिक वांग यी के साथ वार्ता के लिए यहां पहुंचने पर बीजिंग की ओर से यह बयान दिया गया.

डार सोमवार को तीन दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे. भारत द्वारा सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकी ढांचों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सटीक हमले किए जाने के बाद चीन का दौरा करने वाले डार पहले उच्च स्तरीय पाकिस्तानी अधिकारी हैं.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी. उम्मीद है कि डार भारत के सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले सहित कई मुद्दों पर अपने सदाबहार सहयोगी चीन के साथ चर्चा करेंगे.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”चीन और पाकिस्तान सदाबहार रणनीतिक सहयोगी और साझेदार हैं… डार की यह यात्रा पाकिस्तान सरकार द्वारा चीन-पाकिस्तान संबंधों के विकास को दिए जाने वाले उच्च महत्व को दर्शाती है.” माओ ने कहा, ”भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति के बारे में चीन ने कई मौकों पर अपना रुख स्पष्ट किया है. हम दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने और पूर्ण और स्थायी युद्धविराम को सुनिश्चित करने तथा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में रचनात्मक भूमिका निभाने के इच्छुक हैं.” उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान चीन के महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और चीन दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है.

उन्होंने कहा, ”चीन एक सौहार्दपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध पड़ोस; मैत्री, ईमानदारी, पारस्परिक लाभ और समावेशिता के सिद्धांत और सभी पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को बनाने में साझा भविष्य के दृष्टिकोण को बढ.ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है.” हालांकि, उन्होंने भारत के इस दावे से जुड़े सवाल को टाल दिया जिसमें कहा गया है कि चीन ने हालिया सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को हवाई रक्षा और उपग्रह सहायता प्रदान की और चीनी सैन्य प्रणालियों ने औसत से कम प्रदर्शन किया.

उन्होंने कहा कि यह सवाल देश के सक्षम अधिकारियों से पूछा जाना चाहिए. माओ ने उस सवाल को भी टाल दिया जब उनसे पूछा गया कि क्या डार की यात्रा के दौरान चीनी हथियार प्रणाली की फिर से आपूर्ति पर चर्चा की जाएगी. चीनी वायु सेना ने पहले ही उन खबरों का खंडन कर दिया था जिसमें कहा गया था कि वह मालवाहक विमान से पाकिस्तान को हथियार की आपूर्ति कर रही है. यह स्पष्ट नहीं है कि डार के प्रतिनिधिमंडल में कोई वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी शामिल था या नहीं.

‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (एसआईपीआरआई) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के लिए चीन सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से 2020 से 2024 तक की गई हथियारों की खरीद में चीनी हथियार की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत है.

इस खरीद में नवीनतम जेट लड़ाकू विमान, रडार, नौसैनिक जहाज, पनडुब्बियां और मिसाइलें शामिल हैं. पाकिस्तान और चीन संयुक्त रूप से जे-17 विमान बनाते हैं, जो पाकिस्तानी वायु सेना का मुख्य आधार है. चीन की आधिकारिक मीडिया ने पिछले कुछ दिनों में भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष में काफी रुचि दिखाई है और विमानों को मार गिराने सहित पाकिस्तान के कुछ दावों को दोहराया है. लेकिन इसी के साथ चीनी आधिकारिक मीडिया ने भारत द्वारा पाकिस्तान के कई हवाई ठिकानों पर बड़े सैन्य हमलों की खबरों को खारिज कर दिया, जिसमें चीनी रडार और ‘इंटरसेप्टिव सिस्टम’ को बेअसर कर दिया गया था.

हालांकि, बीजिंग कथित तौर पर इस बात से भी परेशान है कि उसका करीबी सहयोगी पाकिस्तान भारत के साथ संघर्ष विराम के लिए वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क कर रहा है तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त करने का श्रेय ले रहे हैं.

पाकिस्तानी मीडिया का यह भी अनुमान है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भी इसी समय के आसपास ‘त्रिपक्षीय’ वार्ता के लिए बीजिंग का दौरा करेंगे. हालांकि, इस पर अभी तक चीन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

पाकिस्तान शिकायत करता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बीएलए द्वारा किया जा रहा है. टीटीपी को पाकिस्तानी तालिबान के नाम से भी जाना जाता है. बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए)बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रही है.

डार की यात्रा से पहले चीन में पाकिस्तान के राजदूत खलील हाशमी ने हांगकांग के ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ को बताया कि पाकिस्तानी लोगों और पाकिस्तान के अंदर चीनी नागरिकों के लिए आतंकवादी खतरे की वजह टीटीपी और बीएलए हैं. हाशमी ने कहा कि इन दोनों संगठनों का वित्तपोषण बाहरी तत्व कर रहे हैं और वे ही इनको समर्थन और आश्रय दे रहे हैं.

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