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Home»Blog»पाक जब तक सीमा पार आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी: भारत
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पाक जब तक सीमा पार आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी: भारत

atulpradhanBy atulpradhanMay 23, 2025No Comments6 Mins Read
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पाक जब तक सीमा पार आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी: भारत
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नयी दिल्ली/बीकानेर. भारत ने बृहस्पतिवार को एक बार फिर जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के साथ कोई भी द्विपक्षीय वार्ता तभी होगी जब वह अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र पर से कब्जा छोड़ देगा.” कश्मीर मुद्दे को सुलझाने में भारत और पाकिस्तान की मदद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रुचि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “आप हमारी स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच कोई भी बातचीत द्विपक्षीय होनी चाहिए.”

जायसवाल ने कहा, “मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा कि संवाद और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते.” उन्होंने कहा, “जहां तक आतकंवाद की बात है तो उन आतंकवादियों को भारत को सौंपा जाना चाहिए, जिनकी सूची कुछ साल पहले पाकिस्तान को दी गई थी.” जायसवाल ने कहा, “जम्मू-कश्मीर पर कोई भी द्विपक्षीय चर्चा तभी होगी जब पाकिस्तान अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली कर देगा.” सिंधु जल संधि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता. उन्होंने कहा, “यह संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से त्याग नहीं देता. हमारे प्रधानमंत्री ने कहा है, ‘पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते’.”

चीन के साथ संबंध के लिए आपसी सम्मान, संवेदनशीलता, हित का त्रिस्तरीय फार्मूला अहम: भारत

भारत ने बृहस्पतिवार को चीन को याद दिलाया कि ‘पारस्परिक’ विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता दोनों देशों के संबंधों का आधार हैं. भारत की ओर से यह टिप्पणी पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय सशस्त्र बलों के साथ चार दिनों तक चले टकराव के दौरान कई चीनी हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल करने की पृष्ठभूमि में आई है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने 10 मई को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बात की और उन्हें पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ. रुख से अवगत कराया.
जायसवाल से जब यह पूछा गया कि क्या पाकिस्तान को चीन के सैन्य समर्थन से बीजिंग के साथ नयी दिल्ली के संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, तो उन्होंने संबंधों के लिए ”पारस्परिक विश्वास, पारस्परिक सम्मान और पारस्परिक संवेदनशीलता” के महत्व को रेखांकित किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में संवाददाताओं के सवालों का उत्तर दे रहे थे.

जायसवाल ने कहा, ”हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 10 मई को एक-दूसरे से बात की थी, जिसमें एनएसए ने पाकिस्तान से जारी सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ. रुख से अवगत कराया था.” उन्होंने कहा, ”चीनी पक्ष इस बात से अवगत है कि आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता भारत-चीन संबंधों का आधार बने हुए हैं.” भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सैन्य संघर्षों के बाद, भारतीय सेना ने तस्वीरें जारी कीं, जिनमें पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए पीएल-15 मिसाइलों सहित चीनी हथियारों के इस्तेमाल को भी दिखाया गया.

पाकिस्तान, चीन का ”घनिष्ठ मित्र” रहा है तथा झड़पों के दौरान पाकिस्तानी सेना ने चीनी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों का इस्तेमाल किया था. पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ चीनी हथियारों का इस्तेमाल ऐसे समय में किया गया है जब भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में उत्पन्न गतिरोध के बाद अपने संबंधों को सामान्य बनाने पर विचार कर रहे हैं. भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध वाले अन्य बिंदुओं से सैनिकों को पीछे हटाने के बाद अपने संबंधों को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं.

गतिरोध के अंतिम दो बिंदुओं डेमचोक और देपसांग से सैनिकों को पीछे हटाने पर समझौता पिछले साल 21 अक्टूबर को हुआ था.
पाकिस्तान को तुर्किये द्वारा सैन्य सहयोग करने के एक सवाल पर जायसवाल ने कहा, ”हम उम्मीद करते हैं कि तुर्किये पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन बंद करने तथा दशकों से उसके द्वारा पोषित आतंकी तंत्र के खिलाफ विश्वसनीय और सत्यापन योग्य कार्रवाई करने का पुरजोर आग्रह करेगा.” उन्होंने कहा, ”संबंध एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर निर्मित होते हैं.”

भारत के हक का पानी नहीं मिलेगा पाकिस्तान को: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि पाकिस्तान को भारत के हक का पानी नहीं मिलेगा और अगर वह आतंकियों को ‘एक्सपोर्ट’ करना जारी रखता है तो उसको पाई-पाई के लिए मोहताज होना होगा. भारत कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) तब तक “स्थगित” रहेगी जब तक पड़ोसी देश सीमा पार आतंकवाद को “विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से” समर्थन देना बंद नहीं कर देता.

पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक उपायों की घोषणा की जिनमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना भी शामिल है. मोदी ने देशनोक के पलाना में सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते कहा कि भारतीयों के खून से खेलना पाकिस्तान को बहुत महंगा पड़ेगा. उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान ने आतंकियों को ‘एक्सपोर्ट’ करना जारी रखा, तो उसको पाई-पाई के लिए मोहताज होना होगा. पाकिस्तान को भारत के हक का पानी नहीं मिलेगा, भारतीयों के खून से खेलना, पाकिस्तान को अब महंगा पड़ेगा.” मोदी ने कहा, “ये भारत का संकल्प है, और दुनिया की कोई ताकत हमें इस संकल्प से डिगा नहीं सकती है.” विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में भारत और पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि की थी. यह समझौता दोनों देशों को सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल के उपयोग के तौर तरीकों का प्रावधान करता है. भारत ने सिंधु जल संधि स्थगित करने के लिए आधिकारिक अधिसूचना 24 अप्रैल को जारी की.

भारत की जल संसाधन सचिव देबाश्री मुखर्जी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष सैयद अली मुर्तजा को लिखे पत्र में कहा कि जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाकर पाकिस्तान द्वारा जारी सीमा पार आतंकवाद सिंधु जल संधि के तहत भारत के अधिकारों में बाधा डालता है.
मुखर्जी ने पत्र में कहा, ”किसी संधि का सद्भावपूर्वक सम्मान करने का दायित्व संधि का मूल होता है. हालांकि, इसके बजाय हमने देखा है कि पाकिस्तान भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाकर सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है.”

पत्र में कहा गया है, ” उत्पन्न सुरक्षा अनिश्चितताओं ने संधि के तहत भारत के अधिकारों के पूर्ण उपयोग में प्रत्यक्ष रूप से बाधा उत्पन्न की है.” पाकिस्तान को भेजे गए पत्र में ”काफी हद तक जनसांख्यिकी में बदलाव, स्वच्छ ऊर्जा के विकास में तेजी लाने की आवश्यकता और अन्य बदलावों” को भी संधि के दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता वाले कारणों के रूप में रेखांकित किया गया. इसमें पाकिस्तान पर अनुच्छेद 12(3) के तहत आवश्यक संशोधनों पर बातचीत करने से इनकार करके संधि का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया गया.

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