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Home»Business»भारतीय अर्थव्यवस्था का जापान को पीछे छोड़ना आत्मसंतुष्टि का कारण नहीं: डब्ल्यूईएफ पूर्व एमडी
Business

भारतीय अर्थव्यवस्था का जापान को पीछे छोड़ना आत्मसंतुष्टि का कारण नहीं: डब्ल्यूईएफ पूर्व एमडी

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniJune 8, 2025No Comments2 Mins Read
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भारतीय अर्थव्यवस्था का जापान को पीछे छोड़ना आत्मसंतुष्टि का कारण नहीं: डब्ल्यूईएफ पूर्व एमडी
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नयी दिल्ली. विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) क्लॉड स्मदजा ने कहा कि भारत, जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है, लेकिन उसे आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में देश जापान से बहुत पीछे है. अप्रैल, 2025 के आईएमएफ आंकड़ों के अनुसार भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,878.4 डॉलर है जो जापान की प्रति व्यक्ति जीडीपी 33,955.7 डॉलर का लगभग 8.5 प्रतिशत है. इसका अर्थ है कि जापान की प्रति व्यक्ति आय भारत की तुलना में लगभग 11.8 गुना अधिक है.

स्मदजा ने पीटीआई-भाषा से विशेष बातचीत में कहा, “यह (अर्थव्यवस्था का आकार) एक अच्छा संकेतक है क्योंकि यह वैश्विक संतुलन पर देश के आर्थिक भार का एक विचार देता है.” उन्होंने कहा, “नहीं, यह एक अच्छा संकेतक नहीं है क्योंकि जो मायने रखता है वह प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) है. प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के मामले में, भारत जापान से बहुत नीचे है. इसलिए भारत ने वैश्विक आर्थिक संतुलन में यह चौथा स्थान हासिल किया है या नहीं… यह प्रगति का एक अच्छा संकेतक है, लेकिन यह किसी भी तरह से आत्मसंतुष्टि का कोई कारण नहीं है.”

इसके विपरीत, स्मदजा ने तर्क दिया कि भारत की नई आर्थिक स्थिति को सुधारों में तेजी लाने के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वृद्धि सभी नागरिकों के लिए उच्च जीवन स्तर में परिर्वितत हो, न कि केवल शहरी और ग्रामीण केंद्रों में उभरते मध्यम वर्ग के लिए.

उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी दौड़ में एक निर्णायक चौराहे पर खड़ा है, जिसके पास बड़े डेटा में ‘अद्वितीय श्रेष्ठता’ है. यह एक ऐसी परिसंपत्ति है जिसे देश को संरक्षित करना चाहिए और वैश्विक प्रौद्योगिकी और नवाचार के शीर्ष स्तर पर इसे आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक रूप से इसका लाभ उठाना चाहिए. उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि चीन, यूरोप और अमेरिका के साथ-साथ भारत दुनिया में सबसे अधिक डेटा उत्पन्न करने वाले देशों में से एक है.

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