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Home»International»ईरानी ठिकानों पर हमले के बाद भी इजराइल ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अस्पष्टता बरकरार रखी
International

ईरानी ठिकानों पर हमले के बाद भी इजराइल ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अस्पष्टता बरकरार रखी

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniJune 23, 2025No Comments3 Mins Read
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ईरानी ठिकानों पर हमले के बाद भी इजराइल ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अस्पष्टता बरकरार रखी
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तेल अवीव. इजराइल का कहना है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने के प्रति दृढ़ है, क्योंकि गुप्त रूप से परमाणु हथियार तैयार करने में जुटा उसका कट्टर दुश्मन उसके अस्तित्व के लिए खतरा है. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि दशकों से इजराइल को पश्चिम एशिया का एकमात्र ऐसा देश माना जाता रहा है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं, भले ही उसके नेताओं ने इन हथियारों की मौजूदगी की पुष्टि या खंडन करने से इनकार कर दिया हो.

विशेषज्ञों का कहना है कि इजराइल की अस्पष्टता ने उसे ईरान और अन्य दुश्मनों के खिलाफ अपनी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सक्षम बनाया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इजराइल ने यह क्षमता क्षेत्रीय स्तर पर परमाणु हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दिए बिना या एहतियाती हमलों (संभावित हमले से बचने के लिए किये गए हमले) को आमंत्रित किए बगैर हासिल की है. इजराइल उन पांच देशों में से एक है, जो वैश्विक परमाणु अप्रसार संधि का हिस्सा नहीं हैं. इससे उसे निरस्त्रीकरण करने या यहां तक कि निरीक्षकों को उसके देश में मौजूद परमाणु केंद्रों की जांच करने की अनुमति देने से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दबाव से राहत मिलती है.

ईरान और अन्य जगहों पर आलोचकों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नजर रखने के लिए पश्चिमी देशों पर पाखंड का आरोप लगाया है, जबकि इजराइल के संदिग्ध शस्त्रागार को खुली छूट दी जा रही है. इजराइल ने 1958 में देश के पहले नेता प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियन के नेतृत्व में सुदूर रेगिस्तानी शहर डिमोना में अपना नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र खोला. उनका मानना ??था कि पड़ोस में शत्रु देशों से घिरे छोटे से नवोदित देश को सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय के रूप में परमाणु निरोध की आवश्यकता है. कुछ इतिहासकारों का कहना है कि इनका इस्तेमाल केवल आपातकालीन स्थिति में, अंतिम उपाय के रूप में किया जाना था.

एक अकादमिक पत्रिका ‘बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ में 2022 में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, इस परमाणु केंद्र के खुलने के बाद इजराइल ने डिमोना में काम को एक दशक तक छिपाए रखा और अमेरिका के अधिकारियों से कहा कि यह एक कपड़ा कारखाना है. ‘फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स’ के परमाणु सूचना परियोजना के निदेशक हैंस एम. क्रिस्टेंसन और इसी संगठन के शोधकर्ता मैट कोर्डा द्वारा सह-लिखित इस लेख के अनुसार, डिमोना में उत्पादित प्लूटोनियम पर निर्भर रहते हुए इजराइल के पास 1970 के दशक के प्रारंभ से ही परमाणु हथियार दागने की क्षमता है.

वर्ष 1986 में इजराइल की अस्पष्टता की नीति को बड़ा झटका लगा, जब परमाणु केंद्र पर मौजूद एक पूर्व तकनीशियन मोर्दकै वानुनू ने डिमोना की गतिविधियों को उजागर किया. उसने लंदन के ‘द संडे टाइम्स’ को रिएक्टर की तस्वीरें और विवरण उपलब्ध कराए.
वानुनू को देशद्रोह के आरोप में 18 साल जेल में रखा गया और उसे विदेशियों से मिलने या देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इजराइल के पास 80 से 200 परमाणु हथियार हैं.

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