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Home»International»शुभांशु शुक्ला आईएसएस के लिए रवाना, 41 साल बाद भारत की मानव अंतरिक्ष यात्रा
International

शुभांशु शुक्ला आईएसएस के लिए रवाना, 41 साल बाद भारत की मानव अंतरिक्ष यात्रा

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniJune 25, 2025No Comments7 Mins Read
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शुभांशु शुक्ला आईएसएस के लिए रवाना, 41 साल बाद भारत की मानव अंतरिक्ष यात्रा
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नयी दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित वाणिज्यिक मिशन के तहत बुधवार को तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा के लिए रवाना होकर इतिहास रच दिया. रूसी अंतरिक्ष यान के जरिये भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा के 41 साल बाद किसी भारतीय की यह यात्रा हो रही है.
कई विलंबों के बाद, अरबपति कारोबारी एलोन मस्क के स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट ने दोपहर 12 बजकर एक मिनट पर एक्सिओम मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के लेकर फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से आईएसएस के लिए उड़ान भरी.

भारतीय वायुसेना में ग्रुप कैप्टन शुक्ला, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की अंतरिक्ष यात्री पूर्व मिशन कमांडर पैगी व्हिटसन, हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कपू एवं पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की एक्सिओम-4 मिशन का हिस्सा हैं. भारत, पोलैंड, हंगरी और अमेरिका में उड़ान का सीधा प्रसारण देखने के लिए आयोजित कार्यक्रमों में एकत्रित परिवार के सदस्य, अनेक शुभचिंतक और अंतरिक्ष प्रेमी उस समय खुशी से झूम उठे, जब रॉकेट फ्लोरिडा के आकाश में उसी स्थान से उड़ा, जहां से जुलाई 1969 में अपोलो-11 मिशन के तहत अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने उड़ान भरी थी. नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर कदम रखने वाले प्रथम व्यक्ति थे.

ड्रैगन अंतरिक्षयान के धरती से ऊपर 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर कक्षा में प्रवेश करने के तुरंत बाद शुक्ला ने कहा, ”कमाल की राइड (यात्रा) थी.” करीब 28 घंटे की यात्रा के बाद यान के बृहस्पतिवार शाम साढ.े चार बजे आईएसएस पहुंचने की संभावना है. क्रू कैप्सूल के अंदर से कैमरों द्वारा प्रसारित फुटेज में चारों अंतरिक्ष यात्रियों को उनके केबिन में एक-दूसरे के बगल में बैठे हुए देखा गया, तथा वे हेलमेट पहने हुए सफेद और काले रंग के फ्लाइट सूट पहने हुए थे.

लखनऊ में जन्मे 39 वर्षीय शुक्ला अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं. इससे 41 साल पहले भारत के राकेश शर्मा 1984 में तत्कालीन सोवियत संघ के सैल्यूट-7 अंतरिक्ष स्टेशन के तहत कक्षा में आठ दिन रहे थे. शुक्ला ने कहा, ”हम 7.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं… यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की मेरी यात्रा की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत है और मेरी इच्छा है कि सभी देशवासी इस यात्रा का हिस्सा बनें.” जैसे ही एक्सिओम-4 मिशन के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में पहुंचे, हर तरफ से बधाईयां आने लगीं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह और क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर समेत कई हस्तियों ने अंतरिक्ष मिशन की सराहना की.

मुर्मू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में भारत के लिए एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है. पूरा देश एक भारतीय की अंतरिक्ष यात्रा को लेकर उत्साहित और गौरवान्वित है.” मोदी ने पोस्ट में कहा, ‘ग्रुप कैप्टन शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय बनने की राह पर हैं. वह अपने साथ 1.4 अरब भारतीयों की शुभेच्छाएं, उम्मीदें और आकांक्षाएं लेकर गए हैं.” मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर शुक्ला को उनके अंतरिक्ष मिशन में सफलता की शुभकामनाएं दी गईं.

अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने एक वीडियो संदेश में कहा, ”भारत से आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं. चालक दल के लिए- जितना संभव हो सके खिड़की से बाहर देखते हुए समय बिताएं. मजे करो दोस्तों.” अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में 14 दिन बिताएंगे और अपने मिशन के दौरान 60 प्रयोग करेंगे. अमेरिका स्थित स्टार्टअप एक्सिओम स्पेस के वाणिज्यिक मिशन से मानव शरीरक्रिया विज्ञान, पोषण और अंतरिक्ष में बीज अंकुरण जैसे क्षेत्रों में सूक्ष्मगुरुत्व अनुसंधान में योगदान मिलने की उम्मीद है.

वैज्ञानिक प्रयोगों के अलावा अंतरिक्ष यात्री अपने देश से जुड़ा पसंदीदा खाद्य पदार्थ भी ले जा रहे हैं, जैसे कि आम के रस के साथ भारतीय करी और चावल; हंगरी का मसालेदार पेपरिका पेस्ट और पोलैंड का फ्रीज-फ्राइड ‘पिरोगी’. कक्षा में पहुंचने के बाद, अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने नए कैप्सूल का नाम ग्रेस रखा. स्पेसएक्स ने चालक दल से कहा, ”अच्छी चीजें उन लोगों को मिलती हैं जो इंतज.ार करते हैं. ग्रेस के पहले चालक दल को शुभकामनाएं.” उड़ान से पहले शुक्ला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ”वह अपने देश की एक पूरी पीढ.ी की जिज्ञासा को जगा पाएंगे और नवाचार को बढ.ावा दे पाएंगे”.

उन्होंने कहा, ”मैं वास्तव में मानता हूं कि भले ही मैं एक व्यक्ति के रूप में अंतरिक्ष की यात्रा कर रहा हूं, लेकिन यह 140 करोड़ लोगों (भारतीयों) की यात्रा है.” आईएसएस में प्रवास के दौरान शुक्ला के कई संपर्क कार्यक्रमों में भाग लेने की संभावना है और उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत की भी उम्मीद है. लखनऊ में शुक्ला के विद्यालय सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में उनके रवाना होने का सीधा प्रसारण देख रहे लोगों के लिये यह एक यादगार दिन था और इस दौरान यहां मौजूद लोग ‘हिप हिप हुर्रे’ कह रहे थे और उन्होंने भांगड़ा नृत्य भी किया.

शुभांशु के पिता शंभू शुक्ला ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ह्लयह न केवल हमारे लिए बल्कि हमारे देश के लिए भी एक महान क्षण है. हम इस समय क्या कह सकते हैं, मेरे पास अब शब्द नहीं हैं. मेरा आशीर्वाद हमेशा मेरे बेटे के साथ है.ह्व शुभांशु की बहन शुचि शुक्ला ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ह्लमेरे माता-पिता ने आज प्रार्थना के साथ दिन की शुरुआत की. हमने सुबह शुभांशु से भी बात की. वह आश्वस्त, शांत और खुश था कि जिस पल के लिए उसने इतने लंबे समय से तैयारी की थी, वह आखिरकार आ गया. वह कुछ घबराया हुआ जरूर था लेकिन उसने यह जाहिर नहीं किया. वह ऐसा ही है.ह्व एक्सिओम-4 मिशन की सराहना करते हुए भारतीय वायुसेना ने कहा कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा पर निकले हैं, जो देश के गौरव को पृथ्वी से बाहर ले जाएगी.
वायुसेना ने कहा कि यह भारत के निरंतर विस्तृत होती क्षमताओं की पुष्टि करता है.

वायुसेना ने कहा, ह्लआसमान को जीतने से लेकर सितारों को छूने तक – भारतीय वायुसेना के वायु योद्धा की अदम्य भावना से प्रेरित एक यात्रा. ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन पर रवाना हुए, जो देश के गौरव को धरती से बाहर ले जाएगी.ह्व इसमें लखनऊ में जन्मे शुक्ला की एक प्रोफाइल फोटो भी साझा की गई है, जिसके साथ शीर्षक लिखा है, ”नीले रंग में प्रशिक्षित, सितारों की ओर अग्रसर” और साथ में एक संदेश है, जिसमें लिखा है, “इस शानदार मिशन में आपकी सफलता की कामना करता हैं.” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस उपलब्धि पर अपने विचार साझा किए और ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”भारत सहित चार देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाला अंतरिक्ष मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा.”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी ‘एक्स’ पर शुक्ला को ”सफल मिशन” की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने लिखा, “अंतरिक्ष यात्री शुक्ला भारत के अनुसंधान एवं विकास तथा शैक्षणिक संस्थानों के लिए सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोग भी करेंगे. उन्हें सफल मिशन की शुभकामनाएं.” बुधवार का प्रक्षेपण कई विलंबों के बाद हुआ, क्योंकि स्पेसएक्स, एक्सिओम और नासा ने गड़बड़ियों को ठीक करने और जैविक परीक्षण के नमूने भरने में काफी मशक्कत की, जबकि चारों अंतरिक्ष यात्री लगभग एक महीने तक पृथक-वास में रहे. फाल्कन 9 स्पेसएक्स द्वारा विकसित आंशिक रूप से पुन: इस्तेमाल, दो-चरण वाला रॉकेट है. फाल्कन 9 का पहला चरण पृथ्वी पर वापस लौटने और पुन: उपयोग के लिए डिज.ाइन किया गया है.

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