बेंगलुरु/नयी दिल्ली. दिग्गज दक्षिण भारतीय अभिनेत्री बी. सरोजा देवी का यहां सोमवार को निधन हो गया. फिल्म जगह के सूत्रों ने यह जानकारी दी. वह 87 वर्ष की थीं. सूत्रों के अनुसार, बेंगलुरु के मल्लेश्वरम स्थित आवास पर उम्र संबंधी बीमारियों के कारण उनका निधन हो गया. तमिल में उन्हें प्यार से ‘कन्नड़तु पैंगिली’ (कन्नड़ का तोता) कहा जाता था.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री, नेताओं ने सरोजा देवी को ‘अभिनय सरस्वती’ के रूप में याद किया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने दिग्गज दक्षिण भारतीय अभिनेत्री बी. सरोजा देवी के निधन पर शोक जताया और उन्हें ‘अभिनय सरस्वती’ के रूप में याद किया. सरोजा देवी को इसी नाम से संबोधित किया जाता था. उन्होंने तमिल, तेलुगु और हिंदी की 200 से अधिक फिल्मों में काम किया है. सिद्धरमैया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए अपने शोक संदेश में कहा कि उनका जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है.
उन्होंने कहा, ”जानी मानी कन्नड़ अभिनेत्री बी. सरोजा देवी के निधन की खबर बेहद दुखदायी है. उन्होंने तमिल, तेलुगु, हिंदी और कन्नड़ भाषाओं की 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और उन्हें ‘अभिनय सरस्वती’ के नाम से जाना जाता था.” उन्होंने कहा, ”जब हम सरोजा देवी के बारे में सोचते हैं तो कित्तूर चेन्नम्मा, बब्रुवाहन, अन्ना थांगी जैसी फिल्मों में उनके भावपूर्ण अभिनय हमारे जेहन में आते हैं. उन्होंने दशकों तक फिल्म प्रेमियों का मनोरंजन किया.” उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने भी ‘एक्स’ पर कहा, ”अभिनय सरस्वती को भावपूर्ण विदाई.” उन्होंने कहा, ”अभिनय सरस्वती के नाम से मशहूर वरिष्ठ कन्नड़ अभिनेत्री बी. सरोजा देवी के निधन की खबर दुखद है. उन्होंने पांच भाषाओं में अभिनय किया और छह दशकों तक फिल्म जगत की सेवा की.” विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन न केवल कन्नड़ बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है.
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि सरोजा देवी को भारतीय फिल्म उद्योग की महानतम अभिनेत्रियों में से एक माना जाता था. बोम्मई ने कहा, ”उन्होंने कई पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों में अभिनय किया था और वह कन्नड़ लोगों के बीच एक जाना-पहचाना नाम थीं. कित्तूर चेन्नम्मा का उनका किरदार आज भी सभी को याद है.” उन्होंने कहा कि उनकी उपलब्धियों को देखते हुए पद्मश्री और पद्मभूषण पुरस्कार के लिए उनके नाम की सिफारिश की गई थी.
रजनीकांत, कमल हासन और अन्य ने अभिनेत्री बी सरोजा देवी के निधन पर शोक जताया
सुपरस्टार रजनीकांत, कमल हासन, खुशबू सुंदर और अन्य ने सोमवार को सिनेमा जगत की दिग्गज अभिनेत्री बी सरोजा देवी के निधन पर शोक व्यक्त किया तथा उन्हें एक ऐसी महान कलाकार के रूप में याद किया जिन्होंने ‘भाषा और क्षेत्र’ की सीमाओं से परे जीवन जिया.
रजनीकांत ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”लाखों प्रशंसकों का दिल जीतने वालीं महान अभिनेत्री सरोजा देवी अब हमारे बीच नहीं रहीं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे. ” हासन ने ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट लिखा और दिवंगत अभिनेत्री के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि वह उनके लिए ‘दूसरी मां’ जैसी थीं.
उन्होंने लिखा, ”जब भी उन्होंने मुझे देखा – मेरी किसी भी उम्र में -वह मेरे गालों पर उंगलियां रखते हुए मुझे ‘प्यारा बेटा’ कहकर पुकारती थीं .वह मेरे लिए एक और मां थीं, सरोजा देवी अम्मा.” हासन ने देवी के बारे में कहा, ”वह एक कलाकार थीं जो भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से परे रहती थीं. उनका निधन हो गया है. मेरी दूसरी फिल्म ‘पार्थल पासी थीरुम’ की शूटिंग के पलों से लेकर अनगिनत अविस्मरणीय यादें मेरे दिल में उमड़ रही हैं. (उन्हें यादकर) मेरी आंखें भर आती हैं. एक मां का दिल जो हमेशा मुझे सबसे आगे देखना चाहता था. मैं उन्हें नमन करता हूं और विदाई देता हूं.” एस ए चंद्रशेखर की 1997 की तमिल फिल्म ‘वन्स मोर’ में देवी के साथ काम करने वाली सिमरन बग्गा ने कहा कि भारतीय सिनेमा में देवी की विरासत अमर रहेगी.
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ”मशहूर अभिनेत्री सरोजा देवी अम्मा अब नहीं रहीं, लेकिन भारतीय सिनेमा में उनकी विरासत अमर रहेगी. मुझे ‘वन्स मोर’ में उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला, यह गर्व का क्षण था जो आज और भी अनमोल लग रहा है. उनके प्रति मेरी गहरी श्रद्धांजलि है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. ” अभिनेत्री-राजनेता खुशबू सुंदर ने कहा कि अभिनेत्री के निधन से एक युग का अंत हो गया.
उन्होंने लिखा,”सरोजा देवी अम्मा सर्वकालिक रूप से महान थीं. .. उनके साथ मेरा बहुत अच्छा तालमेल था. उनसे मिले बिना मेरी बेंगलुरु यात्रा अधूरी (रहती) थी. और जब भी चेन्नई आती थीं, वह मुझसे मिलती थीं. उनकी बहुत याद आएगी. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.” अभिनेता किच्चा सुदीप ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर दिवंगत अभिनेत्री की एक तस्वीर साझा की. उन्होंने लिखा, ”पारिजात के फूल की तरह, उन्होंने अपनी सुगंध के साथ पूरा जीवन जिया और अब हमसे विदा हो गईं. कला की देवी को विनम्र प्रणाम.” दक्षिण भारत की कई और फिल्मी हस्तियों ने देवी के निधन पर शोक प्रकट किया एवं उन्हें श्रद्धांजलि दी.
सुंदरता और दमदार अभिनय के दम पर नायकों की पसंदीदा रहीं सरोजा देवी
महज 17 साल की उम्र में बी सरोजा देवी ने जब कन्नड़ फिल्म ‘महाकवि कालिदास’ (1955) से अपने अभिनय के सफर की शुरुआत की, तो पर्दे पर उनकी आकर्षक उपस्थिति ने तुरंत लोगों के दिलों में जगह बना ली. वह न केवल कन्नड़, बल्कि तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा में भी मशूहर हुईं.
सरोजा देवी सफलता ऐसी थी कि फिल्म ‘महाकवि कालिदास’ में उनके सह-कलाकार रहे अभिनेता-फिल्म निर्माता होन्नप्पा भगवतार ने अपनी उपलब्धियों में इस बात को भी शामिल किया है कि उन्होंने ”सरोजा देवी को सिनेमा में पदार्पण कराया”. अभिनेता एवं फिल्मकार होन्नप्पा भगवतार को कन्नड़ सिनेमा के प्रारंभिक स्तंभों में गिना जाता है. बेंगलुरु में जन्मी सरोजा देवी को अंतत? कन्नड़ सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार का खिताब दिया गया.
तमिल फिल्मों के दिग्गज और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन उर्फ एमजीआर ने सरोजा देवी के साथ 48 फिल्मों में अभिनय किया हुआ है. वह उन्हें भाग्यशाली मानते थे. फिल्मों में सरोजा देवी और एमजीआर की जोड़ी को लोगों को बहुत पसंद किया है. उनकी कुछ फिल्मों जैसे कि ‘अनबे वा’ (1966) को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि मिली. उनकी पहली फिल्म ‘नादोडी मन्नान’ (1958) ने सरोजा देवी को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया.
सरोजा देवी ने दक्षिण भारत की लगभग सभी भाषाओं के साथ-साथ हिंदी फिल्मों में भी काम किया – उन्हें ‘चतुर्भाषा तारे’ की उपाधि भी मिली – लेकिन तमिल सिनेमा में उनका सितारा सबसे अधिक दमकता रहा. तमिल भाषा की फिल्मों में उन्होंने बी. आर. पंथुलु की फिल्म ‘थंगमलाई रागसियाम’ (1957) में एक नृत्यांगना के रूप में शुरुआत की. वह तमिल फिल्म जगत में ‘कन्नड़थु पैंगिली’ (कन्नड़ का तोता) के रूप में पहचाने जाने लगीं.
फिल्म ‘नादोदी मन्नान’ से तमिलनाडु में रातोंरात ख्याति पाने वाली सरोजा देवी ने हिंदी सिनेमा में अभिनय की शुरुआत की, जहां उन्होंने मुख्य भूमिका नहीं निभाई थी. दिलीप कुमार और वैजयंतीमाला अभिनीत फिल्म ‘पैगाम’ (1959) को लोगों ने बहुत पसंद किया और सरोजा देवी ने इसमें ‘छोटी भूमिका’ निभाई थी, इसके बावजूद उन्होंने लोगों और निर्देशकों के दिलों में अपनी जगह बना ली.
उन्होंने राजेंद्र कुमार के साथ फिल्म ‘ससुराल’ (1961), सुनील दत्त के साथ बेटी बेटे (1964) और शम्मी कपूर के साथ ‘प्यार किया तो डरना क्या’ (1963) जैसी फिल्मों में काम किया.
सरोजा देवी अभिनीत सभी फिल्मों में मुख्य अभिनेता के साथ जबरदस्त तालमेल के कारण वह नायकों की पसंदीदा बन गईं. उन्होंने सिर्फ एमजीआर के साथ ही नहीं बल्कि उस समय के अन्य प्रमुख अभिनेताओं के साथ भी काम किया. चाहे वे किसी भी भाषा के हों, जिसमें शिवाजी गणेशन, जेमिनी गणेशन, डॉ. राजकुमार और एन.टी. रामा राव (एनटीआर) शामिल थे. भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने सरोजा देवी को न केवल पद्मश्री (1969) और पद्म भूषण (1992) से सम्मानित किया बल्कि 2008 में भारत के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ भी प्रदान किया.
उन्होंने कई राज्य पुरस्कार भी जीते, जिनमें 2009 में तमिलनाडु सरकार द्वारा दिया गया प्रतिष्ठित कलैमामणि लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी शामिल है. सरोजा देवी ने तमिल टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार में बताया था कि किस तरह सभी पीढि.यों के सितारों ने हमेशा उन पर प्यार बरसाया है और उन्होंने उनके साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखा, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो.
अभिनेत्री खुशबू ने सरोजा देवी के निधन पर दुख जताया और बताया कि उन दोनों के अच्छे संबंध थे. उन्होंने कहा, ”उनसे मिले बिना मेरी बेंगलुरु की यात्रा अधूरी रहती थी. और जब भी चेन्नई में होती, वो फोन करती थीं. उनकी बहुत याद आएगी. अम्मा, आपकी आत्मा को शांति मिले.”

