मुंबई. महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में संभाजी ब्रिगेड के राज्य प्रमुख प्रवीण गायकवाड़ पर हमले का मुद्दा सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा में उठा और कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने पलटवार करते हुए कहा कि आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्होंने मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया.
वडेट्टीवार ने दावा किया कि यह संभाजी ब्रिगेड के नेता पर एक “कातिलाना हमला” था और पूछा कि रविवार को जिस कार्यक्रम में यह घटना हुई, वहां पुलिस क्यों तैनात नहीं थी? पुलिस के अनुसार, रविवार को सोलापुर जिले के अक्कलकोट गांव में गायकवाड़ के साथ कथित तौर पर एक संगठन के कार्यकर्ताओं ने धक्कामुक्की की और उन पर स्याही फेंकी. वह श्री दत्तात्रेय का अवतार माने जाने वाले स्वामी समर्थ पर कथित तौर पर टिप्पणी करने के कारण चर्चा में आए थे.
एक वायरल वीडियो में दिख रहा है कि गायकवाड़ को कुछ लोगों ने उनकी कार से बाहर निकाला और उनके साथ धक्कामुक्की की.
बाद में पुलिस ने दीपक काटे और शिवधर्म फाउंडेशन के छह अन्य सदस्यों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत दंगा फैलाने का मामला दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया. वडेट्टीवार ने विधानसभा में मामला उठाते हुए कहा कि गायकवाड़ सकल मराठा समाज द्वारा आयोजित एक समारोह में शामिल होने गए थे, तभी उन पर हमला किया गया. कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें उनकी कार से बाहर खींचा गया, जमीन पर गिराया गया और उन पर काली स्याही फेंकी गई.
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया, ”यह एक जानलेवा हमला था.” कांग्रेस नेता ने दावा किया कि हमलावरों में से एक राजनीतिक दल से जुड़ा है और उसका आपराधिक इतिहास है, जिसमें अवैध हथियार रखने के आरोप और अपने रिश्ते के भाई की कथित हत्या के लिए जेल की सजा काटना भी शामिल है.
उन्होंने पूछा, ”कार्यक्रम में पुलिस की कोई तैनाती क्यों नहीं थी? खुफिया एजेंसियों को पहले से सूचना क्यों नहीं थी?” वडेट्टीवार ने यह भी जानना चाहा कि गायकवाड़ जैसे कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने वालों पर क्या कानून लागू नहीं होता. मुख्यमंत्री फडणवीस ने कांग्रेस नेता की चिंताओं का जवाब देते हुए सदन को बताया कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी.
संभाजी ब्रिगेड के नेता पर हमले से भाजपा का कोई संबंध नहीं: मंत्री बावनकुले
महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को कहा कि स्वामी समर्थ पर टिप्पणी को लेकर संभाजी ब्रिगेड के संस्थापक सदस्य प्रवीण गायकवाड पर हुए हमले से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई लेना-देना नहीं है. वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न करने के लिए सरकार पर निशाना साधा.
भाजपा द्वारा काटे का समर्थन करने के दावों के बारे में पूछे जाने पर, बावनकुले ने कहा, ”गायकवाड पर हुए हमले से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है. इस तरह की हरकतें करना हमारे खून में नहीं है.” बावनकुले ने संवाददाताओं से कहा, ”काटे को प्रवीण गायकवाड के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था और भाजपा उनके इस कृत्य को स्वीकार नहीं करती. एक आरोपी हमेशा आरोपी ही रहता है, चाहे उसकी पार्टी कोई भी हो.” गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा, ”सरकार किसी को नहीं बचाएगी.” भाजपा के विधान परिषद सदस्य परिणय फुके ने दावा किया कि विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और शिवसेना (उबाठा) नेता सुषमा अंधारे द्वारा उनकी पार्टी की आलोचना करना उसके प्रति उनके पूर्वाग्रह को दर्शाता है.
फुके ने कहा, ”उनकी हमेशा से यही सोच रही है कि समाज में हो रही किसी भी घटना के पीछे भाजपा है. ऐसे घटनाओं को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन मैं हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करता हूं.” राकांपा (एसपी) विधायक रोहित पवार ने दावा किया कि दीपक काटे को पहले भी उनके भाई द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद जेल जाना पड़ा था. उन्होंने विधान भवन में संवाददाताओं को बताया कि काटे को सात साल की जेल हुई थी और उस पर एक उड़ान में बंदूक और कारतूस ले जाने के भी आरोप लगे थे.
रोहित पवार ने यह भी कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि गायकवाड पर हमले के दौरान काटे के पास बंदूक थी, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि यह हत्या का प्रयास हो सकता है. उन्होंने बताया कि नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे जैसे नेताओं की भी पहले हत्या हो चुकी है. विधायक ने दावा किया कि राज्य सरकार गायकवाड पर हमले को रोकने में नाकाम रही.
उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि महाराष्ट्र विशेष जन सुरक्षा विधेयक, 2024 के विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के बाद, कुछ चरम दक्षिणपंथी तत्वों को अलग दृष्टिकोण रखने वालों पर हमला करने का साहस मिला होगा.” सत्तारूढ़ राकांपा के विधान परिषद सदस्य अमोल मिटकरी ने कहा कि महाराष्ट्र में प्रगतिशील सोच की परंपरा रही है और काटे जैसे लोगों द्वारा की गई ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए.
मिटकरी ने कहा, ”उनके कृत्य को माफ नहीं किया जा सकता, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों. उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे.” मिटकरी ने प्रदर्शनकारियों द्वारा संभाजी ब्रिगेड का नाम बदलकर ‘छत्रपति संभाजी महाराज ब्रिगेड’ करने की मांग के पीछे के तर्क पर भी सवाल उठाया.
उन्होंने कहा, ”बजरंग दल के बारे में क्या? इसे श्री बजरंग दल क्यों नहीं कहा जाता? काटे के अपने समूह का नाम ‘शिव धर्म’ है, जिसमें भी केवल पहला नाम ही इस्तेमाल होता है. क्या इस पर आपत्ति होनी चाहिए?” मिटकरी ने पूछा कि जब कुछ महीने पहले (पूर्व पत्रकार) प्रशांत कोरटकर ने छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था, तब दीपक काटे ने कोई कदम क्यों नहीं उठाया? उन्होंने पूछा, ”उनका चेहरा क्यों नहीं काला किया गया?” राकांपा नेता ने कहा कि उन्होंने संभाजी ब्रिगेड, मराठा सेवा संघ और प्रवीण गायकवाड के साथ काम किया है, और इस तरह की हरकतें महाराष्ट्र के मूल्यों को नहीं दर्शातीं.

