पटना. पटना स्थित एक निजी अस्पताल में हथियारबंद कुछ लोगों ने पैरोल पर जेल से बाहर आए हत्या के दोषी को बृहस्पतिवार को गोली मार दी जिससे उसकी मौत हो गई. पुलिस ने यह जानकारी दी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मृतक की पहचान बक्सर जिले के निवासी चंदन के रूप में हुई है और वह इलाज के लिए अस्पताल गया था.
घटना का कथित सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है. इसमें दिखाई दे रहा है कि पांच हथियारबंद लोग अस्पताल के आईसीयू में घुस रहे हैं और व्यक्ति पर गोलियां चला रहे हैं. ‘पीटीआई-भाषा’ स्वतंत्र रूप से वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकी.
पटना (मध्य) की पुलिस अधीक्षक दीक्षा ने कहा, ”हम अस्पताल अधिकारियों से प्राप्त सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं और हत्यारों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं.” उन्होंने बताया कि हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया चंदन बेउर जेल में कैदी था और पैरोल पर इलाज के लिए अस्पताल गया था.
दीक्षा ने बताया, ”पुलिस को सूचना मिली कि बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े सात बजे पटना के एक निजी अस्पताल में कुछ हथियारबंद लोगों ने एक व्यक्ति को गोली मार दी. घटना उस समय हुई जब वह अस्पताल में इलाज के लिए आया था. वह पैरोल पर जेल से बाहर आया था.” अधिकारी ने बताया कि व्यक्ति को अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया.
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच की जा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है.
उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया यह पुरानी रंजिश का मामला प्रतीत होता है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया, ”सरकारी अपराधियों ने अस्पताल में भर्ती मरीज को आईसीयू में घुसकर मारी गोली. बिहार में कोई भी कहीं भी सुरक्षित नहीं? 2005 से पहले ऐसे होता था जी?” पूर्णिया से निर्दलीय लोकसभा सदस्य राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी आरोप लगाया कि इस गोलीबारी ने नीतीश कुमार सरकार की पोल खोल दी है.
उन्होंने दावा किया, ”राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है. मैं राज्यपाल से मिलकर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग करूंगा. अपराधियों को उनकी जाति के आधार पर मारा जा रहा है.” यादव अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां तैनात सुरक्षार्किमयों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एक अलग घटना में, बृहस्पतिवार सुबह पटना के शाहपुर इलाके में कुछ लोगों ने एक व्यक्ति की उसके घर के बाहर धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी. उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान शुभम उर्फ बंटी के रूप में हुई है.
अधिकारी ने कहा, ”पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और पाया कि उस व्यक्ति की घर के बाहर कुछ अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी. शुभम पर धारदार हथियारों से हमला किया गया.” पटना नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) भानु प्रताप सिंह ने संवाददाताओं को बताया, ”शुभम के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और जांच जारी है.” उन्होंने बताया कि हत्या के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है और मामला दर्ज कर लिया गया है.
बिहार के शीर्ष पुलिस अधिकारी ने अपराध बढ़ने को कृषि श्रमिकों की बेरोजगारी से जोड़ा; विवाद छिड़ा
बिहार के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने राज्य में अपराध की घटनाओं में हालिया वृद्धि के लिए कृषि श्रमिकों में मौसमी बेरोजगारी को जिम्मेदार ठहराया है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) कुंदन कृष्णन ने बुधवार शाम पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ”बिहार में फसल के केवल दो प्रमुख मौसम होते हैं. चूंकि अप्रैल और जून के बीच फसल का मौसम नहीं होता, इसलिए ज्यादातर कृषि श्रमिक इस दौरान बेरोजगार रहते हैं. नतीजतन, भूमि से जुड़ी झड़पें बढ़ जाती हैं. उनमें से कुछ, खासकर युवा, जल्दी पैसे कमाने के लिए सुपारी लेकर हत्याएं भी करते हैं.” उन्होंने कहा कि हत्या के मामले मुख्य रूप से मई और जुलाई के बीच बढ़ते हैं.
उनकी इस टिप्पणी से सोशल मीडिया पर रोष फैल गया और कई लोगों ने अधिकारी पर कानून व्यवस्था बरकरार रखने में नाकाम रहने का बहाना बनाने का आरोप लगाया. कृष्णन ने बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा संपर्क किए जाने पर कहा, ”मैंने जो कुछ भी कहा है, वह आंकड़ों पर आधारित है. आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष की इस अवधि (मई और जुलाई के बीच) में हिंसा की घटनाओं में वृद्धि देखी जाती है.” आंकड़ों के अनुसार, बिहार में अप्रैल में 217 और मई में 284 हत्या के मामले दर्ज किये गए.
वर्ष 2024 में, अप्रैल में 231, मई में 254, जून में 292 और जुलाई में 279 हत्याएं हुईं. अगस्त में यह संख्या घटकर 249 रह गई.
कृष्णन ने कहा, ”वर्ष 2023 में अप्रैल में 215, मई में 279, जून में 278 और जुलाई में हत्या के 270 मामले दर्ज किये गए. अगस्त में यह संख्या घटकर 250 हो गई.” उन्होंने कहा, ”वर्ष 2022 में, राज्य में अप्रैल में 256, मई में 301, जून में 297 और जुलाई में 262 हत्याएं हुईं. अगस्त में यह घटकर 257 हो गई.” इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ”यह बिहार पुलिस की अक्षमता को दर्शाता है. वे कहते हैं कि मानसून से पहले अपराध बढ़ जाते हैं. राज्य में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गई है. जबकि वे (राजग) अपने प्रशासन को डबल इंजन वाली सरकार कहते हैं. मैं कहना चाहूंगा कि इसमें एक इंजन भ्रष्टाचार का और दूसरा अपराध का है.”

