नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को संसद में कहा कि भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमलों की घटनाओं की निरंतर निगरानी और रिकॉर्ड रखता है, जिनमें व्यक्तियों, उनके घरों, व्यवसायों और पूजा स्थलों पर हमले शामिल हैं. विदेश राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी.
उन्होंने कहा, ”भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमलों की घटनाओं की निरंतर निगरानी और रिकॉर्ड रखती है, जिनमें व्यक्तियों, उनके घरों, व्यवसायों और पूजा स्थलों पर हमले शामिल हैं.” सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने सभी संगत अवसरों पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा बांग्लादेश के प्राधिकारियों के समक्ष, उच्चतम स्तर पर भी, लगातार उठाया है. उन्होंने कहा, ”भारत सरकार की यह अपेक्षा है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इन घटनाओं की गहन जांच करेगी और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हत्या, आगजनी और हिंसा के सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में लाएगी.” उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों सहित बांग्लादेश के सभी नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी बांग्लादेश सरकार की है.
सिंह ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि तथाकथित ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ (सीपीईसी) पर सरकार का रुख स्पष्ट और सुसंगत है. उन्होंने कहा, ”सीपीईसी जो ‘ओबीओआर/बीआरआई’ की एक प्रमुख परियोजना के रूप में शामिल है और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले, भारत के केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के कुछ भागों से होकर गुजरता है, पर संबंधित पक्षों के समक्ष लगातार विरोध जताया है और उनसे इन गतिविधियों को बंद करने का अनुरोध किया है.”
सिंह ने कहा कि किसी भी तीसरे देश की प्रस्तावित सहभागिता या तथाकथित सीपीईसी परियोजनाओं का तीसरे देशों तक विस्तार अस्वीकार्य है तथा सरकार ने संबंधित पक्षों को लगातार इस रुख से अवगत कराया है. उन्होंने कहा कि सरकार भारत की सुरक्षा को प्रभावित डालने वाले सभी घटनाक्रमों पर लगातार नज.र रखती है और इसकी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करती है.
ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों के हमले का जवाब देने के लिए शुरू किया गया था : सरकार
सरकार ने बृहस्पतिवार को संसद में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा किए गए बर्बर आतंकी हमले का जवाब देने के लिए शुरू किया गया था और उसका मकसद आतंकवादी अवसंरचना को ध्वस्त करना और भारत भेजे जाने वाले संभावित आतंकवादियों का सफाया करना था. विदेश राज्य मंत्री कीर्तवर्धन सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी.
उनसे सवाल किया गया था कि क्या यह सच है कि ऑपरेशन सिंदूर की घोषणा अंतरराष्ट्रीय दबाव में की गई थी? इसके जवाब में सिंह ने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा किए गए एक बर्बर सीमा पार आतंकी हमले का जवाब देने के लिए शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य आतंकवादी अवसंरचना को ध्वस्त करना और भारत भेजे जाने वाले संभावित आतंकवादियों को निष्प्रभावी करना था.” उन्होंने कहा, ”भारत की कार्रवाई केंद्रित, नपी-तुली और गैर-उकसाने वाली थी. तथापि, पाकिस्तान ने कुछ सैन्य सुविधाओं के अलावा, भारत के नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने का प्रयास किया. पाकिस्तान की इन उकसावे वाली और विवाद को बढ.ाने वाली कार्रवाइयों का भारतीय सशस्त्र बलों ने कड़ा और निर्णायक जवाब दिया, जिससे पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ.”
सिंह ने कहा कि उसके बाद 10 मई 2025 को पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक ने अपने भारतीय समकक्ष से गोलीबारी और सैन्य गतिविधियां बंद करने का अनुरोध किया, जिस पर उसी दिन सहमति बन गयी. ऑपरेशन सिंदूर के तहत, भारत ने सात मई को तड़के सटीक हमलों में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी शिविरों को ध्वस्त कर दिया था. भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था.

