नयी दिल्ली. यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में केरल के एक मौलवी द्वारा किए जा रहे दावे गलत हैं. सरकारी सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले पर किसी भी तरह की अटकलबाजी से बचना चाहिए.
भारत के ‘ग्रैंड मुफ्ती’ कंठपुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने सोमवार को दावा किया कि प्रिया की मौत की सजा पलट दी गई है. सूत्रों ने कहा कि उन्होंने प्रिया के मामले से संबंधित दावे वाली रिपोर्टें देखी हैं और ये दावे गलत हैं. एक सूत्र ने कहा, ”हम लोगों से इस संवेदनशील मामले पर गलत सूचना और अटकलों से बचने का आग्रह करते हैं.” यह स्पष्टीकरण ग्रैंड मुफ्ती द्वारा कथित तौर पर यह कहे जाने के बाद आया कि प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय प्रिया मामले में उनके प्रयासों से अवगत हैं.
भारतीय नागरिक प्रिया (38) की फांसी 16 जुलाई को होनी थी, लेकिन भारतीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद इसे स्थगित कर दिया गया. वह वर्तमान में यमन की राजधानी सना की एक जेल में बंद है जो ईरान सर्मिथत हूतियों के नियंत्रण में है. केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोडे की रहने वाली नर्स को जुलाई 2017 में एक यमनी नागरिक की हत्या का दोषी पाया गया है. यमन की अदालत ने 2020 में उसे मौत की सजा सुनाई और देश की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने नवंबर 2023 में उनकी अपील खारिज कर दी.
विदेश मंत्रालय ने 17 जुलाई को कहा कि वह प्रिया से संबंधित मामले में ”पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान” तक पहुंचने के प्रयासों के तहत यमन के अधिकारियों के साथ कुछ मित्र देशों के संपर्क में है. बताया जा रहा है कि यमन में भारत की कोई राजनयिक मौजूदगी नहीं है और सऊदी अरब स्थित भारतीय मिशन के राजनयिक इस मामले की जांच कर रहे हैं.

