नयी दिल्ली. राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने बुधवार को कहा कि भारत के पास पाकिस्तान को तबाह करने के लिए पर्याप्त युद्धक संसाधन नहीं हैं जबकि पड़ोसी देश को चीन से उन्नत तकनीक और विमान जैसी मदद मिल रही है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राज्यसभा में विशेष चर्चा के दौरान सिब्बल ने गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना की कि आठ अप्रैल को केंद्र शासित प्रदेश में आयोजित सुरक्षा समीक्षा बैठक में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को आमंत्रित नहीं किया गया. उसके एक पखवाड़े बाद, पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें 26 नागरिक मारे गए.
सिब्बल ने कहा कि केंद्र को लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी स्थानीय नेता से बातचीत करने पर ज.मीनी हकीकत की बेहतर समझ होती. उन्होंने पूछा, “अगर अब्दुल्ला को बैठक में नहीं बुलाया गया तो आपको जानकारी कैसे मिलेगी?” भारत की सैन्य सीमाओं को रेखांकित करते हुए सिब्बल ने कहा, “हमारे पास इतने संसाधन नहीं हैं कि हम पाकिस्तान को तबाह कर सकें. हम सिर्फ पाकिस्तान से नहीं लड़ रहे हैं. पाकिस्तान और चीन एक साथ हैं. चीन पाकिस्तान को सारी तकनीक दे रहा है.” निर्दलीय सदस्य सिब्बल ने कहा कि पाकिस्तान के पास उन्नत विमान हैं, जबकि भारत का राफेल आधी क्षमता वाला विमान है. उन्होंने कहा पाकिस्तान के पास 25 स्क्वाड्रन हैं, जो भारत की संख्या के लगभग बराबर हैं.
सिब्बल ने कहा कि भारतीय वायु सेना के पास 31 स्क्वाड्रन है जो काफी कम संख्या है. यहां तक कि वायुसेना प्रमुख ने भी लड़ाकू विमानों के उत्पादन में वृद्धि की वकालत की है. उन्होंने कहा, ”मिग-21 और मिग-29 को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, मिराज 2000 को हटाया जा रहा है. आपके पास केवल सुखोई-30एमकेआई ही रहेगा.” सिब्बल ने सरकार के रक्षा रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर आपको देश की रक्षा की चिंता है, तो आपने पिछले 11 साल में क्या किया है? आपको इसका जवाब देना होगा.” उन्होंने 1984 में परिकल्पित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम की भी आलोचना की और कहा कि कंपनी अभी भी विमान का प्रभावी ढंग से निर्माण नहीं कर पा रही है.
चर्चा में शामिल होते हुए माकपा नेता जॉन ब्रिटास ने कहा कि युद्ध कोई समाधान नहीं है और उन्होंने सरकार को किसी भी विवाद के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक समाधान अपनाने का सुझाव दिया. उन्होंने लोकसभा में अपने 1.40 घंटे के जवाब के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम न लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा, “मैं 1.42 घंटे तक मोदी का जवाब ध्यान से सुन रहा था. उन्होंने ट्रंप के बारे में एक शब्द नहीं कहा.” तृणमूल कांग्रेस नेता सुष्मिता देब ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार की विदेश नीति पर सवाल किया. वहीं कांग्रेस सदस्य रेणुका चौधरी ने मोदी की आलोचना करते हुए कहा, “उनके पास पीड़ितों के परिवारों से मिलने का समय नहीं था. वह न तो उनसे मिलेंगे और न ही संसद आएंगे.” राकांपा (एसपी) सदस्य फौजिया खान ने सरकार से इस बात की गारंटी मांगी कि भविष्य में ऐसे आतंकी हमले नहीं होंगे. चर्चा में सतनाम सिंह संधू, कविता पाटीदार (भाजपा) सहित अन्य सदस्यों ने भी भाग लिया.

