बेंगलुरु. कर्नाटक मंत्रिमंडल से के. एन. राजन्ना को हटाए जाने पर मंगलवार को विधानसभा में हंगामा हुआ और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनकी बर्खास्तगी के लिए ‘कारण बताने’ की मांग की. हालांकि, सरकार ने किसी भी चर्चा से परहेज किया और राजन्ना को मंत्रिपरिषद से हटाने की अधिसूचना पेश कर दी.
पार्टी सूत्रों ने बताया कि सहकारिता मंत्री रहे राजन्ना को कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर सोमवार को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया.
ऐसा लगता है कि 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के “वोट चोरी” के आरोपों पर राजन्ना की हालिया टिप्पणियों के कारण उन्हें मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा है.
प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद विधानसभा में राजन्ना की बर्खास्तगी संबंधी अधिसूचना पेश करते हुए विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने कहा कि यदि कोई मंत्री मंत्रिपरिषद छोड़ता है तो वह अध्यक्ष की अनुमति से बयान दे सकता है, लेकिन नियम पुस्तिका के अनुसार, इसके अलावा किसी चर्चा या स्पष्टीकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती. इस बिंदु पर, विपक्ष के उपनेता अरविंद बेलाड और भाजपा के वरिष्ठ विधायक सुरेश कुमार ने मांग की कि कानून मंत्री नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर बयान दें.
हालांकि, पाटिल ने कहा कि इससे पहले भी जब मंत्रियों को सरकार से हटाया गया था, तो विधानसभा में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई थी.
उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए, जब जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था, तो क्या उस पर चर्चा हुई थी?” भाजपा सदस्यों ने जवाब दिया कि इस्तीफा देने और बर्खास्त होने में फर्क है.
बेलाड ने पूछा, ”राजन्ना की क्या गलती थी, राज्य के लोगों को पता होना चाहिए….क्या उन्हें सच बोलने के कारण हटाया गया?” मंत्री प्रियांक खरगे ने पलटवार करते हुए भाजपा से पूछा कि विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल को पार्टी से क्यों निकाला गया. इससे पहले, जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो भाजपा ने मांग की कि राजन्ना को मंत्रिमंडल से हटाए जाने पर मुख्यमंत्री बयान दें.
इस पर विधानसभा अध्यक्ष यू टी खादर ने कहा कि मुख्यमंत्री सदन में आकर जानकारी दे सकते हैं और यह (सरकार या सत्तारूढ़ पार्टी का) आंतरिक मामला है.

