चिशोती. जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में दूरदराज के गांव चिशोती में बादल फटने की घटना के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है तथा लापता लोगों की तलाश के लिए शुरू किया गया अभियान रविवार को चौथे दिन भी जारी रहा. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. राहतर्किमयों को उम्मीद है कि आज वे एक बड़े प्रभावित इलाके को साफ कर देंगे.
इस बीच, सेना के इंजीनियरों ने गांव और मचैल माता मंदिर के बीच संपर्क बहाल करने तथा बचाव कार्यों को और तेज करने के लिए एक ‘बेली ब्रिज’ के निर्माण पर काम शुरू कर दिया है. अधिकारियों ने रविवार को बताया कि मलबे से एक और शव बरामद होने के साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है. मचैल माता मंदिर जाने वाले रास्ते में अंतिम गांव चिशोती में 14 अगस्त को बादल फटने से 61 लोगों की मौत हो गई और 100 अन्य घायल हो गए जबकि 50 लोगों के लापता होने की आशंका है.
विभिन्न स्थानों, खासकर सबसे ज्यादा प्रभावित लंगर स्थल के आसपास, विशालकाय पत्थर भी बिखरे पड़े थे और तलाश अभियान में बाधा बन रहे कुछ पत्थरों को शनिवार शाम बचावर्किमयों ने नियंत्रित विस्फोट के जरिए हटा दिया. अधिकारियों ने बताया कि पुलिस, सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), नागरिक प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवकों की संयुक्त टीमें बचाव कार्य जारी रखे हुए हैं.
अब तक 50 शवों की पहचान हो चुकी है और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है.
सेना की आतंकवाद रोधी ‘डेल्टा फोर्स’ के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल ए.पी.एस. बल ने कहा कि पुल की जरूरत महसूस होने के बाद सेना के अभियंताओं ने इलाके का सर्वेक्षण किया है.
अधिकारी ने कहा, ”नदी पार करने के खातिर सुचारू आवाजाही के लिए हमें 17 मीटर लंबे एक पुल के निर्माण की जरूरत है.” उन्होंने बताया कि पुल का निर्माण रविवार शाम तक पूरा हो जाएगा. इस बीच, कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा और जम्मू-कश्मीर भाजपा के पूर्व प्रमुख रविंदर रैना सहित विभिन्न दलों के राजनीतिक नेताओं ने रविवार को चिशोती का दौरा किया.
कर्रा ने इस त्रासदी को ”राष्ट्रीय आपदा” घोषित करने तथा पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि यह घटना कुछ सवाल भी खड़े करती है, जिनका जवाब मिलना जरूरी है. कांग्रेस नेता ने पूछा, ”किश्तवाड़ और मचैल को जोड़ने वाली सड़क को उसके महत्व को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग क्यों नहीं घोषित किया गया, जबकि एक दशक से भी पहले संबंधित अधिकारियों को एक परियोजना रिपोर्ट सौंपी जा चुकी थी? दूसरा, प्रतिकूल मौसम की चेतावनी के बावजूद यात्रा क्यों नहीं रोकी गई?”

