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Home»Country»‘विधेयकों की विधायी क्षमता राज्यपाल नहीं जांच सकते’, सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार की दलील
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‘विधेयकों की विधायी क्षमता राज्यपाल नहीं जांच सकते’, सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार की दलील

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniSeptember 3, 2025No Comments2 Mins Read
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‘विधेयकों की विधायी क्षमता राज्यपाल नहीं जांच सकते’, सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार की दलील
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए समय-सीमा तय करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई जारी रही। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विधेयकों की विधायी क्षमता की जांच राज्यपाल नहीं कर सकते। बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ये भी कहा कि ‘आजादी के बाद से शायद ही कोई ऐसा उदाहरण हो जहां राष्ट्रपति ने संसद द्वारा पारित किसी विधेयक को जनता की इच्छा के कारण रोका हो।’

बंगाल सरकार ने दी ये दलील

राष्ट्रपति संदर्भ पर सुनवाई के सातवें दिन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि ‘किसी विधेयक की विधायी क्षमता का परीक्षण अदालतों में किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘किसी कानून को नागरिक या कोई अन्य व्यक्ति अदालत में चुनौती दे सकता है। राज्यपाल यह कहें कि मैं विधेयकों को मंजूरी नहीं दे सकता और इसे रोके रखता हूं, तो ये अत्यंत दुर्लभ और विरलतम मामला है।’ पीठ में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई के अलावा जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर भी शामिल हैं।

बंगाल सरकार ने दी ये दलील

राष्ट्रपति संदर्भ पर सुनवाई के सातवें दिन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि ‘किसी विधेयक की विधायी क्षमता का परीक्षण अदालतों में किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘किसी कानून को नागरिक या कोई अन्य व्यक्ति अदालत में चुनौती दे सकता है। राज्यपाल यह कहें कि मैं विधेयकों को मंजूरी नहीं दे सकता और इसे रोके रखता हूं, तो ये अत्यंत दुर्लभ और विरलतम मामला है।’ पीठ में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई के अलावा जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर भी शामिल हैं।

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