पूर्णिया. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने रविवार को दावा किया कि गरीबों को हर महीने पांच किलोग्राम राशन और मोबाइल फोन ‘बैंगन के भाव’ मिलने का श्रेय उनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान को जाता है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह बात बिहार के पूर्णिय जिले में पार्टी द्वारा आयोजित ‘नव संकल्प सभा’ में कही.
हाजीपुर से सांसद चिराग ने कहा, ”मुझे इस बात का गर्व है कि मैं ऐसे नेता की संतान हूं, जिन्होंने विभिन्न केंद्रीय मंत्रालय में रहते हुए बिहार और उसके लोगों के लिए हर संभव कार्य किया. मुझे इस पर भी गर्व है कि उनकी दूरदृष्टि का ही परिणाम है कि आज देश के 81 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न मिल रहा है.” पासवान ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ का उल्लेख कर रहे थे, जिसकी शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में हुई थी. उस समय उनके दिवंगत पिता उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री थे.
उन्होंने अपने पिता के पहले के कार्यकाल की भी चर्चा की, जब वह दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री थे. चिराग ने कहा, ”आज मुझे गर्व होता है कि हर नौजवान के हाथ में मोबाइल है. यह भी मेरे पिता, मेरे आदर्श की ही देन है, जिन्होंने सपना देखा था कि मोबाइल ‘बैंगन के भाव’ में उपलब्ध हो.” राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता ने लोगों से आगामी विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन को ”धर्म और जाति के आधार पर बंटे बिना” वोट देने की अपील की.
उन्होंने कहा, ”देश में अगर कोई वास्तविक विभाजन है तो वह अमीर और गरीब के बीच है. यह खाई लगातार चौड़ी और गहरी होती जा रही है. मेरी पार्टी का नारा ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ इसी खाई को पाटने के लिए है.” चिराग ने राज्य में ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व कर रही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्षी दल ”एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को गर्व का तमगा मानकर चलती है, जिसमें जातिवाद और सांप्रदायिकता की बू आती है.”
उन्होंने कहा, ”हम उन्हें अपने एमवाई (महिला और युवा) समीकरण से पराजित करेंगे.” लोजपा (रामविलास) अध्यक्ष ने अपने भाषण की शुरुआत बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करके की. शास्त्री जीवन भर कांग्रेसी रहे और 1970 के दशक की शुरुआत में बिहार के पहले दलित मुख्यमंत्री बने. जनता पार्टी शासन के दौरान वे लोकसभा में विपक्ष के नेता भी रहे. उस समय दिवंगत रामविलास पासवान हाजीपुर से जनता पार्टी के सांसद थे.

