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Home»Country»प्रधानमंत्री जीएसटी व्यवस्था संशोधनों का ‘पूर्ण श्रेय’ लेने का दावा कर रहे हैं: रमेश
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प्रधानमंत्री जीएसटी व्यवस्था संशोधनों का ‘पूर्ण श्रेय’ लेने का दावा कर रहे हैं: रमेश

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniSeptember 21, 2025No Comments8 Mins Read
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प्रधानमंत्री जीएसटी व्यवस्था संशोधनों का ‘पूर्ण श्रेय’ लेने का दावा कर रहे हैं: रमेश
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नयी दिल्ली/कोलकाता. कांग्रेस ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर माल एवं सेवा कर (जीएसटीत्र व्यवस्था में किए गए संशोधनों का ”पूर्ण श्रेय” लेने का आरोप लगाया और कहा कि मौजूदा सुधार अपर्याप्त हैं, तथा राज्यों की मुआवजे की अवधि को और पांच साल के लिए बढ़ाने की मांग का कोई समाधान नहीं किया गया है.

विपक्षी दल ने सुधारों की आलोचना करते हुए कहा कि ये ”गहरे घाव देने के बाद मरहम लगाने जैसा है.” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सरकार को आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी लगाने के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए. जीएसटी दरों में कटौती लागू होने से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने की पुरजोर वकालत की. उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत की वृद्धि गाथा को गति देंगे, कारोबारी सुगमता को बढ़ाएंगे और अधिक निवेशकों को आर्किषत करेंगे.

मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि नवरात्रि के पहले दिन से ‘जीएसटी बचत उत्सव’ शुरू होगा और आयकर छूट के साथ यह ज्यादातर लोगों के लिए ”दोहरा लाभ” होगा. प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”नौ सौ चूहे खाकर, बिल्ली हज को चली! नरेन्द्र मोदी जी, आपकी सरकार ने कांग्रेस के सरल और कुशल जीएसटी के बजाय, अलग-अलग नौ स्लैब से वसूली कर ‘गब्बर सिंह टैक्स’ लगाया और आठ साल में 55 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वसूले.

उन्होंने कहा, ”अब आप 2.5 लाख करोड़ रुपये के ‘बचत उत्सव’ की बात करके जनता को गहरे घाव देने के बाद मामूली ‘बैंड ऐड’ लगाने की बात कर रहे हैं. जनता कभी नहीं भूलेगी कि आपने उनके दाल, चावल, अनाज, पेंसिल, किताब, इलाज, किसानों के ट्रैक्टर- सबसे जीएसटी वसूला था. आपकी सरकार को तो जनता से माफी मांगनी चाहिये.” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए ”संवैधानिक निकाय जीएसटी परिषद द्वारा जीएसटी व्यवस्था में किए गए संशोधनों का पूर्ण श्रेय लेने का दावा” किया है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से यह तर्क देती रही है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ”विकास को अवरुद्ध करने वाला एक कर” रहा है. रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”यह बड़ी संख्या में कर श्रेणियों वाली व्यवस्था, आम उपभोग की वस्तुओं पर ‘दंडात्मक’ कर दरों, बड़े पैमाने पर कर चोरी और गलत वर्गीकरण, महंगे अनुपालन बोझ और एक उलट शुल्क ढांचे (इनपुट की तुलना में आउटपुट पर कम कर) से ग्रस्त है.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”हम जुलाई 2017 से ही जीएसटी 2.0 की मांग कर रहे हैं. यह 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए हमारे न्याय पत्र में किया गया एक प्रमुख वादा था.” रमेश ने दावा किया कि मौजूदा जीएसटी सुधार अपर्याप्त हैं और इसमें कई लंबित मुद्दे हैं, जिनमें अर्थव्यवस्था में प्रमुख रोजगार सृजनकर्ता एमएसएमई की व्यापक चिंताएं भी शामिल हैं.

उन्होंने कहा, ”प्रमुख प्रक्रियागत परिवर्तनों के अलावा, इसमें अंतरराज्यीय आपूर्तियों पर लागू होने वाली सीमाओं को और बढ़ाना भी शामिल है.” रमेश ने दावा किया कि कपड़ा, पर्यटन, हस्तशिल्प और कृषि जैसे क्षेत्रों के मुद्दे भी हैं, जिनसे निपटना जरूरी है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्यों को राज्य-स्तरीय जीएसटी लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि बिजली, शराब, पेट्रोलियम और रियल एस्टेट को भी इसमें शामिल किया जा सके.

रमेश ने कहा, ”सहकारी संघवाद की सच्ची भावना से राज्यों की प्रमुख मांग यानी उनके राजस्व की पूरी तरह से रक्षा के लिए मुआवजे को पांच साल और बढ़ाने की मांग- अभी तक अनसुलझी है.” उन्होंने आश्चर्य जताया कि क्या ”आठ साल की देरी” से लागू किए गए जीएसटी बदलाव, वास्तव में उच्च जीडीपी वृद्धि के लिए आवश्यक निजी निवेश को बढ़ावा देंगे.

रमेश ने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों में चीन के साथ व्यापार घाटा दोगुना होकर 100 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है.
जीएसटी सुधारों के लागू होने से रसोई के सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक, दवाओं और उपकरणों से लेकर ऑटोमोबाइल तक, लगभग 375 वस्तुओं पर दरें सोमवार से घट जाएंगी. उपभोक्ताओं को एक बड़ा तोहफा देते हुए, केंद्र और राज्यों की जीएसटी परिषद ने 22 सितंबर, यानी नवरात्रि के पहले दिन से जीएसटी की दरें कम करने का फैसला किया था.

केंद्र जीएसटी दरें घटाने का अनुचित श्रेय ले रहा : ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को दावा किया कि केंद्र जीएसटी दरें कम करने का अनुचित श्रेय ले रहा है, जबकि यह पहल राज्य ने की थी. उनका यह बयान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में दिये उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सोमवार को नवरात्र के पहले दिन से ”जीएसटी बचत उत्सव” शुरू होगा, जो आयकर छूट के साथ मिलकर अधिकांश लोगों के लिए ”डबल बोनैंजा” होगा.

प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना बनर्जी ने कहा, ”हम 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व खो रहे हैं, हालांकि हम जीएसटी कम होने से खुश हैं. लेकिन आप (मोदी) इसका श्रेय क्यों ले रहे हैं? हमने जीएसटी की दरें घटाने की मांग की थी. केंद्रीय वित्त मंत्री (निर्मला सीतारमण) के साथ जीएसटी परिषद की बैठक में हमारा यही सुझाव था.”

क्या भारत-पाक युद्धविराम पर ट्रंप के दावों और एच1बी वीजा धारकों की चिंताओं पर बोलेंगे मोदी: कांग्रेस

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले रविवार को पूछा कि क्या वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान ‘युद्धविराम’ के दावों और एच1बी वीजा धारक लाखों भारतीयों की चिंताओं पर बात करेंगे या फिर नयी जीएसटी दरों के बारे में पहले से ज्ञात बातें दोहराएंगे. प्रधानमंत्री मोदी रविवार शाम पांच बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह जानकारी दी, लेकिन मोदी के संबोधन के विषय के बारे में कोई संकेत नहीं दिया.

प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन नवरात्र की पूर्व संध्या पर होगा. 22 सितंबर से संशोधित जीएसटी दरें लागू होंगी और कई उत्पादों की कीमतों में कमी आने वाली है. कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं वाशिंगटन डीसी में उनके अच्छे दोस्त ने एक बार फिर उनकी सुर्खियां छीन ली हैं और 42वीं बार दावा किया कि उन्होंने अमेरिका के साथ बढ.ते व्यापार का फायदा उठाकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोक दिया.” रमेश ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ये दावे न केवल अमेरिका में बल्कि सऊदी अरब, कतर और ब्रिटेन में भी किए हैं.

कांग्रेस नेता ने कहा, ह्लक्या प्रधानमंत्री इन दावों पर बात करेंगे और भारत-अमेरिका के लगातार बिगड़ते रिश्तों पर बोलेंगे? क्या वे लाखों भारतीय एच1बी वीजा धारकों की चिंताओं का समाधान करेंगे? क्या वह उन करोड़ों किसानों और मजदूरों को कोई भरोसा देंगे, जिनकी आजीविका उनके मित्र द्वारा लगाए गए टैरिफ की वजह से खतरे में है? या फिर वह नई जीएसटी दरों के बारे में वही दोहराएंगे, जो हम सभी जानते हैं-जिन्हें हताशा में तैयार किया गया था और जो कल से लागू हो रही हैं.ह्व अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एच1बी गैर-आप्रवासी वीजा वार्षिक शुल्क में भारी वृद्धि कर उसे 1,00,000 अमेरिकी डॉलर करने का आदेश दिया, जिसे कुशल भारतीय पेशेवरों पर भारी असर डालने वाले एक कदम के रूप में देखा जा रहा है. ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एच1बी वीजा के लिए 100,000 डॉलर का नया शुल्क केवल एक बार का भुगतान है, जो केवल नये आवेदनों पर लागू होगा और मौजूदा वीजा धारकों पर नहीं लागू होगा.

निकोबार परियोजना पर बुनियादी सवालों के जवाब देने में असमर्थ हैं पर्यावरण मंत्री: कांग्रेस नेता रमेश

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार बुनियादी ढांचा परियोजना का विरोध करने के लिए कांग्रेस की आलोचना करने पर पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पर पलटवार करते हुए रविवार को कहा कि आसन्न ”पारिस्थितिक और मानवीय आपदा” की ओर राष्ट्र का ध्यान आर्किषत करना ”नकारात्मक राजनीति” नहीं है, बल्कि गंभीर चिंता की अभिव्यक्ति है.

रमेश ने कहा कि मंत्री उन बुनियादी सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं, जिन्हें कांग्रेस इस परियोजना के संबंध में बार-बार उठा रही है.
रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा ” केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस पर ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पर ‘नकारात्मक राजनीति’ करने का आरोप लगाया है. आसन्न पारिस्थितिक और मानवीय आपदा की ओर राष्ट्र का ध्यान आर्किषत करना ‘नकारात्मक राजनीति’ नहीं है. यह गंभीर चिंता की अभिव्यक्ति है.” उन्होंने कहा कि मंत्री उन बुनियादी सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं, जो कांग्रेस बार-बार इस परियोजना के संबंध में उठा रही है.

उन्होंने पूछा कि क्या ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रा परियोजना, जिसके लिए लाखों पेड़ों को हटाने की आवश्यकता है, राष्ट्रीय वन नीति 1988 का उल्लंघन करती है जबकि इस नीति में कहा गया है कि ‘उष्णकटिबंधीय वर्षा/नम वनों, विशेष रूप से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के क्षेत्रों को पूरी तरह से संरक्षित किया जाना चाहिए?” कांग्रेस नेता ने कहा, ”पुराने वनों के लिए प्रतिपूरक वनरोपण हमेशा एक खराब विकल्प होता है वहीं इस परियोजना में वनरोपण की जो योजना है वह हास्यास्पद है. सुदूर हरियाणा में, जहां पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह से अलग है, वनरोपण को ग्रेट निकोबार के विशिष्ट पुराने वर्षावनों के नुकसान की वास्तविक भरपाई कैसे माना जा सकता है? हरियाणा सरकार ने इस भूमि को वनरोपण के लिए आरक्षित करने के बजाय, खनन के लिए पहले ही 25 प्रतिशत भूमि क्यों मुक्त कर दी है?”

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