खैरागढ़. छत्तीसगढ़ में एक बुजुर्ग महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें वह 25 साल पहले लगाये गए पीपल के पेड़ को अवैध रूप से काट दिए जाने पर रोती हुई नजर आ रही हैं. इस मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के एक अधिकारी ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ बताया कि खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के सर्रागोंडी गांव के बाहरी इलाके में सड़क के किनारे सरकारी जमीन पर लगे पेड़ को पांच अक्टूबर की रात को काटा गया.
वीडियो में करीब 90 वर्षीय महिला देवला बाई पटेल पेड़ के कटे हुए टुकड़े पर सिर रखकर रोती दिखायी दे रही हैं. वीडियो सोशल मीडिया पर कई लोगों ने साझा किया है. केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने हैशटैग ‘एक पेड़ मां के नाम’ के साथ वीडियो ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा, ”यह बहुत ही हृदय विदारक दृश्य है. एक बुजुर्ग महिला उस पीपल के पेड़ को काट दिए जाने पर फूट-फूट कर रो रही है जिसे उसने 20 साल पहले लगाया था. मुझे बताया गया है कि यह छत्तीसगढ़ राज्य में हुआ है.” पुलिस अधिकारी ने बताया कि ग्रामीण प्रमोद पटेल द्वारा छह अक्टूबर को दर्ज करायी गई शिकायत के आधार पर इमरान मेमन और प्रकाश कोसरे को इस कृत्य के लिए गिरफ्तार किया गया है.
अधिकारी ने बताया कि मेमन ने हाल ही में बगल की कृषि भूमि खरीदी थी और कथित तौर पर वह पेड़ हटाना चाहता था ताकि उसकी सड़क तक पहुंच हो सके. अधिकारी ने बताया कि उसने पांच अक्टूबर को कोसरे की मदद से पेड़ काटने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों के कड़े विरोध के कारण ऐसा नहीं कर सका. अधिकारी ने बताया कि इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर रात में पेड़ काट दिया.
अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने जिस कटर मशीन का इस्तेमाल किया था, उसे पास की नदी में फेंक दिया और उसे निकालने के लिए गोताखोरों को लगाया गया है.
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 298 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना) और 238 (अपराध के सबूतों को गायब करना, या अपराधी को छिपाने के लिए झूठी जानकारी देना) के अलावा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज किया गया है.
अधिकारी ने बताया कि दोनों आरोपियों को एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
स्थानीय निवासी राम अवतार साहू ने बताया कि देवला बाई ने लगभग 25 साल पहले यह पेड़ लगाया था. साहू ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया कि यह पेड़ स्थानीय समुदाय के लिए एक पवित्र स्थल बन गया था और पास में कुछ मंदिर भी बन गए थे. उन्होंने बताया कि पेड़ के नष्ट होने की खबर सुनकर देवला बाई तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं और रो पड़ीं. साहू ने बताया कि बाद में ग्रामीणों ने मौके पर ही एक अनुष्ठान किया और ईश्वर से क्षमा याचना की. साहू ने बताया कि देवला बाई के हाथों एक नया पीपल का पौधा लगाया गया.

