शिमला. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने सोमवार को केंद्र सरकार पर आपदा प्रभावित हिमाचल प्रदेश को पर्याप्त मदद नहीं देने का आरोप लगाया और दावा किया कि केंद्र, कांग्रेस शासित राज्यों की ”उपेक्षा” कर रहा है. प्रियंका ने यह टिप्पणी छह बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह की एक प्रतिमा का अनावरण किये जाने के बाद एक रैली को संबोधित करते हुए की. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान स्थित दौलत सिंह पार्क में वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया.
उन्होंने कहा, “सुखविंदर सुक्खू के मुख्यमंत्री बनने के बाद हिमाचल में भारी बारिश हुई, लेकिन केंद्र सरकार ने कई बार अनुरोध करने के बावजूद कांग्रेस शासित राज्य को पर्याप्त मदद नहीं दी.” प्रियंका ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार केवल चुनाव जीतने में रुचि रखती है और उसने कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश के साथ भेदभाव किया है. इस मानसून में जून से सितंबर तक राज्य में बादल फटने की 47, अचानक बाढ़ की 98 और बड़े भूस्खलन की 148 घटनाएं हुईं, जिनमें वर्षाजनित घटनाओं में 270 लोग मारे गए. कुल नुकसान 5,426 करोड़ रुपये आंका गया.
राज्य प्राधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में भी हिमाचल प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. दिवंगत नेता वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण के दौरान प्रियंका ने अपनी मां सोनिया गांधी के साथ मिलकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी. बाद में उन्होंने उनके जीवन और विरासत पर आधारित एक फोटो प्रदर्शनी भी देखी. छह फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा हिमाचल प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ वाई एस परमार, महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं की प्रतिमाओं के पास स्थापित की गई है.
बाद में रैली को संबोधित करते हुए प्रियंका ने कहा, “हमें महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और वीरभद्र सिंह जैसे नेताओं की जरूरत है, जो हमेशा ईमानदारी और सच्चाई के मार्ग पर चलते हुए लोगों के विकास के लिए सर्मिपत रहे.” प्रियंका ने कहा, ”दुर्भाग्यवश देश में इस रास्ते पर चलने वाले बहुत कम नेता हैं, लेकिन कांग्रेस के राहुल गांधी निडर होकर लोगों के मुद्दे उठा रहे हैं.” उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों के वास्ते काम करने के लिए “सोशल मीडिया और पीआर” से आगे जाने की जरूरत है.
कांग्रेस महासचिव ने वीरभद्र सिंह को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया, जिनका दिल हमेशा हिमाचल प्रदेश के कल्याण के लिए धड़कता रहा. उन्होंने राज्य के साथ अपने परिवार के जुड़ाव पर ज़ोर दिया, जो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर उनके अपने परिवार तक फैला हुआ है. प्रियंका ने कहा, “जब मैं पिछले चुनावों में प्रचार के लिए आई थी, तो लोगों ने मुझे वीरभद्र सिंह के लोगों से जुड़ाव और उनके सरल व्यवहार के बारे में बताया था, जैसा कि कांग्रेस नेताओं की परंपरा रही है और मुझे खुशी है कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है” उन्होंने कहा, “यह सच है कि हम इस भूमि, पहाड़ों और घाटियों से प्यार करते हैं.” उन्होंने सभी से पहाड़ियों को बचाने का आ”ान किया.
प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस “हमारे पूर्वजों के संजोए सपने” को पूरा करने का प्रयास करेगी, और इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र के विकास के लिए सही सोच और ईमानदार राजनीति जरूरी है. उन्होंने राज्य के लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं भी दीं.
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी वीरभद्र सिंह की प्रशंसा करते हुए उन्हें “सड़क, बिजली और विकास का नेता” बताया. सुक्खू ने कहा, “वह लोगों से इतने जुड़े हुए थे कि उन्होंने एक छात्र के लिए भी स्कूल खोल दिया.” उन्होंने राज्य के विकास में गांधी परिवार के सहयोग की भी सराहना की और आईआईटी मंडी, आईआईएम सिरमौर और एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना जैसी पहलों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी के आवास ने शिमला में पर्यटन को बढ़ावा दिया है.
उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने वीरभद्र सिंह के सम्मान में आयोजित रैली में शामिल होने के लिए सोनिया और प्रियंका गांधी का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह का राज्य के लोगों से भावनात्मक रिश्ता है. उन्होंने कहा, “लोग इस पल का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे.” अग्निहोत्री ने इंदिरा गांधी की भी सराहना की, जिन्होंने 1971 में प्रधानमंत्री के रूप में रिज मैदान से हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की घोषणा की थी.
वीरभद्र सिंह रामपुर-बुशहर राजघराने के वंशज थे. उन्होंने पहली बार आठ अप्रैल, 1983 को मुख्यमंत्री का पद संभाला. इसके बाद अगले चार दशकों तक वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे. उन्होंने पांच बार और मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया. लंबी बीमारी के कारण 2021 में उनका निधन हो गया. उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह पार्टी की राज्य इकाई की प्रमुख हैं और उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह हिमाचल प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री हैं. दोनों नेताओं ने लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस किया और इस अवसर पर उपस्थित होने के लिए उनका आभार व्यक्त किया.
प्रतिभा सिंह ने अनावरण को एक भावनात्मक और खुशी का अवसर बताया, जबकि विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यह अवसर केवल एक औपचारिक समारोह नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं और प्रेम को दर्शाता है तथा उन्होंने अपने पिता के आदर्शों पर चलने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. प्रतिमा अनावरण और उसके बाद रैली का आयोजन विक्रमादित्य सिंह ने किया, जो राजा वीरभद्र सिंह फाउंडेशन के अध्यक्ष भी हैं. पहले प्रतिमा का अनावरण वीरभद्र सिंह की जयंती पर 23 जून को होना था, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया.
इस प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी सुतार और उनके बेटे अनिल राम सुतार से संबद्ध एक कंपनी ने 40 लाख रुपये की लागत से किया, जिसमें 24 लाख रुपये निर्माण पर और 16 लाख रुपये इसे स्थापित करने पर खर्च हुए. राम सुतार वही मूर्तिकार हैं, जिन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 फुट ऊंची प्रतिमा बनाई है. गुजरात में स्थापित यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ है.
इस कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए. सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और लगभग 400 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. यातायात और पार्किंग के लिए विशेष योजना के साथ शहर को पांच सुरक्षा क्षेत्रों में विभाजित किया गया था. शहर के भीतर परिवहन, ‘यूटिलिटी’ वाहनों और भारी वाहनों की आवाजाही अपराह्न तीन बजे तक स्थगित कर दी गई थी. प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, सचिन पायलट और दीपेंद्र हुड्डा भी उपस्थित थे. राज्य में पार्टी की प्रभारी रजनी पाटिल और कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला भी प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में शामिल हुए.

