पटना/दिल्ली. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को लेकर उन पर निशाना साधा और दावा किया कि किशोर को पहले से पता था कि वह चुनाव नहीं जीत पाएंगे. सिंह ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में कहा, “प्रशांत किशोर का यह कहना कि अगर जन सुराज पार्टी को 150 से कम सीटें मिलती हैं तो यह हार मानी जाएगी, ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ जैसा है.”
गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया, “किशोर को समझ में आ गया कि वह चुनाव नहीं जीतेंगे, इसलिए उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी. उन्होंने जन सुराज पार्टी बनाने में जो निवेश किया था, वह वापस निकाल लिया है. उनकी पार्टी सिर्फ ‘वोट काटने वाली पार्टी’ है, जन सुराज वास्तव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ‘बी टीम’ है.” प्रशांत किशोर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा है कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने दावा किया कि यह फैसला पार्टी के बड़े हित में लिया गया है. किशोर का कहना था कि “150 से कम सीटें मिलना” उनकी पार्टी के लिए हार मानी जाएगी. गिरिराज सिंह ने दावा किया कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) 243 में से 225 सीटें जीतेगा.
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग सरकार ने बिहार के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत काम किया है. जनता ने सरकार का काम देखा है. इस बार राजग अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए कम से कम 225 सीटें जीतेगा.” गौरतलब है कि 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-जद (यू) गठबंधन ने 210 सीटें जीती थीं. सिंह ने महागठबंधन पर चुनाव से पहले “झूठे वादे” करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, “राजद ने हाल ही में घोषणा की है कि अगर महागठबंधन सत्ता में आया तो बिहार के हर ऐसे घर से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाएगी, जिसमें कोई सरकारी नौकरी वाला नहीं है. लेकिन राजद बताए कि इतने पद कहां से सृजित करेगा? यह जनता को गुमराह करने वाला वादा है. लोग अब जंगलराज की वापसी नहीं चाहते.” भाजपा नेता ने कहा कि राजद बिहार को “फिर से लालटेन युग में ले जाना चाहती है.” उन्होंने कहा, “वे ‘चरवाहा मॉडल’ की बात करते हैं. यह अब नहीं चलेगा. मोदी जी और नीतीश जी बिहार को विकसित राज्य बनाना चाहते हैं.” गौरतलब है कि 1990 के दशक की शुरुआत में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने ‘चरवाहा विद्यालय’ योजना शुरू की थी, जो पांच से 15 वर्ष की उम्र के उन गरीब बच्चों के लिए थी जो पशु चराया करते थे, लेकिन यह योजना बुरी तरह विफल रही.
प्रशांत किशोर पर भाजपा, राजद और जद(यू) का तंज: समझ गए कि परिस्थिति अनुकूल नहीं
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बुधवार को जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को लेकर उन पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने यह समझ लिया है कि ”हालात उनके पक्ष में नहीं हैं.” राजद ने कहा कि किशोर ने ”मैदान में उतरे बिना ही अपनी पार्टी की हार स्वीकार कर ली है”, जबकि भाजपा ने दावा किया कि ”किशोर को एहसास हो गया कि वह चुनाव नहीं जीत पाएंगे.” प्रशांत किशोर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा है कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने दावा किया कि यह फैसला पार्टी के बड़े हित में लिया गया है. किशोर का कहना था कि “150 से कम सीटें मिलना” उनकी पार्टी के लिए हार मानी जाएगी.
उनके बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद प्रवक्ता मृ्त्युंजय तिवारी ने दावा किया, ”किशोर को समझ आ गया है कि उन्हें और उनकी पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलनी पड़ेगी. इसी वजह से उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी है. उन्होंने जन सुराज पार्टी की हार मैदान में उतरे बिना ही स्वीकार कर ली है.” उन्होंने कहा, ”किशोर को यह समझना चाहिए कि राजनीति किसी पार्टी को परामर्श देने जितनी आसान नहीं होती. उनका टायर पंचर हो गया है.” भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, ”किशोर का गुब्बारा चुनाव से पहले ही फूट गया. चुनाव न लड़ने की घोषणा कर उन्होंने अपनी और अपनी पार्टी की हार स्वीकार कर ली है. उन्हें चुनाव में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ेगा.” जद(यू) की प्रदेश इकाई के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि किशोर का यह फैसला उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए ”अपमानजनक” है.
उन्होंने कहा, ”वह चुनावी मैदान में उतरने से पहले ही भाग गए. पहले तो वह कहते थे कि उन्होंने जनता की समस्याएं समझने के लिए पदयात्राएं की हैं. अब क्या हुआ? उनका यह फैसला उनके कार्यकर्ताओं के लिए गहरा झटका है.” भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, ”प्रशांत किशोर एक बहुत समझदार व्यापारी हैं और उन्हें चुनाव अभियान चलाने का काफी अनुभव भी है.” उन्होंने कहा, ”शायद एक व्यापारी और पूर्व चुनाव रणनीतिकार के रूप में उन्होंने यह समझ लिया है कि जमीनी हालात उनके या उनकी पार्टी के अनुकूल नहीं हैं और यदि वह यह चुनाव हार गए, तो भविष्य में उनके व्यवसाय को कोई नहीं पूछेगा.” पूनावाला ने कहा, ”शायद यही देखकर उन्होंने यह फैसला लिया है कि राजग एक बार फिर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने जा रहा है, इसलिए उन्होंने खुद को चुनावी दौड़ से बाहर कर लिया है.”

