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Home»International»परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग को ब­ढ़ावा देने को प्रतिबद्ध: भारत
International

परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग को ब­ढ़ावा देने को प्रतिबद्ध: भारत

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniOctober 30, 2025No Comments4 Mins Read
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परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग को ब­ढ़ावा देने को प्रतिबद्ध: भारत
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संयुक्त राष्ट्र. भारत ने कहा है कि वह परमाणु और रेडियोधर्मी सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए परमाणु प्रौद्योगिकी के विद्युत और गैर-विद्युत, दोनों क्षेत्रों में शांतिपूर्ण उपयोग के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है. सांसद डी. पुरंदेश्वरी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की रिपोर्ट पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में कहा, “भारत में एक मजबूत परमाणु सुरक्षा संस्कृति और एक त्रुटिहीन सुरक्षा रिकॉर्ड है.” पुरंदेश्वरी संयुक्त राष्ट्र में भारतीय सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं. 26-31 अक्टूबर तक यात्रा पर आए सांसदों के दूसरे दल ने संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया और साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा की छह समितियों की बैठकों में भी भाग लिया.

इस महीने की शुरुआत में, सांसदों के पहले प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र की यात्रा की थी और उसकी बैठकों और चर्चाओं में भाग लिया था. पुरंदेश्वरी ने कहा, ”उन्नत तकनीक वाली एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में, भारत परमाणु और रेडियोधर्मी सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, ऊर्जा और गैर-ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है.” उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत, सतत और दृश्यमान, वैश्विक परमाणु सुरक्षा एवं संरक्षा ढांचा प्रदान करने के आईएईए के प्रयासों में उसका समर्थन करना जारी रखेगा. उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली परमाणु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए सदस्य देशों को एजेंसी के निरंतर समर्थन की आशा करता है.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय विकास रणनीतियों के क्रियान्वयन और कोविड महामारी से उबरने में परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. उन्होंने कहा कि साथ ही 2030 एजेंडे का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और 2015 पेरिस समझौते के संदर्भ में जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है.

उन्होंने कहा कि तकनीकी सहयोग और परमाणु उपयोग के क्षेत्र में आईएईए की गतिविधियां ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने, मानव और पशु स्वास्थ्य में सुधार, कृषि के विकास, जल संसाधनों के उपयोग के प्रबंधन, औद्योगिक प्रक्रियाओं के अनुकूलन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, जिससे दुनिया भर में लोगों के जीवन की गुणवत्ता और कल्याण में सुधार करने में मदद मिलती है. उन्होंने कहा कि भारत परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में एजेंसी की प्रमुख पहलों का स्वागत करता है.

पुरंदेश्वरी ने कहा, “हम प्राकृतिक आपदाओं, प्रकोपों ??और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सदस्य देशों को आईएईए द्वारा दिए गए समर्थन की भी सराहना करते हैं.” उन्होंने परमाणु ऊर्जा और परमाणु अनुसंधान संबंधी उपयोग के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय परमाणु ऊर्जा रिएक्टर निर्बाध निरंतर संचालन में कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि भारत ने अन्य सदस्य देशों के विशेषज्ञों को अपने प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण प्रदान करके और विशेषज्ञों को दूसरे स्थान पर भेजकर एजेंसी के तकनीकी सहयोग कार्यक्रमों में योगदान दिया है. उन्होंने कहा, “हमने तकनीकी बैठकों और समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं में भाग लेकर और उनकी मेजबानी करके आईएईए की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का भी समर्थन किया है. हम एजेंसी के कार्यक्रमों को यह समर्थन प्रदान करना जारी रखेंगे.” सांसद जी. के. वासन ने परमाणु अप्रसार पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1540 समिति की खुली ब्रीफिंग में एक वक्तव्य देते हुए सामूहिक विनाश के हथियारों (डब्ल्यूएमडी) और उनकी वितरण प्रणालियों के प्रसार को रोकने के वैश्विक प्रयासों के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहरायी.

उन्होंने कहा कि आतंकवादियों और अन्य गैर-सरकारी तत्वों की इन डब्ल्यूएमडी तक पहुंच, इन हथियारों से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए उत्पन्न खतरों को और भी गंभीर बना देती है. वासन ने कहा कि भारत 1540 समिति के अन्य प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र निकायों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों और इस परिषद की आतंकवाद-रोधी समितियों के साथ बेहतर सहयोग और समन्वय का समर्थन करता है ताकि आतंकवादियों और अन्य गैर-सरकारी तत्वों को डब्ल्यूएमडी, उनकी वितरण प्रणालियां और संबंधित सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकियां प्राप्त करने से रोका जा सके. उन्होंने कहा, “इस संबंध में, एक अन्य प्रमुख क्षेत्र जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ध्यान देने की आवश्यकता है, वह है प्रसार जोखिमों का तेजी से विकास.”

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