Close Menu
Rashtrawani
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
प्रमुख राष्ट्रवाणी

रोहित ने कहा टी20 विश्व कप में अर्शदीप और हार्दिक होंगे सफलता की कुंजी

January 28, 2026

आईसीसी टी20: सूर्यकुमार सातवें स्थान पर, अभिषेक शीर्ष पर कायम; ईशान, दुबे और रिंकू ने लगाई लंबी छलांग

January 28, 2026

फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने देश में टिकट खिड़की पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की

January 28, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
  • Terms
  • About Us – राष्ट्रवाणी | Rashtrawani
  • Contact
Facebook X (Twitter) Instagram
RashtrawaniRashtrawani
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
Subscribe
Rashtrawani
Home»Entertainment»हीमैन नहीं, सत्यकाम, अनुपमा, बंदिनी के संवेदनशील अभिनेता थे धर्मेंद्र
Entertainment

हीमैन नहीं, सत्यकाम, अनुपमा, बंदिनी के संवेदनशील अभिनेता थे धर्मेंद्र

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniNovember 24, 2025No Comments14 Mins Read
Share Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Reddit Telegram Email
हीमैन नहीं, सत्यकाम, अनुपमा, बंदिनी के संवेदनशील अभिनेता थे धर्मेंद्र
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

नयी दिल्ली/मुंबई. धर्मेंद्र को ‘हीमैन’ की छवि में बांधना शायद उन अभिनेता के साथ अन्याय होगा जो कभी ‘सत्यकाम’ के सिद्धांतवादी सत्यप्रिय था तो कभी अपनी कैदी से मूक प्रेम कर बैठा ‘बंदिनी’ का डॉक्टर अशोक तो कभी ‘अनुपमा’ को साहस देने वाला प्रेमी .
वहीं उनके यादगार किरदारों में ‘चुपके चुपके’ के प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी या प्यारेमोहन इलाहाबादी को कौन भूल सकता है . धर्मेंद्र का जिक्र सिर्फ शराब पीकर पानी की टंकी पर चढकर बसंती की मौसी से नाराजगी जताने वाले वीरू या ‘ कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा’ कहते नायक के रूप में करना अभिनय में संवेदनशीलता की असाधारण मिसाल देने वाले उनके कई अमर किरदारों के साथ ज्यादती होगी .

अस्सी के दशक के ‘ही मैन’ मार्का किरदारों से इतर साठ सत्तर के दशक में धर्मेंद्र ने बिमल रॉय और ऋषिकेश मुखर्जी जैसे निर्देशकों के साथ भावप्रणव अभिनय की छाप छोड़ी थी . बिमल रॉय की 1963 में आई ‘बंदिनी’ में कैदी नायिका (नूतन) से प्रेम कर बैठे जेल के डॉक्टर अशोक का किरदार सभी का मन मोह ले गया था . अशोक कुमार और नूतन जैसे दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद धर्मेंद्र ने अपनी संक्षिप्त लेकिन दमदार भूमिका से सभी का ध्यान खींचा .

इसके बाद 1966 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली ऋषिकेश मुखर्जी की ‘अनुपमा’ में उन्होंने अपनी स्पष्टवादिता के कारण बेरोजगार रहने वाले लेखक और शिक्षक अशोक की भूमिका निभाई जो नायिका अनुपमा (र्शिमला टैगोर) में आत्मविश्वास भरता है . संवाद कम थे लेकिन अभिव्यक्ति की ताकत और व्यक्तित्व की गरिमा ने उस किरदार को इतना लोकप्रिय बनाया कि आज तक सिनेप्रेमियों के जेहन में चस्पा है .

भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी टाइमिंग की बात होगी तो उसमे 1975 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की ‘चुपके चुपके’ में धर्मेंद्र के किरदार को हमेशा याद किया जायेगा . अपनी पत्नी के हिन्दीप्रेमी जीजा को उन्हीं की जबां में सबक सिखाने के लिये बॉटनी के प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी से ड्राइवर प्यारेमोहन बने धर्मेंद्र की सादगी, मासूमियत और संवाद अदायगी ने इस फिल्म को हर पीढी की पसंदीदा बना दिया .

भाषा के ईद गिर्द बनी इस फ.ल्मि में शुद्ध हिंदी बोलने का नाटक करने वाले धर्मेंद्र के संवाद सिनेप्रेमियों को आज तक याद हैं . वह ख.ुद को ड्राइवर नहीं वाहन चालक बताते हैं, हाथ धोने को हस्त प्रक्षालन , ट्रेन को लौह पथ गामिनी बोलते हैं और यहां तक कहते हैं कि भोजन तो हमने लौह पथ गामिनी स्थल पर ही कर लिया था . पंजाब के साहनेवाल से मायानगरी मुंबई पहुंचे धर्मेंद्र को आज की पीढी भले ही ‘ही मैन’ के रूप में जानती हो लेकिन अभिनय की बुलंदियों को तो उन्होंने कैरियर के शुरूआती दौर में अपने शालीन, गरिमामय और दमदार अभिव्यक्ति से भरपूर इन किरदारों के दम पर छू लिया था . हिन्दी सिनेमा के इतिहास की कालजयी रचनाओं के ये किरदार भी ्स्विवणम विरासत का हिस्सा रहेंगे .

दिलीप साहब धर्मेंद्र को छोटा भाई मानते थे : सायरा बानो
वरिष्ठ अभिनेत्री सायरा बानो ने सोमवार को फिल्म ”आदमी और इंसान” के अपने सह-कलाकार को याद करते हुए कहा कि धर्मेंद्र और दिलीप कुमार भाइयों की तरह थे, जिन्हें बैडमिंटन खेलना पसंद था और वे खाने के बेहद शौकीन थे. धर्मेंद्र और दिलीप कुमार ने दो मौकों पर साथ काम किया – पहली बार धर्मेंद्र की एकमात्र बंगाली फिल्म ”पारी” (1966) में और दूसरी बार 1972 में बनी इसकी रीमेक ”अनोखा मिलन” में. दोनों ही फिल्मों में दिलीप कुमार ने छोटी -छोटी भूमिकाएं निभाईं.

धर्मेंद्र अक्सर कहते थे कि उन्हें दिलीप कुमार की 1948 की फिल्म ”शहीद” से अभिनेता बनने की प्रेरणा मिली. दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार की पत्नी सायरा बानो ने कहा कि धर्मेंद्र को वे दोनों अपना परिवार मानते थे. बानो ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”यह सबसे दुखद दिन है क्योंकि वह परिवार का हिस्सा थे. मैं सदमे में हूं. मैंने सोचा था कि हम उनका जन्मदिन मनाएंगे.” उन्होंने कहा, ”दिलीप साहब धर्मेंद्र को छोटे भाई जैसा मानते थे. उनके बीच काम से कहीं बढ.कर रिश्ता था. हम अच्छे और बुरे समय में एक-दूसरे के साथ रहे हैं. वह उन चुनिंदा लोगों में से एक थे जो दिलीप साहब से अक्सर मिलने आते थे, चाहे वह अस्पताल में हों या घर पर.” बानो याद करती हैं कि धर्मेंद्र और दिलीप कुमार दोनों ही खाने के बेहद शौकीन थे.

उन्होंने कहा, ”जब भी धरम जी हमसे मिलने घर आते थे, उनके लिए खास बिरयानी बनाई जाती थी. उन्हें बिरयानी इतनी पसंद थी कि वह उसे घर भी ले जाते थे. ऐसा रिश्ता था कि वह कई बार तो यूं भी कह देते थे, अपनी खास बिरयानी मेरे घर भेज दीजिएगा.” बानो ने बताया कि सिनेमा के दोनों सितारे, जब भी समय मिलता, बैडमिंटन भी खेलते थे.

बेटी ईशा देओल को फिल्मी दुनिया में नहीं आने देना चाहते थे धर्मेंद्र

अभिनेता धर्मेंद्र और अभिनेत्री हेमा मालिनी की बेटी ईशा देओल ने एक बार कहा था कि उनके पिता उन्हें फिल्मी दुनिया में शामिल होते नहीं देखना चाहते थे, बल्कि जल्द उनकी शादी करवाना चाहते थे. देओल ने 2024 में ‘हॉटरफ्लाई’ से कहा, ”वह (धर्मेंद्र) नहीं चाहते थे कि मैं फिल्मों में आऊं. वह सही मायनों में रूढि.वादी थे, क्योंकि वह पंजाबी थे, इसलिए वह चाहते थे कि मैं 18 साल की उम्र में शादी कर लूं और घर बसा लूं.” ‘कोई मेरे दिल से पूछे’ के लिए फिल्मफेयर अवार्ड में ‘बेस्ट फीमेल डेब्यू’ का पुरस्कार जीतने वाली अभिनेत्री ने कहा कि उनके परिवार में महिलाओं का पालन-पोषण इसी तरह होता है, लेकिन अपनी मां को पर्दे पर देखकर उनमें भी कुछ ऐसा ही करने की इच्छा जगी.

उन्होंने कहा, ”उनके परिवार की महिलाओं का पालन-पोषण इसी तरह हुआ है. लेकिन मेरे घर में मेरी परवरिश बहुत अलग रही. अपनी मां को फिल्मों में अभिनय करते और उनके नृत्य को देखकर मुझे दिशा मिली. मेरे अंदर यह भावना जाग उठी कि मुझे कुछ करना है.”  देओल ने कहा कि उनके पिता को इस काम के लिए राजी करना कठिन था. ईशा ने कहा, ”उन्हें मनाने में काफी समय लगा, यह आसान नहीं था, लेकिन आज कहानी अलग है.” ईशा और धर्मेंद्र ने 2011 में हेमा मालिनी द्वारा निर्देशित फ.ल्मि ‘टेल मी ओ खुदा’ में साथ काम किया था तथा इस फ.ल्मि में दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना, ऋषि कपूर और फ.ारूक. शेख भी थे.

जब दिलीप कुमार के घर में घुसे धर्मेंद्र और पसंदीदा कलाकार की नजर पड़ते ही उल्टे पांव वापस भागना पड़ा
धर्मेंद्र के फिल्मी दुनिया में लोकप्रिय अभिनेता के रूप में उभरने से पहले उस वक्त का दिलचस्प वाक्या सामने आया, जब धर्मेंद्र बंबई गए और हिम्मत जुटाकर अपने पसंदीदा अभिनेता दिलीप कुमार के घर के अंदर घुसकर उनके शयनकक्ष तक पहुंचे, लेकिन जब अभिनेता ने अपने घर में एक अजनबी को पाया तो धर्मेंद्र भाग खड़े हुए. वर्ष 1952 के किसी समय के इस दिलचस्प किस्से का जिक्र खुद धर्मेंद्र ने दिलीप कुमार की आत्मकथा ‘द सब्सटेंस एंड द शैडो’ के ‘स्मरण’ खंड में विस्तार से किया है.

धर्मेंद्र ने कहा था, ”1952 में जब मैं कॉलेज के दूसरे वर्ष में था, तब मैं पंजाब के छोटे से शहर लुधियाना से बंबई आया. तब हम लुधियाना में रहते थे. उस समय अभिनेता बनने की मेरी कोई योजना नहीं थी, लेकिन मैं दिलीप कुमार से जरूर मिलना चाहता था, जिनकी फिल्म ‘शहीद’ ने मेरी भावनाओं को गहराई तक छू लिया था. किसी अज्ञात कारण से मुझे लगने लगा था कि दिलीप कुमार और मैं भाई-भाई हैं.” उन्होंने याद करते हुए कहा था, ”बंबई पहुंचने के अगले ही दिन, मैं हिम्मत करके दिलीप कुमार से मिलने बांद्रा के पाली माला इलाके में उनके घर गया. दरवाजे पर मुझे किसी ने नहीं रोका, इसलिए मैं सीधे मुख्य द्वार से घर में चला गया. ऊपर शयनकक्ष तक जाने के लिए लकड़ी की एक सी­ढ़ी थी. फिर भी, मुझे किसी ने नहीं रोका, इसलिए मैं सीढि.यां च­ढ़कर ऊपर गया और एक कमरे के प्रवेश द्वार पर खड़ा हो गया.” धर्मेंद्र ने याद किया कि एक गोरा, दुबला-पतला, खूबसूरत युवक सोफे पर सो रहा था. उन्होंने बताया था कि दिलीप कुमार ने किसी की मौजूदगी का आभास किया होगा और वे अचानक चौंककर जाग गए.

धर्मेंद्र ने कहा था, ”मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूं, लेकिन मैं वहीं खड़ा रहा. वह सोफे पर बैठ गये और मुझे घूरने लगे, यह देखकर वह बिल्कुल हैरान रह गये कि एक अजनबी उनके शयनकक्ष के दरवाजे पर सावधानी से खड़ा उन्हें प्रशंसा भरी नजरों से देख रहा था.” उनका कहना था, ”जहां तक मेरी बात है, मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था – मेरे आदर्श दिलीप कुमार मेरे सामने थे. कुमार ने जोर से नौकर को आवाज दी. मैं डर के मारे सीढि.यों से नीचे भागा और घर से बाहर निकलकर पीछे मुड़कर देखने लगा कि कहीं कोई मेरा पीछा तो नहीं कर रहा.” धर्मेंद्र ने बताया था कि जब वह एक कैफे में पहुंचे और अंदर गए तो ठंडी लस्सी मांगी.
उन्होंने याद करते हुए कहा था, ”जब मैं कैफे में बैठा अपने द्वारा उठाए गए इस कदम पर सोच रहा था, तो मुझे एहसास हुआ कि एक मशहूर अभिनेता की निजता में दखल देकर मैंने कितनी लापरवाही बरती थी.” दिलीप कुमार की आत्मकथा के ‘स्मरण’ खंड में, धर्मेंद्र ने यह भी याद किया कि इस घटना के छह साल बाद, वह ‘यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स एंड फिल्मफेयर टैलेंट कॉन्टेस्ट’ में हिस्सा लेने के लिए तत्कालीन बंबई लौटे.

धर्मेंद्र ने बताया था, ”मैं अब सचमुच एक अभिनेता बनने के लिए उत्सुक था और मैंने अपने पिता को मना लिया था. मुझे विजेता घोषित किया गया और उसके बाद, मुझे ‘फिल्मफेयर’ पत्रिका के कार्यालय में एक फोटोशूट के लिए आने को कहा गया. मुझे मेकअप करना नहीं आता था और फोटोग्राफर मेरे चेहरे से प्रभावित हुआ, लेकिन वह थोड़ा सा मेकअप करवाना चाहता था. एक गोरी, दुबली-पतली लड़की मेकअप किट लेकर मेरे पास आई और उसने मेरे चेहरे का मेकअप करना शुरू कर दिया.”

उन्होंने कहा था, ”फिल्मफेयर के तत्कालीन संपादक, एल.पी. राव ने मुझसे धीरे से पूछा कि क्या मैं उस लड़की को जानता हूं. जब मैंने कहा कि मैं नहीं जानता, तो उन्होंने मुझे बताया कि वह दिलीप साहब की बहन फरीदा थीं, जो ‘फेमिना’ पत्रिका के साथ काम कर रही थीं. मैंने फरीदा को जाते हुए देखा और मैं उनके पीछे दौड़ा और उनसे दिलीप साहब से मिलाने का अनुरोध किया. मैंने उनसे कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि वह मेरे भी भाई हैं.” धर्मेंद्र ने बताया था, ”तब फरीदा ने कहा कि अगर उनके भाई राजी होते हैं तो वह राव को सूचित कर देंगी.” धर्मेंद्र ने बताया कि अगले दिन उन्हें रात 8:30 बजे उनके बंगले, 48 पाली हिल पर बुलाया गया और जब दिलीप साहब बाहर आए और उनका स्वागत किया तथा उन्हें लॉन में अपने बगल में बैठने के लिए कुर्सी दी, तो उनके लिए जैसे ”समय थम सा गया.”

अधिक नहीं चला धर्मेंद्र का राजनीतिक सफर
दशकों तक धर्मेंद्र ने बड़े पर्दे पर राज किया लेकिन 2004 में उन्होंने फिल्म सेट की जगह राजनीतिक रैलियां कीं तथा राजस्थान के बीकानेर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की. लुधियाना के पास साहनेवाल के मूल निवासी धर्मेंद्र के पंजाबी आकर्षण ने राजस्थान के मतदाताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. उनके प्रचार अभियान में भारी भीड़ उमड़ती थी.

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा, जबकि धर्मेंद्र अपने चुनावी पदार्पण में ही सफल रहे और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार रामेश्वर लाल डूडी को लगभग 60,000 मतों से हराया. हालांकि, संसद में पहुंचने के बाद, उनका राजनीति से जल्द ही मोहभंग हो गया. संसद में उनकी उपस्थिति कम थी और बहसों में उनकी सीमित भागीदारी पर सवाल उठे थे. वर्ष 2008 में ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में धर्मेंद्र ने राजनीति से अपने मोहभंग के बारे में बात की थी जब उन्होंने फिल्मी सितारों को एक सलाह दी थी.

धर्मेंद्र ने कहा था, “मैं यह नहीं कहूंगा कि राजनीति में आना कोई गलती थी, लेकिन हां, एक अभिनेता को राजनीति में नहीं आना चाहिए क्योंकि इससे दर्शकों और प्रशंसकों के बीच सामान्य स्वीकृति में विभाजन पैदा होता है. अभिनेता को हमेशा अभिनेता ही रहना चाहिए. मेरे लिए, इन सभी वर्षों में अपने प्रशंसकों से मिला प्यार और समर्थन ही सबसे बड़ी उपलब्धि है.” संसद में कम उपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर धर्मेंद्र ने कहा था कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ” “ऐसा कौन कहता है? मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं से हमेशा जुड़ा रहता हूं. बीकानेर के कूड़ाघर एवं सूर सागर की सफाई से लेकर बच्चों की स्कूल फीस कम करने, रंगमंच के जीर्णोद्धार और पुलों के निर्माण तक, मैं हर समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहा हूं.” धर्मेंद्र ने साक्षात्कार में कहा था, “बीकानेर स्थित मेरा कार्यालय मुझे नियमित रूप से लोगों की मांगों से अवगत कराता है. मैं किसान परिवार से हूं, इसलिए मैं उनकी समस्याओं को समझता हूं. और यह कोई राजनीति नहीं है. मैं भावुक लेकिन दृ­ढ़ व्यक्ति हूं, ये आलोचनाएं मेरे इरादे नहीं तोड़ सकतीं. मैंने कभी भी ध्यान आर्किषत करने के लिए कुछ नहीं किया, चाहे अभिनय में हो या राजनीति में.” उनका कार्यकाल 2009 में समाप्त हो गया और उन्होंने फिर कभी इस सीट से चुनाव नहीं लड़ा.

धर्मेंद्र से मुलाकात को याद किया अमित पंघाल ने
सितंबर 2018 में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतने के बाद मुक्केबाज अमित पंघाल बस धर्मेंद्र से मिलना चाहते थे जो एक मशहूर फिल्म स्टार थे. पंघाल अपने पिता की वजह से धर्मेंद्र को बहुत पसंद करते थे. पंघाल को उस समय हैरानी हुई जब एक सितंबर को अपनी यह इच्छा सार्वजनिक करने के एक दिन के भीतर ही इस सुपरस्टार ने जवाब दिया और उन्हें अपने घर बुलाया. उसी साल नवंबर में दोनों मुंबई में धर्मेंद्र के आलीशान घर पर मिले. इस दौरान दोनों ने साथ भोजन किया और जिंदगी और महत्वाकांक्षाओं पर दो अलग-अलग नजरियों से बात की और ऐसी यादें बनाईं जो पंघाल के मुताबिक जिंदगी भर रहेंगी.

पंघाल ने पीटीआई को बताया, ”उसके बाद हम नहीं मिले लेकिन मेरे पास उनका फोन नंबर था और मैं उन्हें उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं देता था. वह हमेशा जवाब देते थे.” पिछले सात साल से चला आ रहा यह सिलसिला इस साल खत्म हो गया. आठ दिसंबर को 90 बरस के होने जा रहे धर्मेंद्र ने सोमवार को सुबह मुंबई में आखिरी सांस ली. धर्मेंद्र उम्र से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ा और मीडिया में उनकी हालत को लेकर बहुत अधिक कयास लगाए गए जिससे उनका परिवार और चाहने वाले परेशान हो गए. पंघाल ने भी यह सब होते देखा लेकिन उन्हें हमेशा उम्मीद दी थी कि उनका हीरो ठीक हो जाएगा. उन्होंने कहा, ”मुझे उम्मीद थी कि वह ठीक हो जाएंगे.” विश्व चैंपियनशिप के पूर्व रजत पदक विजेता और राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पंघाल उस दोपहर की मुलाकात को याद किया.

भारतीय सेना में सूबेदार पंघाल ने कहा, ”जकार्ता में मेरे स्वर्ण पदक के बाद मेरा साक्षात्कार हो रहा था. किसी ने पूछा कि अब आप क्या चाहेंगे. मुझे अधिक सोचना नहीं पड़ा. मैंने बस कहा कि मैं धर्मेंद्र से मिलना चाहता हूं. मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह बात ऑनलाइन इतनी तेजी से फैल जाएगी.” उन्होंने कहा, ”मैंने ट्विटर (अब एक्स) पर यह भी पोस्ट किया था कि मेरी सबसे बड़ी इच्छा थी कि मैं अपने पिता (विजेंदर पंघाल) और अपने शुरुआती कोच अनिल धनकड़ के साथ उनसे मिलूं. मुझे हैरानी हुई कि धर्मेंद्र जी ने मेरे ट्वीट का जवाब दिया और मुझे मुंबई में अपने घर बुलाया. मैं बहुत खुश था.” पंघाल ने कहा, ”हम उनसे नवंबर में उनके घर पर मिले थे. वह हमारे साथ दो घंटे से अधिक समय तक रहे. हमने साथ में लंच किया और ऐसा नहीं लगा कि मैं किसी लोकप्रिय हस्ती से मिल रहा हूं. ऐसा लगा कि मैं अपने परिवार के किसी बड़े से मिल रहा हूं. वह बहुत ही मिलनसार इंसान थे और उन्होंने मुझे जिदगी की कुछ अच्छी सलाह दी.”

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous Articleफोन पर नंबर ब्लॉक करने से नहीं रुकेगी स्पैम कॉल, डीएनडी ऐप से करें शिकायत: ट्राई
Next Article पाकिस्तान के पेशावर में आत्मघाती हमले में तीन सुरक्षाकर्मी मारे गए
Team Rashtrawani
  • Website

Related Posts

Entertainment

फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने देश में टिकट खिड़की पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की

January 28, 2026
Entertainment

‘जन नायकन’ सेंसर सर्टिफिकेट विवाद: मद्रास हाईकोर्ट में एकल पीठ का आदेश रद्द, फिल्म के रिलीज पर सस्पेंस बरकरार

January 27, 2026
Entertainment

रेड लॉरी फिल्म उत्सव के तीसरे संस्करण का आयोजन मार्च में मुंबई में होगा

January 23, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

निर्मला सीतारमण ने जातिगत गणना का श्रेय लेने पर तमिलनाडु सरकार को घेरा

May 3, 202546 Views

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

April 30, 202546 Views

चपरासी से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के आरोप में एक प्रिंसिपल और प्रोफेसर निलंबित

April 8, 202543 Views
Stay In Touch
  • Facebook
  • WhatsApp
  • Twitter
  • Instagram
Latest Reviews
राष्ट्रवाणी

राष्ट्रवाणी के वैचारिक प्रकल्प है। यहां आपको राष्ट्र हित के ऐसे दृष्टिकोण पर आधारित समाचार, विचार और अभिमत प्राप्त होंगे, जो भारतीयता, हिंदुत्व और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुंबकम के शाश्वत चिंतन को पुष्ट करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

Most Popular

निर्मला सीतारमण ने जातिगत गणना का श्रेय लेने पर तमिलनाडु सरकार को घेरा

May 3, 202546 Views

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

April 30, 202546 Views

चपरासी से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के आरोप में एक प्रिंसिपल और प्रोफेसर निलंबित

April 8, 202543 Views
Our Picks

रोहित ने कहा टी20 विश्व कप में अर्शदीप और हार्दिक होंगे सफलता की कुंजी

January 28, 2026

आईसीसी टी20: सूर्यकुमार सातवें स्थान पर, अभिषेक शीर्ष पर कायम; ईशान, दुबे और रिंकू ने लगाई लंबी छलांग

January 28, 2026

फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने देश में टिकट खिड़की पर 250 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की

January 28, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • व्यापार
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
© 2026 Rashtrawani

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.