रांची/नयी दिल्ली. अपने कैरियर के सर्वश्रेष्ठ दौर से गुजरने के बाद अधिकांश खिलाड़ी घर पर अपने परिवार और कुत्ते के साथ रहना पसंद करते हैं लेकिन सैतीस वर्ष के विराट कोहली अभी भी मैदान पर चुस्ती के साथ दौड़ते और डाइव लगाते देखे जा सकते हैं और दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन खेलने को लेकर उनके इसी जुनून के कायल हैं .
टी20 और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने वाले कोहली ने दिखाया कि वनडे क्रिकेट में अब भी उनका कोई सानी नहीं है. कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले वनडे में यहां अपने करियर का 52वां शतक लगाया. स्टेन ने जियोस्टार से कहा, ”जब आप 37 या 38 साल के अधिकतर खिलाड़ियों से बात करते हैं तो वे कहते हैं कि उन्हें घर, अपने कुत्ते, अपने बच्चों को छोड़ना पसंद नहीं है. लेकिन कोहली मानसिक रूप से ऐसी स्थिति में हैं जहां वह पहले की तरह भारत के लिए खेलने के लिए उत्सुक हैं. आप इसे विकेटों के बीच दौड़, फ.ील्डिंग करते और डाइव लगाते हुए देख सकते हैं. वह मानसिक रूप से युवा और तरोताज.ा हैं और क्रिकेट में बने रहना चाहते हैं.”
उन्होंने कहा,” कोहली ने पिछले 15 16 साल में 300 से अधिक वनडे खेले हैं इसलिए वह काफी अनुभव रखते हैं. यह उनके शरीर और दिमाग में है. अगर वह तीन दिन की बारिश के बाद भी यहां पहुचते तो भी उनकी तैयारी पर कोई असर नहीं पड़ता. वह मानसिक रूप से मज.बूत हैं, अच्छी तरह से सोच सकते हैं और गेंद को बल्ले पर आते हुए देख सकते हैं. दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी यही करते हैं.” स्टेन ने कहा, ”वह स्वयं पर भरोसा रखते हैं क्योंकि वह पिछले लंबे समय से खेल रहे हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह अब भी पहले की तरह खेलने को लेकर उत्साहित रहते हैं.” अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना 83वां शतक लगाने के बाद कोहली ने अपने करियर के इस दौर में अपनी मानसिकता और तैयारी के बारे में बात की थी.
कोहली ने कहा, ”मैं बहुत अधिक तैयारी में यकीन नहीं रखता. मेरा सारा क्रिकेट मानसिक रहा है. मैं शारीरिक रूप से बहुत मेहनत करता हूं. जब तक मेरी फिटनेस का स्तर अच्छा है और मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं तब तक सब ठीक है.” उन्होंने कहा ,” मैं 300 के करीब वनडे खेल चुका हूं . इतना अधिक क्रिकेट खेलने के बाद अगर आप खेलते रहें और अभ्यास में अच्छा खेल सके तो नेट्स में एक या दो घंटे बल्लेबाजी का अभ्यास काफी होता है .”
सीमित ओवर प्रारूप में भारत की आक्रामक बल्लेबाजी का श्रेय रोहित, द्रविड को : अश्विन
भारत के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने सीमित ओवर प्रारूप में भारत की आक्रामक बल्लेबाजी की रणनीति का श्रेय पूर्व कप्तान रोहित शर्मा और पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ को दिया. टीम को इस रवैये से पिछले कुछ वर्षों में काफी सफलता मिली है. अश्विन ने कहा कि इन दोनों दिग्गजों ने ना केवल अधिक आक्रामक शैली अपनाने पर जोर दिया बल्कि खुद भी उदाहरण पेश किया. इससे टी20 अंतरराष्ट्रीय और वनडे में भारत के रवैये में बदलाव आया.
अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल ‘ऐश की बात’ पर कहा, ”कप्तान के रूप में रोहित हमेशा टीम को यह दिखाते रहे हैं कि वह उनसे क्या चाहते हैं. टी20 और वनडे क्रिकेट में भारत जिस परिवर्तनकारी बल्लेबाजी (आक्रामक अंदाज बल्लेबाजी करना) से गुजरा है उसका बहुत सारा श्रेय रोहित और राहुल भाई को जाता है.” उन्होंने कहा, ”उन्होंने रास्ता दिखाया, राहुल भाई ने कहा कि हमें इस तरह खेलना है और रोहित ने खुद इस तरह की पहल की और इसने भारतीय बल्लेबाजी की धारणा बदल दी. सफेद गेंद वाले क्रिकेट में बल्लेबाजी सिर्फ औसत नहीं बल्कि स्ट्राइक रेट पर भी निर्भर करती है.” भारत ने आईसीसी टूर्नामेंटों में लगातार निराशाजनक अभियानों के बाद इस तरह का रवैया अपनाया. टीम ने 2023 में घरेलू सरजमीं पर खेले गये विश्व कप में आक्रामक मानसिकता के साथ लीग चरण में दबदबा बनाया. टीम को इस तरह की रवैये से वेस्टइंडीज और अमेरिका में खेले गये 2024 टी20 विश्व कप में भी जीत मिली.
दिग्गज रोहित और विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब सिर्फ वनडे प्रारूप में खेलते है ऐसे में अश्विन ने प्रशंसकों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके शेष समय का लुत्फ उठाने का आग्रह किया. अश्विन ने कहा, ”मैं एक बात कहूंगा हमें विराट कोहली और रोहित शर्मा की बल्लेबाजी का लुत्फ उठाना चाहिये. उनके पास जितना भी समय है, हमें उनके खेल का जश्न मनाना चाहिये. क्योंकि जब वे खेल को अलविदा कह देंगे तब यह कहने का कोई मतलब नहीं होगा कि वे कितने शानदार खिलाड़ी थे, उन्हें फिर से वापसी करनी चाहये.”
अश्विन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले वनडे में हरफनमौला हार्दिक पंड्या की गैरमौजूदगी के बावजूद नितीश कुमार रेड्डी को एकादश से बाहर रखे जाने के बाद भारतीय टीम के चयन पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ”हार्दिक पंड्या की गैरमौजूदगी में भी अगर हम उस टीम में नितीश कुमार रेड्डी के लिए जगह नहीं ढूंढ पा रहे हैं तो टीम के चयन में कुछ गड़बड़ है.”

