तिरुवनंतपुरम. अभिनेत्री यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता ने रविवार को कहा कि निचली अदालत का फैसला उनके लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि इन वर्षों में उन्हें एहसास हुआ कि देश में हर नागरिक के साथ विधि के समक्ष समान व्यवहार नहीं किया जाता.
एक भावुक लेकिन कड़े शब्दों वाले सोशल मीडिया पोस्ट में, पीड़िता ने आरोप लगाया कि मुकदमे के दौरान उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं की गई.
उन्होंने यह भी कहा कि फैसले से यह स्पष्ट होता है कि मानवीय विवेक न्यायिक निर्णयों को कैसे प्रभावित कर सकता है. हालांकि, पीड़िता ने यह स्वीकार किया कि हर अदालत एक ही तरह से काम नहीं करती है. निचली अदालत के फैसले के बाद अभिनेत्री की यह पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया है, जिसमें यौन उत्पीड़न मामले में दोषी पाए गए छह लोगों को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है, जबकि इसी मामले में मलयालम अभिनेता दिलीप को बरी कर दिया गया है.
पीड़ित अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘‘वर्षों के दर्द, आंसुओं और भावनात्मक संघर्ष के बाद, मुझे एक कड़वी सच्चाई का एहसास हुआ है कि विधि के समक्ष इस देश में हर नागरिक के साथ समान व्यवहार नहीं होता.’’ उन्होंने खुशी जताई कि छह आरोपियों को दोषी ठहराया गया है. पीड़िता ने कहा, ‘‘आठ साल, नौ महीने और 23 दिन बाद, आखिरकार मुझे एक बहुत लंबी और दर्दनाक यात्रा के अंत में आशा की एक छोटी सी किरण दिखाई दी. छह आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, और इसके लिए मैं आभारी हूं.’’ पीड़िता ने उन लोगों की भी आलोचना की, जिन्होंने उनके बयान पर संदेह जताया था.
अभिनेत्री ने इस दावे को खारिज कर दिया कि मुख्य आरोपी उनका निजी चालक था, और इस आरोप को ‘‘पूरी तरह से झूठा’’ बताया. उन्होंने कहा, ‘‘वह मेरा चालक नहीं था, मेरा कर्मचारी नहीं था, और न ही मैं उसे जानती थी. उसे 2016 में उस फिल्म के लिए चालक के रूप में नियुक्त किया गया था, जिसमें मैंने काम किया था. उस समय मैं उससे केवल एक या दो बार मिली थी.’’

