ढाका. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री एवं बीएनपी की वरिष्ठ नेता खालिदा जिया को संसद भवन के निकट बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच सुपुर्द ए खाक किया गया और इस दौरान लाखों लोगों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी. दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति पर प्रभाव रखने वाली जिया का मंगलवार को ढाका में निधन हो गया था. वह 80 वर्ष की थीं. जिया के निधन की खबर मिलते ही समाज के सभी वर्गों के लोग उनके अंतिम संस्कार के लिए बसों, रेलगाडि़यों या यहां तक कि मेट्रो सेवाओं के माध्यम से राजधानी में एकत्र होने लगे.
अखबार ‘डेली स्टार’ की खबर के अनुसार मंगलवार रात तक राजधानी में बीएनपी नेताओं और समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ने लगी, जिससे अधिकारियों को भीड़ को संभालने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. पुलिस और सशस्त्र पुलिस बटालियन (एपीबीएन) के सदस्यों समेत बड़ी संख्या में कानून प्रवर्तन र्किमयों को तैनात किया गया. विदेश मंत्री एस जयशंकर, पाकिस्तान, नेपाल और अन्य पड़ोसी देशों के कई वरिष्ठ नेता, राजनयिक और बांग्लादेश के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य अधिकारी मानिक मिया एवेन्यू में जिया के अंतिम संस्कार में शामिल हुए.
राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे जिया के ताबूत को उनके आवास से अंतिम संस्कार स्थल तक लाया गया. बड़ी संख्या में शोक संतप्त लोग अपनी प्रिय नेता की अंतिम झलक पाने के लिए संसद परिसर के बाहर एकत्र हुए. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कई समर्थक जिया की तस्वीरों वाले झंडे लिए हुए देखे गये. बांग्लादेश के अंतरिम सरकार प्रमुख मोहम्मद यूनुस, प्रधान न्यायाधीश जुबैर रहमान चौधरी और जिया के बेटे एवं बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान भी जनाजे की नमाज में शामिल हुए.
जिया के बड़े बेटे रहमान ने नमाज से पहले वहां मौजूद लोगों से कहा, ”कृपया अल्लाह से दुआ करें कि उन्हें जन्नत में जगह मिले.” बैतुल मुकर्रम राष्ट्रीय मस्जिद के खतीब मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल मलिक ने जनाजे की नमाज अदा की, जबकि बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य नजरुल इस्लाम खान ने जिया की संक्षिप्त जीवनी पढ़ी. बांग्लादेश की तीन बार प्रधानमंत्री रहीं जिया की नमाज-ए-जनाजा में लाखों लोग शामिल हुए.समाज के हर वर्ग से आए शोक संतप्त लोगों ने जिया की आत्मा की शांति के लिए दुआ की.
नमाज-ए-जनाजा के बाद उन्हें स्थानीय समयानुसार लगभग शाम साढ़े चार बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके पति की कब्र के पास दफनाया गया. भूटान के विदेश मामलों के मंत्री ल्योंपो डीएन धुंग्येल अंतिम संस्कार में शामिल हुए, जबकि मालदीव का प्रतिनिधित्व उसके उच्च शिक्षा और श्रम मंत्री अली हैदर अहमद ने किया. ढाका में तैनात राजदूतों, उच्चायुक्तों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी जिया के जनाजे की नमाज में शामिल हुए.
टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रमुख सलाहकार यूनुस ने मंगलवार को तीन दिन के राजकीय शोक और एक दिन के आम अवकाश की घोषणा की थी. सार्वजनिक हस्ती के रूप में जिया का उदय व्यापक रूप से आकस्मिक माना जाता है. जिया ने 35 वर्ष की आयु में विधवा होने के एक दशक बाद प्रधानमंत्री का पद संभाला लेकिन राजनीति में उनका प्रवेश सुनियोजित नहीं था.
वर्ष 1981 में एक असफल सैन्य तख्तापलट में उनके पति एवं राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या कर दी गयी थी, जिसके बाद जिया को राजनीति में उतरना पड़ा. इससे पहले तक वह राजनीतिक जगत से अपरिचित रही थीं. उन्होंने जियाउर रहमान द्वारा 1978 में स्थापित बीएनपी पार्टी की शीर्ष नेता के रूप में शीघ्र ही अपनी पहचान बनाई. बीएनपी ने 1991 में चुनाव जीता था और जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं.
विदेश मंत्री जयशंकर ने जिया के बेटे तारिक रहमान को प्रधानमंत्री मोदी का पत्र सौंपा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पत्र सौंपा.
जयशंकर पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शमिल होने के लिए यहां पहुंचे हैं. ढाका पहुंचने के तुरंत बाद जयशंकर ने बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष और जिया के सबसे बड़े बेटे रहमान से मुलाकात की और तीन दशकों से अधिक समय तक देश की राजनीति पर अपना दबदबा बनाए रखने वाली इस महान नेता के निधन पर भारत की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की.
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में कहा, ”मैंने उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पत्र सौंपा. मैंने भारत सरकार और जनता की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की.” विदेश मंत्री ने कहा, ” मैंने विश्वास व्यक्त किया कि बेगम खालिदा जिया के दृष्टिकोण और मूल्य हमारी साझेदारी के विकास में मार्गदर्शक बनेंगे.” मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने जिया के निधन पर शोक व्यक्त किया था. तीन बार प्रधानमंत्री रहीं और लंबे समय तक बीएनपी की अध्यक्ष रहीं जिया का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को ढाका में निधन हो गया. वह 80 वर्ष की थीं.

