नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड बुधवार को 15% से अधिक गिरकर 99.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो एक सप्ताह का निचला स्तर है। इससे पहले मंगलवार रात ब्रेंट क्रूड 118.35 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। तरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर अब घरेलू बाजार पर भी साफ दिखने लगा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चे तेल के अप्रैल वायदा में मंगलवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। क्रूड ऑयल अप्रैल फ्यूचर्स 474 रुपये यानी 4.95% गिरकर 9,093 रुपये प्रति बैरल पर कारोबार करते दिखे। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि घरेलू कीमतें फिलहाल पूरी तरह वैश्विक रुझानों का अनुसरण कर रही हैं।
क्यों आई गिरावट?
कीमतों में यह अचानक गिरावट भू-राजनीतिक मोर्चे पर आए नए संकेतों के बाद देखने को मिली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अगले दो से तीन हफ्तों में कम हो सकता है। साथ ही, यह भी संकेत मिले कि ईरान कुछ शर्तों के तहत तनाव कम करने को तैयार हो सकता है।
इन संकेतों के बाद बाजार में बने रिस्क प्रीमियम में कमी आई। जिन निवेशकों ने कीमतों में तेजी पर दांव लगाया था, उन्होंने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।
जोखिम अभी भी बरकरार
हालांकि कीमतों में आई इस गिरावट के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अहम संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है और यहां किसी भी तरह का व्यवधान कीमतों को फिर तेजी से ऊपर ले जा सकता है।
इसके अलावा, अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से मिल रहे मिले-जुले आर्थिक संकेतों ने भी बाजार को अस्थिर बना रखा है, जिससे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं कीमतें
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा गिरावट को एक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतें मार्च के अधिकांश समय में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही हैं। व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो आपूर्ति संबंधी चिंताएं और भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी बाजार को सहारा दे रही हैं।


