🔴जानिए क्यों दुनिया भर में है इसकी जबरदस्त डिमांड
राष्ट्रवाणी 20 अप्रैल 2026। अपनी रेशमी चमक और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र सिर्फ एक व्यापारिक केंद्र ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ का दिल भी माना जाता है. राज्य के मध्य में स्थित होने के कारण यह विकास और गतिविधियों का अहम केंद्र है, जो प्रदेश की प्रगति में लगातार योगदान देता है. प्राकृतिक कोसा रेशम की बेहतरीन कारीगरी ने इस क्षेत्र को ‘सिल्क सिटी’ की खास पहचान दिलाई है. यहां बनाए जाने वाले वस्त्र अपनी शुद्धता, पारंपरिक बुनाई और उच्च गुणवत्ता के कारण देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बन चुके हैं. हसदेव नदी के किनारे बसी या ऐतिहासिक नगरी आज भी अपने समृद्ध हस्तशिल्प, जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पहचान को मजबूती से प्रस्तुत कर रही है।
छत्तीसगढ़ में कोसा सिल्क की जबरदस्त डिमांड
छत्तीसगढ़ में कोसा सिल्क का उत्पादन मुख्य रूप से कुछ विशेष क्षेत्रों में किया जाता है, जहां पारंपरिक कारीगर पीढ़ियों से इस कला को संजोए हुए हैं. यह रेशम अपनी असाधारण मजबूती, मुलायम बनावट और प्राकृतिक चमक के लिए जाना जाता है, जो इसे अन्य रेशमी वस्त्रों से अलग पहचान दिलाता है. हाथों से तैयार किए गए कोसा कपड़े न सिर्फ टिकाऊ होते हैं, बल्कि पहनने में भी बेहद आरामदायक होते हैं. यही वजह है कि यह खास सिल्क देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी गुणवत्ता और अपने टेक्सचर के लिए प्रसिद्ध है.
इन जिलों में तैयार किया जाता है कोसा सिल्क
छत्तीसगढ़ के कोरबा और जांजगीर-चांपा जिले में मुख्य रूप से कोसा सिल्क तैयार किए जाते है. कोसा सिल्क अपने अनोखे टेक्सचर और प्राकृतिक चमक के लिए पूरी दुनिया में खास पहचान रखता है. यह परंपरागत रूप से तैयार किया जाने वाला रेशम को ‘कोसा, कांस और कंचन’ जैसी विशिष्ट पहचान से भी जाना जाता है.
यहां के कोशशील के विदेशी भी है दीवाने
छत्तीसगढ़ के कोरबा और जांजगीर-चांपा जिले में मुख्य रूप से कोसा सिल्क तैयार किए जाते है. कोसा सिल्क अपने अनोखे टेक्सचर और प्राकृतिक चमक के लिए पूरी दुनिया में खास पहचान रखता है. यह परंपरागत रूप से तैयार किया जाने वाला रेशम को ‘कोसा, कांस और कंचन’ जैसी विशिष्ट पहचान से भी जाना जाता है.
क्यों मशहूर है कोसा सिल्क
कोसा सिल्क बहुत मजबूत होता है और मुलायम होने के लिए दुनिया भर में मशहूर है. इसे सिल्क की सबसे शुद्ध किस्मों में से एक माना जाता है. इसकी सबसे खास बात इसका रंग है. कोसा सिल्क का प्राकृतिक रंग हल्का सुनहरा होता है, जिसे बाद में पलाश के फूलों, लाख और गुलाब की पंखुड़ियों से बने रंगों से रंगा जाता है.
ऐसे ही बनता है धागा
तितली के लार्वा द्वारा बनाए गए कोकून जंगलों से इकट्ठा किए जाते हैं. इनमें से सबसे बेहतरीन कोकून चुने जाते हैं और उबाले जाते हैं. उबालने के बाद उनसे रेशम के धागे निकाले जाते हैं. जिसके बाद 7 से 8 कोकूनों को मिलाकर एक लंबा धागा बनाया जाता है.
एक साड़ी तैयार करने में लगते हैं इतने दिन
इसके बाद धागे को रंगा जाता है. सूखने के बाद धागे को एक बंडल में लपेटा जाता है, जिसके बाद इसका उपयोग साड़ियां बुनने के लिए किया जाता है. गांव वाले रेशम को रंगने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है. एक कोसा रेशम की साड़ी बनाने में 7 से 8 दिन लगते हैं.

