RBI की बैलेंस शीट में बड़ा उछाल, सोने और निवेश से बढ़ी ताकत-भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की बैलेंस शीट मार्च 2026 के अंत तक 91.97 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 20.6 प्रतिशत ज्यादा है। इस बढ़ोतरी के पीछे घरेलू और विदेशी निवेश के साथ-साथ सोने की कीमतों में हुई बढ़ोतरी मुख्य वजह मानी जा रही है। RBI की यह मजबूत वित्तीय स्थिति भारत की आर्थिक मजबूती का संकेत देती है। साथ ही, सोने के भंडार और बढ़ती आय ने भी बैंक की ताकत को और बढ़ाया है।
एक साल में RBI की बैलेंस शीट में जबरदस्त बढ़ोतरी-मार्च 2025 में RBI की कुल बैलेंस शीट 76.25 लाख करोड़ रुपये थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गई। यानी सिर्फ एक साल में 15.71 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। घरेलू निवेश में 44.9 प्रतिशत, सोने में 63.8 प्रतिशत और विदेशी निवेश में 7.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने इस उछाल को संभव बनाया है। आर्थिक विशेषज्ञ इसे रिजर्व बैंक की मजबूत स्थिति का संकेत मान रहे हैं, जो देश की आर्थिक स्थिरता के लिए अच्छा संकेत है।
सोने के भंडार ने RBI की ताकत को और बढ़ाया-RBI के पास मार्च 2026 तक कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना था, जो पिछले साल के 879.58 मीट्रिक टन से थोड़ा ज्यादा है। हालांकि मात्रा में ज्यादा फर्क नहीं आया, लेकिन सोने की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी के कारण सोने का कुल मूल्य बढ़कर 7.06 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया है। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 63.6 प्रतिशत ज्यादा है। सोने के इस बढ़ते भंडार ने RBI की वित्तीय स्थिति को और मजबूत किया है।
RBI की आय और सरप्लस में भी हुआ इजाफा-साल 2025-26 में RBI की कुल आय 26.4 प्रतिशत बढ़ी, जबकि खर्च में 102.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बावजूद बैंक का कुल सरप्लस 2.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल 2.68 लाख करोड़ रुपये था। यानी कुल सरप्लस में करीब 6.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा RBI ने 1.09 लाख करोड़ रुपये कंटिजेंसी फंड में ट्रांसफर किए हैं, ताकि भविष्य में आर्थिक जोखिमों से निपटा जा सके।
विदेशी संपत्तियों का हिस्सा अभी भी सबसे बड़ा-RBI की कुल संपत्तियों में विदेशी मुद्रा संपत्तियों, सोने और विदेशी संस्थानों को दिए गए ऋण का हिस्सा 70.9 प्रतिशत है। वहीं घरेलू संपत्तियों की हिस्सेदारी 29.1 प्रतिशत है, जो पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। यह दर्शाता है कि RBI घरेलू निवेश को भी मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है, जिससे देश की आर्थिक नींव और मजबूत हो रही है।
करेंसी नोट छपाई पर खर्च में कमी, कर्मचारी खर्च बढ़ा-साल 2025-26 में करेंसी नोट छपाई पर खर्च घटकर 4,875 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल यह 6,372 करोड़ रुपये था। हालांकि कर्मचारियों पर खर्च बढ़कर 10,136 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 9,146 करोड़ रुपये था। RBI के संचालन खर्च में यह बदलाव उसकी प्रबंधन रणनीति और आर्थिक परिस्थितियों को दर्शाता है।

