राष्ट्रवाणी, 12 जुलाई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक जनसभा में कथित रूप से हिंदू गाली है जैसी टिप्पणी करने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर यह देखना होता है कि एफआईआर और जांच में प्रथम दृष्टया अपराध बनता है या नहीं।
साक्ष्यों की सत्यता या आरोपों की पुष्टि का फैसला ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान होगा।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने की मांग की थी। उनका कहना था कि उनके खिलाफ दर्ज मामला कानून के अनुरूप नहीं है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की।
फरवरी 2024 में कुनकुरी (जशपुर ज़िले) में हुई एक जनसभा में, याचिकाकर्ताओं ने कथित तौर पर कहा कि हिंदू शब्द का मतलब चोर, डकैत, लुटेरा और गुलाम होता है और दावा किया कि यह कोई धर्म नहीं, बल्कि एक गाली है। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने और दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित धाराओं के तहत उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एफआईआर रद्द करने की शक्ति का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में किया जाता है। यदि शिकायत और जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का संकेत मिलता है, तो मुकदमे की कार्यवाही को शुरुआती चरण में रोका नहीं जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट इस प्रकार की याचिकाओं पर विचार करते समय ट्रायल कोर्ट की भूमिका नहीं निभा सकता। गवाहों के बयान, साक्ष्यों की विश्वसनीयता और बचाव पक्ष की दलीलों का परीक्षण मुकदमे के दौरान ही किया जाएगा।

