जहां एक तरफ पुरुष टीम अपनी नाकामी के आंसू रो रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत की महिला क्रिकेट टीम ने ‘क्रिकेट के मक्का’ कहे जाने वाले ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर वो कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे विश्व क्रिकेट को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है। पिछले 24 घंटों में भारत की शेरनियों ने इंग्लैंड की घमंडी टीम को पहले एकमात्र टेस्ट मैच में 270 रनों के विशाल और ऐतिहासिक अंतर से कुचलकर रख दिया। इंग्लैंड को जीत के लिए 457 रनों का असंभव पहाड़ जैसा लक्ष्य मिला था, लेकिन भारतीय गेंदबाजों की खूंखार गेंदबाजी के आगे पूरी इंग्लिश टीम आखिरी दिन लंच से पहले ही महज 186 रनों पर ढेर हो गई।
स्नेह राणा और दीप्ति शर्मा की फिरकी ने इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम को ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिया और अंतिम चार विकेट चटकाकर ऐतिहासिक जीत की इबारत लिख दी। यह जीत केवल एक मैच की जीत नहीं है, बल्कि यह इंग्लैंड की धरती पर भारतीय महिला क्रिकेट की सर्वोच्चता का क्रूर शंखनाद है। कप्तान हरमनप्रीत कौर के जुझारू नेतृत्व और टीम के गजब के अनुशासन ने साबित कर दिया है कि यह टीम अब दुनिया की सबसे खतरनाक टेस्ट टीम बन चुकी है। बीसीसीआई के अध्यक्ष मिथुन मन्हास और सचिव देवजीत सैकिया ने भी पिछले 24 घंटों में इस ऐतिहासिक लम्हे को भारतीय क्रिकेट का सबसे गौरवशाली क्षण बताया है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जय शाह द्वारा शुरू किए गए ‘पे-पैरिटी’ (समान वेतन) और महिला प्रीमियर लीग (WPL) जैसे क्रांतिकारी फैसलों ने महिला टीम को यह फौलादी आत्मविश्वास दिया है। संभावनाएं साफ इशारा करती हैं कि भारतीय महिला टीम का यह आक्रामक रूप आने वाले दिनों में ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम के दबदबे को भी हमेशा के लिए खत्म कर देगा। लॉर्ड्स में मिली यह ऐतिहासिक जीत सालों तक इंग्लैंड को उनकी औकात याद दिलाती रहेगी।

