19 जुलाई 2026 की रात भारतीय क्रिकेट इतिहास के काले अक्षरों में दर्ज हो गई है। विदेशी पिच पर मिली यह करारी और शर्मनाक हार सिर्फ एक मैच का नतीजा नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के सिस्टम में आ चुके सड़न का सबूत है। मैदान पर जो खेल टीम इंडिया ने दिखाया, उसे देखकर ऐसा लगा ही नहीं कि ये दुनिया के सबसे अमीर बोर्ड के खिलाड़ी हैं। ऐसा लगा कि मैदान पर कोई अंतरराष्ट्रीय टीम नहीं, बल्कि गली-मोहल्ले के अनाड़ी उतरे हों। बल्लेबाजी की शुरुआत से लेकर गेंदबाजी के आखिरी ओवर तक, हर जगह सिर्फ और सिर्फ गैर-जिम्मेदारी और लापरवाही का नंगा नाच देखने को मिला।
शर्म की बात तो यह है कि इन खिलाड़ियों को सिर्फ आईपीएल (IPL) के विज्ञापनों में चमकने और सोशल मीडिया पर रील बनाने की चिंता है। देश की जर्सी पहनकर जब देश का मान बढ़ाने की बारी आती है, तो इन तथाकथित ‘स्टार्स’ के पैर कांपने लगते हैं। कप्तान की रणनीति पूरी तरह से फ्लॉप रही, और मिडिल ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। कोई भी खिलाड़ी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था। फैंस रात-रात भर जागकर मैच देख रहे हैं, अपनी गाढ़ी कमाई टिकटों पर फूंक रहे हैं, और बदले में इन्हें क्या मिल रहा है? सिर्फ धोखा और ये जिल्लत भरी हार!
अब वक्त आ गया है कि इन ‘करोड़पति नवाबों’ को उनकी औकात दिखाई जाए। सिर्फ नाम बड़े और दर्शन छोटे वाले इन खिलाड़ियों को टीम से लात मारकर बाहर करने का समय आ चुका है। अगर देश के लिए खेलने का जज्बा नहीं है, तो जाकर सिर्फ ब्रांड एंडोर्समेंट करो। यह हार कोई सामान्य हार नहीं है, यह भारतीय फैंस के भरोसे का कत्ल है, और इसकी तीखी आलोचना तब तक होनी चाहिए जब तक इन खिलाड़ियों का अहंकार टूटकर चूर-चूर न हो जाए।

