राष्ट्रवाणी: न्यूज, नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के घोर माओवाद प्रभावित रहे और दुर्गम माने जाने वाले अबूझमाड़ क्षेत्र से सुखद खबर सामने आई है। नारायणपुर जिले के सुदूर ग्राम पीड़ियाकोट में स्वास्थ्य सेवा में नया इतिहास रच दिया है। कभी विकास की रोशनी से कोसों दूर और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस गांव में पहली बार दो महिलाओं का सफल संस्थागत प्रसव कराया गया है। इस बड़ी उपलब्धि को क्षेत्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। पीड़ियाकोट निवासी दशरी और सुधरी को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विशेष रूप से समझाइश दी और संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया। दुर्गम पहाड़ी रास्तों और कठिन भौगोलिक बाधाओं को पार करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों ने दोनों गर्भवतियों को बाइक एम्बुलेंस की सहायता से सुरक्षित मायका सेंटर डुंगा पहुंचाया। तमाम चुनौतियों को मात देते हुए 26 जुलाई 2026 को मायका सेंटर में दोनों महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया। इस दौरान एक स्वस्थ बालक और एक स्वस्थ बालिका का जन्म हुआ। राहत की बात यह है कि प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं और वर्तमान में चिकित्सकीय निगरानी में उनकी आवश्यक देखभाल की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुदूर अंचलों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर उचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमेशा से चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। इसके लिए लगातार जनजागरूकता अभियानों, काउंसलिंग और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पीड़ियाकोट में मिला यह पहला सफल परिणाम इसी कड़ी का एक सकारात्मक फल है। इस ऐतिहासिक सफलता को अबूझमाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और ग्रामीणों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक माना जा रहा है। विभाग का संकल्प है कि भविष्य में भी बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाती रहेंगी। मायका सेंटर दुर्गम और सुदूर ग्रामीण अंचलों में गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने की व्यवस्था है। बस्तर जैसे पहाड़ी और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में, जहां महिलाओं को प्रसव पीड़ा के समय मुख्य अस्पतालों तक पहुंचाना बेहद जोखिम भरा होता है, ये केंद्र मायके जैसी सुरक्षित और अपनापन भरी आत्मीयता प्रदान करते हैं। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी, आवश्यक दवाइयों, और पौष्टिक देखभाल की पूरी व्यवस्था होती है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
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