राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बिलासपुर: उसलापुर रेलवे स्टेशन में यात्रियों को ट्रेन के इंतजार में रतजगा करना पड़ा। शनिवार की रात 2:20 बजे पहुंचने वाली गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस करीब पांच घंटे की देरी से रविवार को सुबह 7:30 बजे स्टेशन पहुंची। लंबी प्रतीक्षा के बीच यात्रियों की परेशानी उस समय और बढ़ गई, जब प्लेटफार्म पर लगे शेड से जगह-जगह पानी टपकता रहा। बारिश से बचने और बैठने के लिए यात्रियों को पर्याप्त जगह नहीं मिली। इससे नाराज यात्रियों ने रेल प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन का नाम तो दे दिया गया, लेकिन यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यात्रियों ने पूरे प्लेटफार्म पर शेड बेहद जरूरी है। इसके बावजूद इस सुविधा को रेलवे नजर अंदाज कर रही है। शनिवार की रात तेज बारिश हुई। इसका असर ट्रेनों के परिचालन पर भी पड़ा। यही वजह है कि गोंदिया से बरौनी जाने वाली ट्रेन प्रारंभिक स्टेशन से देर से रवाना हुई। हालांकि मौसम को देखते हुए यात्री ट्रेन पहुंचने के निर्धारित समय से पहले स्टेशन पहुंच गए। उन्हें लगा कि यह ट्रेन एक से डेढ़ घंटे देर होगी, तब तक स्टेशन में समय गुजारा जा सकता है। यात्री स्टेशन पहुंचने के बाद पूरी रात प्लेटफार्म पर गुजारे। ट्रेन के इंतजार में समय गुजारना इसलिए और चुनौतीपूर्ण हो गया, क्योंकि रात में यात्रियों को बैठने तक की सुविधा नहीं मिल सकी। दरअसल प्लेटफार्म पर लगे शेड में जगह-जगह छेद की वजह से बरसात का पानी टपक रहा था। कुर्सियां और चबूतरे गीले हो गए थे। वैसे भी शहर के इस दूसरे प्रमुख स्टेशन के तीनों प्लेटफार्म के पूरे हिस्से में शेड नहीं लगा है। जिस हिस्से में शेड है, उनकी स्थिति इस लायक नहीं थी कि यात्री बिना भीगे उसके नीचे खड़े रहकर ट्रेन का इंतजार कर सकें। जरूरी सुविधाएं दरकिनार कर सुंदरीकरण को दी प्राथमिकता उसलापुर रेलवे स्टेशन को शहर का दूसर महत्वपूर्ण स्टेशन कहा जाता है। परिचालन की दृष्टि यह कहना उचित है। दुर्ग-रायपुर की आकर कटनी सेक्शन पर जाने वाली अधिकांश ट्रेनों का बिलासपुर में स्टापेज बंद कर दिया गया है। इस व्यवस्था से 20 मिनट का परिचलन समय बचता है। बिलासपुर स्टेशन में इंजन बदलने की दिक्कत रहती थी। यात्रियों को उम्मीद थी कि ट्रेनों का स्टापेज बढ़ रहा है तो रेलवे सुविधाएं भी बढ़ाएगी। इसकी उपयोगिता देखते हुए ही इसे अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल किया गया। पहले चरण में इस योजना के तहत 15 करोड़ खर्च भी किए जा चुके हैं। लेकिन, यात्रियों की बेहद जरूरी सुविधाओं को दरकिनार कर दिया गया। जिसमें सबसे प्रमुख शेड हैं। जिसके अभाव में यात्रियों उसलापुर स्टेशन में दिक्कतें हो रहीं है। उसलापुर की तरह बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों को अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी ट्रेनों के आगमन को लेकर देखने को मिली, क्योंकि कई गाड़ियां अपने निर्धारित समय से प्रभावित रहीं। तेज वर्षा के चलते हावड़ा-मुंबई मार्ग पर रेल परिचालन प्रभावित हुआ, जिसका असर बिलासपुर स्टेशन पर भी स्पष्ट रूप से नजर आया। इसके कारण यात्रियों को ट्रेनों की जानकारी और प्रतीक्षा दोनों को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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