राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षक (कला/सामाजिक विज्ञान) की नियुक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि बीकाम में पढ़ाया जाने वाला बिजनेस इकोनामिक्स या एप्लाइड इकोनामिक्स, बीए में मुख्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने वाले अर्थशास्त्र के समान नहीं माना जा सकता। भर्ती नियमों में स्नातक स्तर पर इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र या राजनीति विज्ञान में से किसी एक विषय को मुख्य यानी कोर विषय के रूप में पढ़ना अनिवार्य था। इस योग्यता को पूरा नहीं करने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद करना वैध है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए कल्पना डहरिया, पूर्वी सोनी, इंदु चंद्रा और चंद्रेश्वर मनहरे की रिट अपील खारिज कर दी। स्कूल शिक्षा विभाग ने छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2019 के तहत अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षक (कला/सामाजिक विज्ञान) के 152 पदों के लिए भर्ती निकाली थी। विज्ञापन में स्पष्ट किया गया था कि अभ्यर्थी के स्नातक स्तर पर इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र या राजनीति विज्ञान में से कोई एक विषय मुख्य विषय के रूप में होना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया में भाग लिया और सफल भी हुए। इसके बाद 24 अगस्त 2021 को उन्हें पदस्थापना आदेश जारी कर दिए गए। उन्होंने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया था। हालांकि, दस्तावेजों के अंतिम भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आया कि चारों अभ्यर्थी बीकॉम डिग्रीधारी हैं। इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और जवाब का परीक्षण करने के बाद 25 अक्टूबर 2021 को उनकी नियुक्तियां रद कर दी गईं। इसके खिलाफ दायर याचिका सिंगल बेंच ने खारिज कर दी थी। इसके बाद अभ्यर्थियों ने डिवीजन बेंच में अपील की। अभ्यर्थियों ने कहा- बीकाम में दो साल पढ़ा है इकोनामिक्स याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि उन्होंने बीकाम के शुरुआती दो वर्षों में बिजनेस इकोनामिक्स या एप्लाइड इकोनामिक्स का अध्ययन किया है। भर्ती नियमों में केवल स्नातक स्तर पर इकोनामिक्स विषय का उल्लेख था। इसलिए उन्हें अपात्र नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि अंकसूची में इकोनामिक्स विषय दर्ज है, इसलिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी होती है। शासन ने कहा- बीकाम का इकोनामिक्स अलग राज्य शासन की ओर से तर्क दिया गया कि बीकॉम में पढ़ाया जाने वाला बिजनेस इकोनामिक्स व्यवसाय और वाणिज्य से जुड़ा अनुप्रयुक्त विषय है। वहीं बीए में अर्थशास्त्र तीनों वर्षों तक मुख्य विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। शासन ने कहा कि सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के लिए जिस विषय का गहन और मुख्य रूप से अध्ययन किया गया हो, वही भर्ती नियमों में अपेक्षित है। बीकॉम में सहायक विषय के रूप में पढ़े गए बिजनेस इकोनामिक्स को बीए के मुख्य विषय अर्थशास्त्र के बराबर नहीं माना जा सकता। सिर्फ विषय का नाम समान होने से योग्यता समान नहीं हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और भर्ती नियमों का परीक्षण करने के बाद कहा कि केवल अंकसूची में इकोनामिक्स शब्द दर्ज होने से बीकॉम की डिग्री बीए इकोनामिक्स के समकक्ष नहीं हो जाती। अदालत ने माना कि बीकाम में अर्थशास्त्र का अध्ययन मुख्य विषय के रूप में नहीं, बल्कि व्यवसाय से संबंधित पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में किया जाता है। जबकि संबंधित शिक्षक पद के लिए अर्थशास्त्र को स्नातक स्तर पर कोर विषय के रूप में पढ़ना आवश्यक था। हाई कोर्ट ने माना कि सिंगल बेंच ने मामले का सही कानूनी मूल्यांकन किया था। बीकाम में बिजनेस इकोनॉमिक्स पढ़ने वाले अभ्यर्थी संबंधित भर्ती नियमों के तहत कला/सामाजिक विज्ञान शिक्षक पद की अनिवार्य योग्यता पूरी नहीं करते थे। इस आधार पर डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए चारों अभ्यर्थियों की रिट अपील खारिज कर दी।
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