राष्ट्रवाणी: भारत और रूस द्विपक्षीय व्यापार निपटान के लिए डिजिटल मुद्राओं के उपयोग हेतु एक तंत्र विकसित कर रहे हैं। यह पहल डी-डॉलराइजेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। द्विपक्षीय व्यापार में डिजिटल करेंसी के उपयोग पर विचार जारी। डी-डॉलराइजेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी। ट्रेड के लिए भुगतान में तेजी, दक्षता और लागत में कमी आएगी। नई दिल्ली। भारत और रूस ने द्विपक्षीय ट्रेड सेटलमेंट (Bilateral Trade Settlements) के लिए एक ऐसा तंत्र विकसित करने पर जोर दिया है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप परेशान हो सकते हैं। दरअसल, दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार निपटान के लिए डिजिटल करेंसी के उपयोग हेतु एक तंत्र विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार विस्तार के प्रयासों के तहत सीमा पार भुगतान में तेजी और दक्षता लाने का एक नया मार्ग खुल सकता है। भारत और रूस द्वारा डिजिटल करेंसी के ज़रिए द्विपक्षीय व्यापार के निपटारे की योजना डी-डॉलराइजेशन (De-dollarization) की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम है। रूस के सबसे बड़े लैंडर स्बरबैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरमन ग्रेफ ने कहा कि रूसी केंद्रीय बैंक और भारतीय रिज़र्व बैंक इस व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग ने शुक्रवार को बताया कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार में भुगतान संबंधी दिक्कतों को कम करने और आर्थिक संबंधों को गहरा करने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रेफ ने नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा, “अभी तो बस शुरुआत है, लेकिन हमें देशों के बीच सभी लेन-देन के लिए डिजिटल मुद्रा में अपार संभावनाएं दिख रही हैं।” जहां भारत वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मुद्राओं की मांग बढ़ेगी और इनमें तेजी से वृद्धि होगी। दुनिया भर के कुल विदेशी मुद्रा कारोबार में करीब 85% से 90% हिस्सेदारी अकेले अमेरिकी डॉलर की है। ऐसे में जब भारत, व्यापार के लिए रूस को डॉलर के ज़रिए पेमेंट करता है, तो पहले रुपये को डॉलर में और फिर डॉलर को रूबल में बदलना पड़ता है। इसमें ‘करेंसी कन्वर्जन फीस’ लगती है और 2-3 दिन का समय लगता है। डिजिटल करेंसी से यह काम रियल-टाइम में और बहुत कम लागत में हो जाएगा। रूस ने 1 सितंबर को सरकारी नियंत्रण वाले स्बरबैंक सहित प्रमुख बैंकों के माध्यम से अपनी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा, डिजिटल रूबल, लॉन्च की। भारत ने 2022 में प्रायोगिक तौर पर अपनी डिजिटल मुद्रा शुरू की थी और अब इसका उपयोग कुछ सरकारी कार्यक्रमों में किया जा रहा है।
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