राष्ट्रवाणी: मुंबई। मुंबई से इस वक्त बड़ी वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां दिशा सल्यान मौत मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी यानि सीबीआई ने एक नई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करते हुए हत्या और गैंगरेप की धराएं जोड़ीं हैं।
जानकारी के मुताबिक इस प्राथमिकी (एफआईआर) में एक्टर डिनो मौर्या, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती और आदित्य ठाकरे का नाम भी जोड़ा गया है। इसके अलावा तत्कालीन गृहमंत्री यनिल देशमुख, सौविक चक्रवर्ती, रोहन रॉय (दिशा साल्यान का मंगेतर) और तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर परामबीर सिंह का भी इस प्राथमिकी (एफआईआर) में नाम दर्ज है।
सबसे बड़ी बात यह कि, मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आदित्य के पिता उद्धव ठाकरे का भी इस प्राथमिकी (एफआईआर) में नाम जोड़ा गया है। उद्धव पर मामले में साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गया है। बता दें कि, दिशा सालियान बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर थीं।
8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के कारण मात्र 28 वर्ष की उम्र में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनकी इस मौत के ठीक 6 दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी अपने बांद्रा स्थित फ्लैट में मृत पाए गए थे। पुलिस की भूमिका की भी होगी जांच
कहा गया कि, दोनों की ही हत्या हुई थी।
उस वक्त मुंबई पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह पर इस केस को दबाने के गंभीर आरोप लगे थे। कहा गया कि, इस मामले में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का नाम सीधे तौर पर जुड़ रहा था। सालों बाद अब एक बार फिर जब सीबीआई ने नई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है तब न्याय की उम्मीद जगी है।
खबर है कि, केन्द्रीय अजेंसी इस केस से जुड़े पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी। दिशा के मोबाइल फोन पर प्राथमिकी (एफआईआर) में क्या कहा गया? प्राथमिकी (एफआईआर) में दिशा के मोबाइल फोन को लेकर कई गंभीर विरोधाभासों का जिक्र किया गया है. दस्तावेज में कहा गया है कि अलग-अलग बयानों और रोहन रॉय के बयान/इंटरव्यू से यह सवाल उठता है कि पुलिस ने 9 जून 2020 को सुबह करीब 9:40 बजे दिशा का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया था.
लेकिन प्राथमिकी (एफआईआर) के मुताबिक, फोन को जब्त दिखाए जाने के बावजूद बाद में मीडिया रिपोर्टों में सामने आया कि वह फोन एक्टिव रहा और उसके बाद भी इस्तेमाल किया जाता रहा. बताया जा रहा है कि इसके बाद पुलिस की तरफ से यह स्पष्टीकरण दिया गया कि फोन को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद संभावित कनेक्शन की जांच के लिए दोबारा खोला गया था.
प्राथमिकी (एफआईआर) में दावा किया गया है कि यह स्पष्टीकरण भी उपलब्ध सामग्री से मेल नहीं खाता था और इसके बाद पहले के जब्ती रिकॉर्ड दबा दिए गए या नष्ट कर दिए गए तथा फोन को कब और किन परिस्थितियों में जब्त किया गया, इसे लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड में एक अलग कहानी दर्ज की गई.
प्राथमिकी (एफआईआर) में यह भी गंभीर दावा किया गया है कि दिशा का मोबाइल फोन सचिन वाजे और आदित्य ठाकरे के कब्जे में रहा और उसका इस्तेमाल किया गया. दस्तावेज के मुताबिक, फोन से उन लोगों की पहचान करने के लिए जानकारी हासिल की गई, जिनसे दिशा ने घटना से जुड़ी बातचीत की थी या जो संभावित गवाह बन सकते थे अथवा मामले से जुड़े लोगों के लिए खतरा पैदा कर सकते थे.

