राष्ट्रवाणी: भारतीय डाक का इतिहास 700 साल से भी पुराना है, जो अलाउद्दीन खिलजी के दौर से शुरू होकर आधुनिक डिजिटल …और पढ़ें भारतीय डाक का 700 साल का सफर: खिलजी के घोड़ों से डिजिटल युग तक भारतीय डाक का 700 साल पुराना अद्भुत और दिलचस्प इतिहास। खिलजी के घोड़ों से लेकर स्पीड पोस्ट तक का सफर।
दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क, आधुनिक डिजिटल सेवाओं से लैस। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आज भले स्मार्टफोन और इंस्टेंट मैसेजिंग के जरिए बातचीत करना बहुत आसान हो गया है।
लेकिन 700 साल पहले, भारत का डाक नेटवर्क तेज दौड़ने वाले घोड़ों और न थकने वाले पैदल दौड़ने वालों इंसान के दम पर चलता था। इतिहास के पन्नें पटलाएंगे तो आप पाएंगे कि कैसे अलाउद्दीन खिलजी के दौर से शुरू होकर सात सदियों से भी ज्यादा पुरानी भारत डाक (India Post) की यात्रा एक अद्भुत और दिलचस्प इतिहास से गुजरती है।
हम यहां आपको मध्यकालीन शाही संदेशवाहकों से लेकर डिजिटल रूप से जुड़ी एक विशाल सार्वजनिक सेवा संस्था बनने तक के सफर में ले जा रहे हैं। ऐतिहासिक रिकॉर्ड में तुगलक वंश के समय 14वीं सदी के यात्री इब्न बतूता का जिक्र होता है। इब्न बतूता को मध्यकालीन दुनिया के सबसे महान और प्रसिद्ध यात्रियों और खोजकर्ताओं में से एक माना जाता है।
इसमें ‘अल-वोलक’ (घोड़े पर सवार संदेशवाहक) और ‘अल-दावाह’ (पैदल संदेशवाहक) का इस्तेमाल करने वाले शुरुआती व्यवस्थित डाक नेटवर्क के बारे में जानकारी मिलती है। 1541 तक, शेर शाह सूरी ने बंगाल और सिंध के बीच 2,000 मील तक फैले एक खास घोड़ा-डाक सिस्टम को संस्थागत रूप दिया। ब्रिटिश शासन के दौरान पब्लिक पोस्ट ऑफिस को औपचारिक रूप दिया गया।
इसकी शुरुआत 1766 में रॉबर्ट क्लाइव और 1774 में वॉरेन हेस्टिंग्स ने की, जिसके बाद कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे में मशहूर जनरल पोस्ट ऑफिस स्थापित किए गए। 19वीं सदी के मध्य में, 1854 के पोस्ट ऑफिस एक्ट के साथ व्यवस्थित गवर्नेंस की शुरुआत हुई। लॉर्ड डलहौजी को आधुनिक भारतीय डाक सेवा का संस्थापक माना जाता है।
उन्होंने 1854 में आधुनिक भारतीय डाक सेवा की शुरुआत की थी। हालांकि, आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव 1879 और 1880 के बीच आया, जब सस्ते पोस्टकार्ड के साथ-साथ रेलवे मेल सर्विस और मनी ऑर्डर सिस्टम शुरू किए गए। इन बदलावों ने बातचीत और पैसे भेजने की सुविधा को आम लोगों तक पहुंचाया, जिससे लाखों प्रवासी मजदूर अपनी कमाई सुरक्षित रूप से घर भेज पाए।
इसके बाद 1882 में पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक और 1884 में पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस की शुरुआत ने पोस्टल नेटवर्क को ग्रामीण भारत की वित्तीय रीढ़ बना दिया। आजादी के बाद, इंडिया पोस्ट ने बदलती आर्थिक जरूरतों के हिसाब से खुद को ढालना जारी रखा। अगस्त 1986 में तेज डिलीवरी की मांग को पूरा करने के लिए ‘स्पीड पोस्ट’ की शुरुआत एक अहम पड़ाव साबित हुई।
21वीं सदी में, 2003 में मेघदूत सॉफ्टवेयर और 2006 में ई-पेमेंट सेवाओं के साथ-साथ प्रोजेक्ट एरो और IT मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों के जरिए टेक्नोलॉजी को अपनाने की रफ्तार तेज हुई। आज, इंडिया पोस्ट सदियों पुरानी विरासत को आधुनिक डिजिटल गवर्नेंस से जोड़ने वाले एक गतिशील पुल के रूप में खड़ा है।
1341: तुगलक काल के दौरान, इब्न बतूता ने ‘अल-वुलाक’ (घोड़े पर सवार संदेशवाहक) और ‘अल-दावा’ (पैदल संदेशवाहक) का जिक्र किया था। 1541: शेर शाह सूरी ने बंगाल और सिंध को जोड़ने वाली 2,000 मील लंबी सड़क पर ‘हॉर्स डाक’ (घोड़े पर आधारित डाक सेवा) शुरू की। 1672: महाराजा चिक्का देवराजा वोडेयार द्वारा ‘मैसूर आंचे’ (डाक प्रणाली) की स्थापना।
इंडिया पोस्ट दुनिया का सबसे बड़ा पोस्टल नेटवर्क है। दुनिया का सबसे ऊंचा पोस्ट ऑफिस हिमाचल प्रदेश के हिक्किम में है, जो समुद्र तल से 15,500 फीट की ऊंचाई पर है। इसके अलावा इंडिया पोस्ट का तैरता हुआ पोस्ट ऑफिस भी है, जो कि कश्मीर के श्रीनगर में डल झील पर है और एक शानदार हाउस-बोट से चलता है।

