राष्ट्रवाणी: राजनांदगांव। शहर के प्रतिष्ठित वाइडनेयर स्कूल को राजगामी संपदा न्यास द्वारा दी गई शासकीय लीज भूमि के अवैध क्रय-विक्रय के मामले में अब कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। राजगामी संपदा न्यास समिति ने इस बहुचर्चित प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को पत्र लिखकर जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग करेगी।
शिकायतकर्ता क्रिष्टोफर पॉल ने बताया कि वर्ष 1975 में तत्कालीन कलेक्टर एवं राजगामी संपदा न्यास द्वारा लालबाग स्थित दो अलग-अलग स्थानों पर लगभग 5 एकड़ भूमि वाइडनेयर स्कूल के संचालन के लिए (शैक्षणिक उद्देश्य से) आवंटित की गई थी। नियमानुसार राजगामी संपदा की लीज पर दी गई भूमि को बिना शासन एवं न्यास की पूर्व अनुमति के किसी अन्य संस्था या व्यक्ति को हस्तांतरित या विक्रय नहीं किया जा सकता।
इसके बावजूद, स्कूल का संचालन करने वाली संस्था ने न्यास व कलेक्टर को बिना कोई सूचना दिए इस बेशकीमती शासकीय भूमि को दो अलग- अलग संस्थाओं को विक्रय कर दिया। शिकायतकर्ता क्रिष्टोफर पॉल विगत 8 वर्षों से सभी दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ इस घोटाले की जांच और भूमि को पुनः राजगामी संपदा में निहित करने की मांग कर रहे हैं।
आरोप है कि पूर्व में राजनीतिक दबाव के कारण इस मामले को दबाया जाता रहा था, और निष्पक्ष जांच नही पा रहा था। राजगामी संपदा न्यास की गुरुवार को हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं, जिसमें संपदा की दुकानों पर कब्जे की वसूली किए जाने का फैसला लिया गया है। वहीं कमला कालेज के सामने करीब चालीस दुकान बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इसके आलावा समिति ने आडिट किए जाने संबंधित कई फैसले लिए गए है। अध्यक्ष पूर्णिमा साहू की अध्यक्षता में हुई बैठक में उपाध्यक्ष मनोज निर्वाणी, सदस्य सीईओ मारकंडे, शैलेंद्र अग्रहरि, आबिद बेग, अशोक चतुर्वेदी, गणेश राम साहू, देव कुमार बंजारे, राजेन्द्र कुमार पटेल, चंदन राम यादव, राजकुमार यदु, जितेन कुमार यादव, नीलमणि यादव, विमला यादव, अश्विनी यादव, ओम प्रकाश साहू सहित अन्य ट्रस्टीगण मौजूद रहे।
बैठक में समिति ने कमला कॉलेज परिसर के सामने एक नया कॉम्प्लेक्स बनाए जाने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया , जिसमें 40 से अधिक दुकानें होंगी. इसके अलावा मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए स्थल निरीक्षण का प्रस्ताव और निरीक्षण उपरांत राशि स्वीकृत करने की बात तय हुई. रानी सागर में रानी सूर्यमुखी देवी की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने, किराएदारों से किराया वसूल करने, और अवैध किराएदारों की दुकानों को सील करने का भी बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया।
इसके साथ पुजारियों का वेतन 2500 से बढ़ाकर 5000 करने और राजगामी की जमीनों पर बोर्ड, साइन बोर्ड और वॉल राइटिंग करने का फैसला लिया गया, जिससे स्पष्ट हो सके कि उक्त जमीन राजगामी संपदा की है।

