राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज केस में अपील की सुनवाई से पहले पीड़ित या उसके अभिभावक को नोटिस देना जरूरी माना है। कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट की धारा 40 पीड़ित बच्चे के परिवार या अभिभावक को अपनी पसंद के वकील से कानूनी मदद लेने का कानूनी अधिकार देती है।
इसलिए मामले की सुनवाई की जानकारी दिए बिना अपील पर आगे बढ़ना सही नहीं होगा। यह आदेश जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की डिवीजन बेंच ने अजय मिरी बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले में सुनवाई के दौरान दिया। अपीलकर्ता की तरफ से एडवोकेट दिनेश तिवारी और शासन की तरफ से एडिशनल महाधिवक्ता आशीष शुक्ला ने पैरवी की।
सुनवाई में अपीलकर्ता की तरफ से कहा गया कि पॉक्सो एक्ट में अपील की सुनवाई की जानकारी पीड़ित को देने का कोई साफ प्रावधान नहीं है। इसलिए पीड़ित की गैर मौजूदगी में अपील का फैसला किया जा सकता है। शासन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पीड़ित को सूचना दिए बिना वह धारा 40 के तहत कानूनी मदद लेने के अधिकार का यूज नहीं कर सकेगा।
हाई कोर्ट ने धारा 40 और पॉक्सो नियम, 2020 के नियम 4(13) का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी है कि बच्चे, उसके माता-पिता या अभिभावक को आरोपी की गिरफ्तारी, दाखिल आवेदनों और दूसरी कोर्ट की कार्रवाई की जानकारी दी जाए। कोर्ट ने रजिस्ट्री को संबंधित थाना प्रभारी के जरिए पीड़ित, शिकायतकर्ता या अभिभावक को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
उन्हें अगली सुनवाई में खुद या संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या हाई कोर्ट सहायता केंद्र से अपना पक्ष रखने की सुविधा दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी।

