राष्ट्रवाणी: देवेंद्र गुप्ता प्रतिनिधि, कोरबा : महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में हुई आनलाइन ठगी की रकम चांपा क्षेत्र के बैंक खातों (म्यूल एकाउंट) में पहुंचने का मामला सामने आया है। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जा रहा था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकृत समन्वय पोर्टल से मिले इनपुट के बाद चांपा पुलिस और साइबर सेल ने जब बैंक खातों के लेन-देन की जांच की तो यह नेटवर्क सामने आया। अब तक सामने आए मामलों में 18 लाख 17 हजार 216 रुपये की ठगी की रकम का लेन-देन इन खातों से जुड़ा मिला है। चांपा थाना प्रभारी कमलेश सैंडे ने बताया कि दूसरे राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम स्थानीय बैंक खातों में आने के बाद आगे स्थानांतरित की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोगों ने कमीशन के बदले अपने बैंक खाते दूसरे लोगों को उपलब्ध कराए थे। इसके लिए उन्हें हर माह पांच से 10 हजार रुपये देने का लालच दिया गया था। बैंक खातों की जांच के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले जुलाई माह में बरपाली कलानगरदा निवासी पिंकी डडसेना को गिरफ्तार किया।
इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो हसौद बाजार निवासी सूरज जांगड़े और चारौदी निवासी राकेश धीरहे की भूमिका सामने आई और दोनों को गिरफ्तार किया गया। इसी कड़ी में 26 सितंबर को पुलिस ने छोटेकोट, मालखरौदा निवासी शुभम भारद्वाज (22) को गिरफ्तार किया। चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों से खाते से जुड़े दस्तावेज और बैंकिंग साधन लिए जाते थे। इन खातों में दूसरे राज्यों से ठगी की रकम आने के बाद उसे आगे दूसरे खातों में भेज दिया जाता था। इस तरह ठगी करने वालों तक रकम पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर बैंक खातों की व्यवस्था की जा रही थी।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि छह राज्यों से आई ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और बैंक खातों के लेन-देन के आधार पर अन्य संदिग्ध खातों और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही कई और चेहरे बेनकाब होंगे।
खातेदारों की तलाश : कमीशन के लालच में जरूरतमंद लोगों को बैंक खाता देने के लिए तैयार किया जाता था। खाता-दस्तावेज लेना : बैंक खाते के साथ एटीएम, पासबुक, मोबाइल सिम और जरूरी दस्तावेज लिए जाते थे। दूसरे राज्यों से रकम : महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश की ठगी की रकम खातों में पहुंचती थी।
रकम आगे भेजना : खाते में रकम आते ही उसे दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था। खातेदार तक पहुंची पुलिस: जिस खाते में ठगी की रकम आई, उसकी जांच से वास्तविक खातेदार तक पहुंचकर गिरफ्तारियां शुरू हुईं।

