राष्ट्रवाणी: न्यूज, सूरजपुर: नगर के एक निजी अस्पताल में प्रसव के महज तीन दिन बाद 47 वर्षीय व्याख्याता आशा भारती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया। स्वजनों ने अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए चिकित्सकीय लापरवाही की आशंका जताई है। उनका आरोप है कि अस्पताल में महिला की हालत बिगड़ने के दौरान पर्याप्त चिकित्सकीय निगरानी नहीं मिली और बाद में गंभीर स्थिति में उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर किया गया।
गायत्री अस्पताल, अंबिकापुर पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले में सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। स्वजनों के अनुसार आशा भारती का विवाह बीएचयू, वाराणसी में पदस्थ प्रोफेसर अभिजीत से हुआ था।
वह वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (आजाक), जयनगर में विज्ञान संकाय की व्याख्याता थीं। शादी के कई वर्ष बाद वह गर्भवती हुई थीं और नौकरी के सिलसिले में सूरजपुर के मिश्रा गली स्थित मायके में रह रही थीं। प्रसव के लिए आशा भारती को एक अक्टूबर को नगर के सौभाग्यम अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
स्वजनों का कहना है कि उन्होंने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया और प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों की स्थिति सामान्य थी। इसके बाद तीन अक्टूबर की शाम अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई। महिला के भाई और भाभी अस्पताल में उन्हें देखने पहुंचे तो स्वजनों के मुताबिक आशा भारती को अस्पताल के बिस्तर से नीचे जमीन पर रखा गया था।
उस समय वहां कथित तौर पर केवल दो नर्स मौजूद थीं। कुछ देर बाद पहुंचे चिकित्सक ने उनकी गंभीर स्थिति बताते हुए उन्हें अंबिकापुर के गायत्री अस्पताल रेफर कर दिया। स्वजन महिला को लेकर तत्काल अंबिकापुर के गायत्री अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद मायके पक्ष ने सूरजपुर कोतवाली पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की। स्वजनों ने चिकित्सकों की टीम गठित कर शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग भी की है, ताकि मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके। इधर, मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। मृतका के पति शव को अंतिम संस्कार के लिए वाराणसी ले जाने की तैयारी में हैं। वहीं घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका को लेकर स्वजनों के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

