राष्ट्रवाणी: गरबा नाइट्स में केसरियो रंग तने लाग्यो ल्या जरूर बजता है। ये गरबा गीत काफी मजेदार है। गुजरात का सुपरहिट गरबा सॉन्ग है केसरियो रंग तने लाग्यो (एआई Generated Image) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
नवरात्र की असली धूम गुजरात में ही देखने को मिलती है। यहां नवरात्र के नौ दिनों तक रोज रात को गरबा किया जाता है। लोग पंडालों में इकट्ठा होते हैं और मजेदार गरबा गीतों पर पूरे जोश और उल्लास के साथ गरबा खेलते हैं।
इन्हीं गरबा गीतों में सबसे मशहूर गीत है केसरियो रंग तने लाग्यो ल्या गरबा…। ये गरबा गीत फाल्गुनी पाठक जैसे कलाकारों की आवाज में ऐसा समा बांधता है कि सुनते ही लोग झूम उठते हैं और पूरे जोश के साथ गरबा करते हुए अंबे मां की आराधना करते हैं। ये गीत गुजरातियों के लिए सिर्फ एक गाना बल्कि इमोशन है और सालों से ये गरबा नाइट्स में बजाया जाता आया है।
आइए जानें इस गरबा गीत के बारे में। इस गीत में किसी इंसान से नहीं बल्कि गरबा खेलते वक्त बीच में रखे गए मिट्टी के मटके से बात की जा रही है। आपको बता दें कि गरबा हमेशा गोल घेरे में किया जाता है और इस घेरे के बीच में मिट्टी का छेद वाला मटका रखा जाता है।
इस मटके में दीया जलाया जाता है, जो अंबे मां का प्रतीक होता है और ये मिट्टी का घड़ा गर्भ का प्रतीक माना जाता है। इसी से इस नृत्य का नाम गरबा पड़ा। केसरियो रंग तने लाग्यो ल्या गीत इसी मिट्टी के घड़े को संबोधित करते हुए गाया गया है।
इस गीत में उस मटके से कहा जाता है कि मटके पर मां अंबे की भक्ति का केसरिया रंग चढ़ गया है। मिट्टी गेरुए रंग का होता है। इसलिए ऐसा कहा गया है।
इसके बाद मटके में हुए छेदों का वर्णन किया जाता है, जिसमें दीप जलाया गया है और उसकी रोशनी उन छेदों से बाहर निकल रही है। इस गीत में आगे मां अंबे के धाम आरासुर का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि वो मटका आरासुर धाम घूमकर आया है और मां अंबे का आशीर्वाद है उस गरबे के अंदर।
इस गीत में आगे कहा जाता है कौने-कौने माथे घूम्यो ल्या गरबा यानी गरबा किसके सिर पर सजा या घूमा है? जिसका जवाब आगे इस गीत में दिया जाता है कि ये गरबा स्वंय मां अंबे के सिर पर सजा है यानी मां अंबे ने इस मटके को अपने सिर पर रखा और गरबा खेला है। गरबा गीत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होते, बल्कि मां अंबे की आराधना के लिए बनाए जाते हैं।
ये गीत भी अंबे मां की आराधना के लिए गाया जाता है, जिसे गाते हुए लोग गरबा करते हैं। इस गीत के बोल गुजरात के नवरात्र और गरबा को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। इसके अलावा, इस गीत की धुन भी बहुत मजेदार है, जिस पर लोग अपनी पूरे उल्लास के साथ गरबा खेलते हैं।
इसकी लय भी इतनी बेहतरीन है कि कोई बच्चा हो या बुजुर्ग, हर कोई इसे सुनते ही गरबा खेलने के लिए तैयार हो जाता है।

