राष्ट्रवाणी: भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूत करने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। इनमें विदेशी …और पढ़ें विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम कड़े किए गए। सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर जरूरतें आरबीआई पूरी करेगा।
गिरते रुपये को थामने के लिए आरबीआई का ‘ब्रह्मास्त्र’ एक्शन। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। कमजोर होते रुपये को सहारा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने करेंजीस मार्केट में में स्थिरता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।
केंद्रीय बैंक ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियमों में बदलाव किया है। स्पॉट मार्केट पर दबाव कम करने के लिए, सेंट्रल बैंक सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों की रोजाना की डॉलर की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक स्पेशल विंडो भी खोलने का फैसला किया है। रुपया फिलहाल डॉलर के मुकाबले 96.78 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
मई में यह 96.95 के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था। ऐसे में आरबीआई के नए कदम को रुपये में गिरावट रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा से जुड़े कुछ सौदों को दोबारा बुक करने पर रोक लगाई है।
नए निर्देश जारी होने के बाद रद किए गए रुपये से जुड़े फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को अधिकृत डीलर के जरिए दोबारा बुक नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, कॉन्ट्रैक्ट की अवधि पूरी होने पर उसे आगे बढ़ाने यानी रोलओवर की अनुमति मौजूदा नियमों के तहत जारी रहेगी। आरबीआई ने बिना वास्तविक कारोबारी जरूरत या अंतर्निहित जोखिम का प्रमाण दिए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदे करने की सीमा भी घटा दी है।
पहले यह सीमा 100 मिलियन डॉलर के बराबर थी, जिसे अब घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया गया है। यह बदलाव एक्सचेंज पर कारोबार किए जाने वाले रुपये से जुड़े करेंसी डेरिवेटिव सौदों पर भी लागू होगा। इससे बिना वास्तविक जोखिम के बड़े सौदे करने की गुंजाइश सीमित होगी।
केंद्रीय बैंक ने 2 मिलियन डॉलर से अधिक के रुपये से जुड़े कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) की व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत पात्र सौदों के लिए अधिकृत डीलरों को संबंधित सौदे की रुपये में गणना की गई कुल राशि का 20% आरबीआई के पास नकद रिजर्व के रूप में रखना होगा।
यह नियम चालू खाते से जुड़े उन विदेशी मुद्रा जोखिमों की हेजिंग पर लागू होगा, जिनमें ग्राहक रुपये देकर विदेशी मुद्रा खरीदता है। इसके अलावा, बैंकों और अधिकृत डीलरों को ग्राहकों से यह लिखित पुष्टि भी लेनी होगी कि एक ही कारोबारी जोखिम की हेजिंग किसी दूसरे अधिकृत डीलर के जरिए नहीं की गई है।
आरबीआई ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रोजाना की पूरी विदेशी मुद्रा जरूरत 12 अक्टूबर से सीधे पूरी करने का फैसला किया है। इससे इन कंपनियों को डॉलर खरीदने के लिए खुले विदेशी मुद्रा बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। तेल आयात करने वाली इन कंपनियों की डॉलर की मांग बाजार से हटने पर रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

