राष्ट्रवाणी (कोरबा ब्यूरो): प्रतिनिधि, कोरबा: करतला वन परिक्षेत्र के लबेद बीट अंतर्गत सजापानी गांव में मंगलवार सुबह करीब छह बजे मादा हाथी ने शावक को जन्म दिया। गश्त पर तैनात वन विभाग के कर्मचारियों को इसकी जानकारी मिली, जिसके बाद क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई। नवजात शावक और उसकी मां की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग ड्रोन कैमरे से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है।
वन विभाग के मैदानी अमले ने आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि वे जंगल की ओर न जाएं और हाथियों के करीब पहुंचने या उन्हें देखने के लिए भीड़ न लगाएं। विभागीय टीम मौके पर तैनात है और स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
जन्म के बाद शुरुआती समय में बच्चे को मां के साथ शांत और सुरक्षित वातावरण की जरूरत होती है। ऐसे में हाथियों के झुंड के आसपास लोगों की आवाजाही से खतरा बढ़ सकता है। वन विभाग की निगरानी का उद्देश्य मां और बच्चे को अनावश्यक व्यवधान से बचाना तथा ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी पर रखना है।
विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर खुद जंगल की ओर जाने के बजाय वनकर्मियों के निर्देशों का पालन करें। 22 महीने का गर्भकाल, जन्म के बाद जल्द खड़े होने लगता है एशियाई हथिनी का गर्भकाल सामान्यतः लगभग 22 महीने का होता है। हाथी के बच्चे जन्म के कुछ समय बाद ही खड़े होने और मां का दूध पीने में सक्षम हो सकते हैं।
हालांकि, शुरुआती महीनों में उनका पोषण, सुरक्षा और विकास मां तथा झुंड के साथ पर निर्भर रहता है। हाथियों के झुंड की मादाएं भी बच्चों की देखभाल और सुरक्षा में भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि जंगल में नवजात शावक दिखाई देने पर उसे छूने, उसके पास जाने या झुंड को घेरने से बचना चाहिए।
इससे हाथियों को तनाव और मनुष्यों को हमले का खतरा हो सकता है।

